वैश्विक कमोडिटी बाजार इस समय भारी अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट (Middle East) से आने वाली पल-पल बदलती खबरों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य टकराव की परस्पर विरोधी खबरों के बीच, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में लगातार बदलाव आ रहा है। ताजा लाइव आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत 4,121 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 4,071 डॉलर से लगभग 1.23 प्रतिशत अधिक है। बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत से 14.5 गुना अधिक हो गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बड़े संस्थागत निवेशक और रिटेल ट्रेडर इस समय बाजार की हर खबर पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। यह भारी उतार-चढ़ाव स्पष्ट करता है कि भू-राजनीतिक घटनाओं का सीधा असर वित्तीय बाजारों की स्थिरता पर कैसे पड़ता है।
अमेरिका-ईरान कूटनीति बनाम हूती विद्रोहियों की नाकाबंदी
दिन की शुरुआत में सोने की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान की तरफ से आ रहे कूटनीतिक सुलह के संकेत थे। हालिया सैन्य हमलों के बावजूद, दोनों देशों ने यह संकेत दिया कि बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ दिनों में मध्यस्थों के माध्यम से तेहरान (Tehran) और वॉशिंगटन (Washington) के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर अमेरिका के साथ बातचीत ईरान के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होती है, तो कूटनीतिक रास्ता अपनाया जा सकता है। इसी तरह का सकारात्मक रुख अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा कूटनीति के लिए खुला है, लेकिन कोई भी समझौता 'वास्तविक' होना चाहिए और ऐसा होना चाहिए जिसका दोनों पक्ष ईमानदारी से पालन करें।
इन बयानों ने शुरुआत में अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव डाला, जिससे सोने को ऊपर चढ़ने का मौका मिला। हालांकि, बाजार की यह राहत बहुत कम समय के लिए ही टिक सकी। जल्द ही यह खबर आई कि यमन (Yemen) के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) के खिलाफ तत्काल प्रभाव से समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर दी है। इस अचानक हुए सैन्य और रणनीतिक तनाव ने बाजार में एक बार फिर भू-राजनीतिक जोखिम को बढ़ा दिया। इस नाकाबंदी की खबर से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने का डर पैदा हो गया, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर ने अपनी शुरुआती गिरावट को पूरी तरह से कवर कर लिया और कच्चे तेल की कीमतें भी अपने निचले स्तर से उछलकर एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गईं। इस घटनाक्रम ने सोने की तेजी पर तुरंत ब्रेक लगा दिया।
टेक्निकल एनालिसिस: महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस और सपोर्ट स्तरों की लड़ाई
तकनीकी चार्ट पर, सोने (XAU/USD) की स्थिति काफी जटिल बनी हुई है। यद्यपि वर्तमान में कीमत 4,121 डॉलर पर है जो एक इंट्राडे रिकवरी को दर्शाती है, फिर भी बड़े टाइमफ्रेम पर यह एक बियरिश (bearish) ट्रेंड का सामना कर रहा है। 14-दिन का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 49 के स्तर पर है, जो न तो ओवरबॉट (overbought) और न ही ओवरसोल्ड (oversold) स्थिति का संकेत देता है, बल्कि यह दर्शाता है कि बाजार स्पष्ट दिशा की तलाश में है। इसके अतिरिक्त, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डायवर्जेंस (MACD) इंडिकेटर -59.72 पर है, जबकि सिग्नल लाइन -76.58 पर है, जो 16.86 का एक बुलिश हिस्टोग्राम बनाता है। यह संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदार बाजार में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, लंबी अवधि के इंडिकेटर्स अभी भी दबाव की कहानी बयां कर रहे हैं। सोने ने हाल ही में चार्ट पर एक 'डेथ क्रॉस' (death cross) का अनुभव किया है, जहां 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 4,249 डॉलर, महत्वपूर्ण 200-दिन के EMA 4,269 डॉलर के नीचे फिसल गया है। वर्तमान कीमत 50-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,280 डॉलर और 200-दिन के SMA 4,477 डॉलर से काफी नीचे बनी हुई है। बोलिंगर बैंड्स (Bollinger Bands) के अनुसार कीमत 3,958 डॉलर और 4,165 डॉलर की रेंज के बीच है, जिसका मध्य बिंदु 4,062 डॉलर है। ट्रेडर्स के लिए 4,116 डॉलर एक अहम पिवट (pivot) है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस (R1) 4,151 डॉलर पर है, जिसके बाद 4,200 डॉलर का एक मजबूत स्तर आता है। वहीं नीचे की तरफ, 4,086 डॉलर का सपोर्ट (S1) और उसके बाद 4,000 डॉलर से लेकर 3,963 डॉलर का एक मजबूत बेस मौजूद है। अगर भारी बिकवाली के कारण यह स्तर भी टूट जाता है, तो इसके नीचे 3,800 डॉलर पर एक और ऐतिहासिक और संरचनात्मक सपोर्ट मौजूद है। अगर कीमत इस आखिरी सपोर्ट को भी तोड़ती है, तो बाजार में एक गहरी गिरावट देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल का सोने पर प्रभाव
सोने की कीमत की दिशा को समझने के लिए अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) की चाल को समझना बेहद जरूरी है। DXY, जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापता है, वर्तमान में अपने निचले स्तर 100.65 से रिकवर होकर 100.90 के आसपास कारोबार कर रहा है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए इन दोनों के बीच एक मजबूत विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घट जाती है और कीमतों पर दबाव पड़ता है।
इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया तेजी भी सोने के लिए एक चुनौती बन गई है। महंगा तेल सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ाता है। जब महंगाई बढ़ने की आशंका होती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) जैसे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने का फैसला कर सकते हैं। चूंकि सोना एक ऐसा एसेट है जिस पर कोई ब्याज (yield) नहीं मिलता, इसलिए उच्च ब्याज दरों वाले माहौल में निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasuries) जैसे सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर मुड़ जाते हैं। मजबूत डॉलर और ऊंचे ब्याज दर का यह कॉम्बिनेशन सोने की कीमतों को सीमित रखने का काम करता है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का ऐतिहासिक महत्व
तकनीकी चुनौतियों और मजबूत डॉलर के दबाव के बावजूद, एक सुरक्षित निवेश (safe-haven) के रूप में सोने की बुनियादी चमक कम नहीं हुई है। मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के आधुनिक वित्तीय दौर में भी, इसका महत्व केवल आभूषणों के निर्माण या औद्योगिक उपयोग तक सीमित नहीं है। जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी का डर सताता है, कोई भयंकर वित्तीय संकट खड़ा होता है, या युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनता है, तो निवेशक स्वाभाविक रूप से सोने की ओर भागते हैं। इसे एक ऐसी वित्तीय बीमा पॉलिसी के रूप में देखा जाता है जो कागजी मुद्राओं के कमजोर होने या शेयर बाजार के क्रैश होने पर भी अपनी क्रय शक्ति बनाए रखती है।
सोना महंगाई के खिलाफ एक बेहद मजबूत ढाल के रूप में भी काम करता है। जब जीवन यापन की लागत बढ़ती है और कागजी पैसे का मूल्य गिरता है, तो सोना अपना वास्तविक मूल्य बरकरार रखता है क्योंकि इसकी आपूर्ति को केंद्रीय बैंकों द्वारा मनमाने ढंग से नोट छापकर नहीं बढ़ाया जा सकता है। सरकारी बॉन्ड या कॉर्पोरेट शेयरों के विपरीत, सोने में कोई काउंटरपार्टी रिस्क (counterparty risk) नहीं होता है। इसके मूल्य को बनाए रखने के लिए किसी विशेष सरकार, निगम या वित्तीय संस्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। यही स्वतंत्रता इसे संकट के समय में एक अत्यंत मूल्यवान निवेश विकल्प बनाती है।
केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की ऐतिहासिक खरीदारी
वर्तमान समय में सोने की कीमतों को सबसे बड़ा समर्थन रिटेल निवेशकों से नहीं, बल्कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की तरफ से मिल रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने और अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था की ताकत को प्रदर्शित करने के लिए, केंद्रीय बैंक ऐतिहासिक गति से सोना जमा कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2022 में अपने खजाने में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसका कुल मूल्य लगभग 70 बिलियन डॉलर था। यह तब से लेकर अब तक की सबसे अधिक वार्षिक खरीदारी है जब से इस तरह के रिकॉर्ड रखे जाने लगे हैं।
इस बड़े पैमाने पर हो रही खरीदारी का नेतृत्व मुख्य रूप से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं कर रही हैं, जिनमें चीन (China), भारत (India) और तुर्की (Turkey) सबसे आगे हैं। इन देशों के लिए, अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाना एक रणनीतिक कदम है, जो उन्हें पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रतिबंधों, मुद्रा की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाता है। किसी भी देश के पास सोने का बड़ा भंडार उसकी वित्तीय मजबूती का प्रतीक माना जाता है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक दूरियां बढ़ रही हैं, केंद्रीय बैंकों की यह मांग सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत आधार का काम कर रही है।
वैश्विक बाजार अवलोकन: मुद्रा और क्रिप्टो में हलचल
कीमती धातुओं के अलावा, व्यापक वित्तीय बाजार भी बदलती आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थितियों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) भारी बिकवाली के दबाव में आ गया है, और सप्ताह की एक बियरिश शुरुआत करते हुए 1.3420 के करीब अपने कई दिनों के निचले स्तर पर वापस आ गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है, क्योंकि निवेशक अमेरिका-ईरान संघर्ष के घटनाक्रमों का लगातार आकलन कर रहे हैं। अब बाजार का ध्यान मंगलवार को आने वाली ब्रिटेन की रोजगार रिपोर्ट पर टिक गया है।
इसी तरह, यूरो (EUR/USD) लगातार तीसरे दिन दबाव में कारोबार कर रहा है और महत्वपूर्ण 1.1400 के स्तर के करीब पहुंच गया है। इस जोड़ी में आई यह गिरावट मिडिल ईस्ट संकट के आसपास बनी हुई अनिश्चितता का सीधा परिणाम है। व्यापारी अब इस सप्ताह के अंत में होने वाले यूरोपीय सेंट्रल बैंक के ब्याज दर के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में, एथेरियम (Ethereum) ने पिछले सप्ताह के दौरान शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले सप्ताह और बुधवार के बीच, एथेरियम ने दोहरे अंकों में लाभ दर्ज किया, और बिटकॉइन (Bitcoin), एक्सआरपी (XRP) और सोलाना (Solana) को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, प्रमुख मेट्रिक्स संकेत देते हैं कि यह तेजी कुछ हद तक कमजोर बनी हुई है, खासकर जब से गुरुवार को व्यापक क्रिप्टो बाजार में तकनीकी सुधार शुरू हुआ है।

















