अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझानों और नतीजों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। दोनों सदनों, हाउस और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित नियंत्रण और वॉशिंगटन में गतिरोध की आशंकाओं के कारण अमेरिकी डॉलर में भारी बिकवाली देखी जा रही है। शुरुआती प्रतिक्रिया में अमेरिकी डॉलर यूरो के मुकाबले लगभग आधा प्रतिशत तक कमजोर हुआ। इस गिरावट से यह संकेत मिलता है कि वित्तीय बाजार इस नतीजे के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे और परिणामों ने निवेशकों को चौंका दिया है। चुनावी अनिश्चितता के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट ने ग्रीनबैक की कमजोरी को और गहरा कर दिया है।
राजकोषीय नीतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता निवेश पर असर
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक स्तर पर दो प्रमुख कारक डॉलर पर दबाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं। पहला बड़ा पहलू यह है कि यदि प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण स्थापित होता है, तो अगले दो वर्षों के दौरान किसी भी अतिरिक्त राजकोषीय ढील या बड़े वित्तीय पैकेज की संभावना काफी कम हो जाएगी। बजट को लेकर कड़े रुख और सीमित वित्तीय खर्च की नीतियों के चलते अर्थव्यवस्था में सरकारी पूंजी का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू डेटा केंद्रों और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे तेज निवेश की गति से जुड़ा है। राजनीतिक सत्ता समीकरणों में बदलाव के कारण AI बुनियादी ढांचे और डेटा केंद्रों में पूंजीगत व्यय की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। यदि तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश अपनी गति खोने लगता है, तो वित्तीय बाजार अमेरिकी आर्थिक वृद्धि के अपेक्षाकृत कमजोर चरण का आकलन करने लगेंगे। विकास दर में संभावित सुस्ती सीधे तौर पर डॉलर के आकर्षण को कम करेगी और मुद्रा पर अतिरिक्त नकारात्मक दबाव बनाएगी।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
चुनावी अनिश्चितता ने वित्तीय परिसंपत्तियों में सुरक्षित निवेश की मांग को फिर से बढ़ा दिया है। इस मांग के कारण अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में ताजा गिरावट दर्ज की गई है। बॉन्ड प्रतिफल में आई यह नरमी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं के प्रभाव को बेअसर कर रही है। फेड दरों के समर्थन के अभाव और गिरते प्रतिफल के दोहरे झटके ने डॉलर पर बिकवाली के दबाव को आक्रामक बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर का प्रदर्शन लगातार कमजोर हुआ है।
येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और डॉलर इंडेक्स की चाल
मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, भारी बिकवाली के दबाव में आ गया। यह सूचकांक सितंबर के अंत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में तेज गिरावट आई और यह एशियाई सत्र के दौरान फिसलकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। यह गिरावट डॉलर को एक महीने के निचले स्तर पर ले आई। वॉशिंगटन में विधायी गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की ओर मोड़ा, जिससे येन को मजबूती मिली।
वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का रुख मिला-जुला रहा। AUD/USD जोड़ी दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए बुधवार के एशियाई सत्र में 0.6965 के करीब कारोबार करती नजर आई। राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर को कमजोर किया, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के अपेक्षाकृत कम आक्रामक नीतिगत रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित दायरे में बांधे रखा।
सोने में ऐतिहासिक उछाल और 4000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर
डॉलर की कमजोरी और गिरते बॉन्ड प्रतिफल का सबसे बड़ा फायदा कीमती धातुओं को मिला है। यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत की ओर बढ़ते हुए सोने में आक्रामक खरीदारी देखी गई। पीली धातु तेजी से उछलते हुए 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई। बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति होने के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और फेड दरों के समीकरणों के कमजोर पड़ने से सोने में सुरक्षित निवेश के प्रवाह को जबरदस्त गति मिली है। निवेशक राजनीतिक जोखिम के खिलाफ हेजिंग के तौर पर बुलियन बाजार में जमकर पूंजी लगा रहे हैं।
दीर्घकालिक राजनीतिक जोखिम और डॉलर का ढांचागत परिदृश्य
दीर्घकालिक दृष्टिकोण से मुद्रा के भविष्य को लेकर एक वैकल्पिक परिदृश्य भी सामने आ रहा है। यदि संयुक्त राज्य अमेरिका में राजनीतिक बहस टकराव से हटकर अधिक रचनात्मक दिशा की ओर मुड़ती है, तो यह डॉलर में शामिल राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को कम कर सकती है। हालांकि इस तरह के रचनात्मक बदलाव की संभावना पर कई तरह की अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन यदि ऐसा होता है तो लंबी अवधि में अमेरिकी डॉलर को ठोस ढांचागत समर्थन मिल सकता है। फिलहाल तात्कालिक तौर पर चुनाव के बदलते समीकरणों, बॉन्ड यील्ड में नरमी और आर्थिक सुस्ती के अंदेशों ने डॉलर को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।


















