अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में पिछले दिनों की बढ़त के बाद मुनाफावसूली और गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। पीली धातु दो महीने के निचले स्तर यानी 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब फिसल रही है। अमेरिकी डॉलर में आई हालिया मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है, क्योंकि निवेशक और ट्रेडर फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC की बैठक के ब्योरे का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी, विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना, अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती दे रहा है, जिससे सर्राफा बाजार में बिकवाली का दबाव गहराया है।
तकनीकी चार्ट पर सोने के अहम स्तर और रुझान
कीमती धातु XAU/USD 4,119 डॉलर के आसपास कारोबार करते हुए अल्पकालिक मंदी का रुख दर्शा रही है। चार घंटे के चार्ट पर अगस्त के मध्य के उच्चतम स्तर से खींची गई गिरती ट्रेंडलाइन प्रतिरोध का काम कर रही है। मोमेंटम इंडिकेटर्स लगातार नकारात्मक बने हुए हैं। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 40 के स्तर से नीचे फिसल चुका है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD भी नकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है। दोनों संकेतक यह दर्शाते हैं कि बिकवाली का दबाव अभी भी हावी है।
बाजार में 4,104 डॉलर का स्तर बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यदि यह मध्यावधि निचला स्तर टूटता है, तो जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत के 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक दायरे की ओर गिरावट का रास्ता साफ हो सकता है। इसके नीचे साल का सबसे निचला स्तर 3,941 डॉलर दर्ज है। दूसरी तरफ, तेजी की उम्मीद रखने वाले खरीदारों को भरोसा हासिल करने के लिए लगभग 4,200 डॉलर के ट्रेंडलाइन रेजिस्टेंस को पार करना होगा। साथ ही पिछले दो हफ्तों के ट्रेडिंग रेंज के ऊपरी दायरे 4,227 डॉलर के ऊपर मजबूती दिखानी होगी। यदि यह बाधा पार होती है, तो ध्यान 25 सितंबर के 4,310 डॉलर के उच्च स्तर और उसके बाद 11 व 18 सितंबर के 4,400 डॉलर से ऊपर के स्तरों पर जा सकता है।
लाइव मार्केट डेटा और तकनीकी स्थिति
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सत्र के समापन पर सोने की कीमत 4,144 डॉलर पर रही, जो पिछले बंद 4,187 डॉलर के मुकाबले 1.03 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। बीते 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20 दिनों के औसत के मुकाबले 0.27 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी मोर्चे पर 14-दिन का RSI 35 के स्तर पर है, जो अत्यधिक कमजोरी दर्शाता है। MACD मान -69.55 पर है, जबकि सिग्नल लाइन -53.02 पर है, जिससे हिस्टोग्राम -16.53 के साथ मंदी का स्पष्ट संकेत दे रहा है।
मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20-दिवसीय EMA 4,271 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 4,325 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय SMA 4,372 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,550 डॉलर पर दर्ज हैं। चार्ट पर 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे फिसलना डेथ क्रॉस बनाता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 4,089 डॉलर से 4,491 डॉलर के दायरे में हैं और कीमत बैंड्स के भीतर बनी हुई है। ट्रेंड की ताकत मापने वाला ADX 20 के कमजोर स्तर पर है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर में फास्ट लाइन 4 और सिग्नल लाइन 9 पर है। दैनिक अस्थिरता को दर्शाने वाला 14-दिवसीय ATR 89.70 है। कारोबारी स्तरों के लिहाज से पिवट पॉइंट 4,162 डॉलर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 4,180 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस 4,216 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 4,126 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,107 डॉलर पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय समर्थन लगभग 4,131 डॉलर और प्रतिरोध 4,480 डॉलर पर देखा जा रहा है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का ऐतिहासिक महत्व
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में केंद्रीय भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में केवल आभूषणों और चमक-दमक के अलावा, यह कीमती धातु वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सबसे प्रमुख सुरक्षित पनाहगाह यानी सेफ-हेवन एसेट मानी जाती है। उथल-पुथल, मंदी के डर या वित्तीय संकट के समय निवेशक पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, सोना मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है क्योंकि इसका मूल्य किसी एक देश, सरकार या वित्तीय संस्थान पर निर्भर नहीं करता।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार और धारक हैं। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को मजबूती देने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी राष्ट्र की आर्थिक साख और भुगतान क्षमता का आधार माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीद थी। भारत, चीन और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार का विस्तार कर रहे हैं।
डॉलर, ब्याज दरों और जोखिम संपत्तियों से संबंध
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा संबंध होता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का मूल्यांकन डॉलर यानी XAU/USD में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती अक्सर सोने को अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए महंगा बना देती है, जिससे मांग घटती है। जब डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने की कीमतों में उछाल आता है। इसके अलावा, बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण ब्याज दरों का रुख भी इस पर गहरा असर डालता है। कम ब्याज दरों के माहौल में सोना अधिक आकर्षक हो जाता है, जबकि पूंजी की उच्च लागत और बढ़ती बॉन्ड यील्ड सोने की चमक को फीका कर देती हैं। शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी संपत्तियों में तेजी आने पर सोने में बिकवाली देखी जाती है, जबकि इक्विटी बाजारों में गिरावट आने पर निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने में खरीदारी बढ़ाते हैं।
मुद्रा बाजार और अन्य संपत्तियों की हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर उठापटक जारी है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD 0.7000 के नीचे दबाव में बना रहा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने डॉलर की मांग बढ़ा दी। इसी प्रकार, बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों के बीच USD/JPY 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर कारोबार करता दिखा, जहां खरीदार 200-दिवसीय SMA पार होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भारतीय रुपये में भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज गिरावट दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद डॉलर-रुपया विनिमय दर 96.72 के करीब पहुंच गई, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है। इस बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली ब्याज दर वृद्धि है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन में बिकवाली जारी रही और यह 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जहां शॉर्ट पोजीशन एक महीने के शीर्ष पर पहुंच गईं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी असामान्य स्थिति का सामना कर रहा है, जहां मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी होने के बावजूद बॉन्ड बाजार की अपनी सख्ती केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों को पेचीदा बना रही है।
























