पोलैंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में आई तीव्र तेजी के बाद भी मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा जा रहा है। नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड यानी एनबीपी की अक्टूबर मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख आधार ब्याज दर को 3.75% के मौजूदा स्तर पर ही अपरिवर्तित रखे जाने का व्यापक अनुमान है। हालांकि, देश में मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य से ऊपर निकल जाने और अंतर्निहित गति में तेजी आने के कारण नीति निर्माताओं पर सख्त रुख अपनाने की मांग बढ़ रही है। यदि आने वाले समय में सख्त संदेश नहीं दिया जाता है, तो स्थानीय मुद्रा ज़्लॉटी पर कमजोरी का दबाव बना रह सकता है।
गवर्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस और नीतिगत संकेतों पर टिकी निगाहें
केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत फैसले के ऐलान के बाद गुरुवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर वित्तीय बाजारों की पैनी नजरें लगी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सबसे अहम सवाल यह है कि क्या बैंक के प्रमुख एडम ग्लापिंस्की आधिकारिक तौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत देंगे या नहीं। अब तक के नरम रुख के चलते मुद्रा बाजार में ज़्लॉटी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यदि प्रेस वार्ता के दौरान सख्त मौद्रिक कदमों के संकेत नहीं मिलते हैं, तो विनिमय दर पर बिकवाली का असर और गहरा सकता है।
मुद्रा बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यूएसडी/पीएलएन विनिमय दर 3.91 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 3.90 के मुकाबले 0.20% की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3.49 से 3.93 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 82 के स्तर पर ओवरबॉट जोन में है। एमएसीडी 0.04 पर है जो सिग्नल लाइन 0.03 से ऊपर बुलिश रुझान दिखा रहा है। 20 दिवसीय ईएमए 3.83, 50 दिवसीय ईएमए 3.78 और 200 दिवसीय ईएमए 3.70 पर स्थित हैं, जो एक दीर्घकालिक अपट्रेंड को दर्शाते हैं। इसके अलावा 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 3.70 से 3.93 के दायरे में हैं, जबकि एडीएक्स 44 के मजबूत ट्रेंडिंग स्तर पर बना हुआ है।
मौद्रिक नीति परिषद के सदस्यों का रुख और दर वृद्धि की संभावना
एनबीपी की मौद्रिक नीति परिषद के भीतर से आ रहे बयानों से नीति में संभावित बदलाव की जमीन तैयार होती दिख रही है। परिषद के सदस्य लुडविक कोटेकी के अनुसार, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर औपचारिक चर्चा हो सकती है, हालांकि तत्काल दर वृद्धि का फैसला आने की संभावना कम है। उनका मानना है कि नवंबर में आने वाले नए व्यापक आर्थिक अनुमान इस दिशा में निर्णायक आधार बन सकते हैं।
यदि नवंबर के आर्थिक अनुमानों में अगले साल भी मुद्रास्फीति की दर 4% से अधिक रहने का परिदृश्य सामने आता है, तो मौद्रिक नीति परिषद द्वारा 25 आधार अंकों की एक या दो दर वृद्धियों पर विचार किया जा सकता है। परिषद के कई अन्य सदस्य भी अब यह मान रहे हैं कि यदि अगले वर्ष मुद्रास्फीति अनुमानित सीमा से बाहर रहती है, तो दरों को बढ़ाने की पूरी गुंजाइश बनेगी।
महंगाई के आंकड़ों में उछाल और अंतर्निहित गति
हालिया आर्थिक आंकड़े नीतिगत रुख में बदलाव की जरूरत को पुख्ता करते हैं। पोलैंड में हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सितंबर में सालाना आधार पर बढ़कर 4% पर पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 3.4% दर्ज किया गया था। केवल वार्षिक आंकड़ों के आधार पर स्थिति का पूर्ण आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए मासिक गति को देखना भी आवश्यक होता है।
मौसम आधारित समायोजन और स्मूथिंग के बाद महीने-दर-महीने आधार पर मूल्य वृद्धि 0.62% आंकी गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अंतर्निहित मुद्रास्फीति की रफ्तार एक बार फिर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से अधिक तेज हो गई है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि मूल्य वृद्धि का दबाव केवल कुछ अस्थाई कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के भीतर व्यापक स्तर पर सक्रिय है।
चेक गणराज्य से तुलना और केंद्रीय बैंकों की भिन्न रणनीति
पोलैंड की स्थिति की तुलना उसके पड़ोसी देश चेक गणराज्य से करने पर दोनों केंद्रीय बैंकों के दृष्टिकोण का अंतर साफ दिखाई देता है। चेक नेशनल बैंक के समक्ष मुद्रास्फीति की गति अपेक्षाकृत कम है, फिर भी वहां नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके विपरीत, पोलैंड का केंद्रीय बैंक नए आर्थिक अनुमानों का इंतजार करने और तय लक्ष्य से अधिक महंगाई के इस दौर को बिना दरों में बदलाव किए झेलने के मूड में दिखता है।
जब तक एनबीपी के शीर्ष स्तर से सख्त भाषा और दर वृद्धि की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई जाती, तब तक पोलिश ज़्लॉटी विनिमय दर पर कमजोरी का साया बना रहेगा। निवेशक और कारोबारी अब गुरुवार के विस्तृत संबोधन से यह भांपने की कोशिश करेंगे कि क्या पोलैंड अपने सहज मौद्रिक रुख को त्यागकर सख्त नियंत्रण की राह चुनेगा।
वैश्विक वित्तीय बाजारों और प्रमुख संपत्तियों का हाल
वैश्विक स्तर पर भी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते डॉलर की मांग बढ़ी है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद यह जोड़ी दबाव में है। वहीं, यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है, जहां बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों के बीच व्यापारी 200 दिवसीय एसएमए बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने में मंदी का रुख बना हुआ है और यह 4,100 डॉलर के आसपास दो महीने के निचले स्तर के करीब नजर आ रहा है। क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन 5% से अधिक गिरकर 0.090 डॉलर के आसपास आ गया है, जहां शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। उधर भारत में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने के बाद भी रुपया कमजोर हुआ और यूएसडी/आईएनआर चार महीने के उच्चतम स्तर 96.72 के करीब पहुंच गया। वहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक लक्ष्य से दोगुनी महंगाई और बॉन्ड बाजार की सख्ती के बीच दरों को लेकर जटिल दुविधा का सामना कर रहा है।



















