वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में स्वीडिश क्रोना के सामने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी का दायरा लगातार बढ़ता दिख रहा है। सितंबर के दौरान एक मजबूत कंसोलिडेशन बेस से बाहर निकलने के बाद USD/SEK जोड़ी ने अपनी तेजी की रफ्तार को आगे बढ़ाया है। हाल ही में इस जोड़ी ने 10.10 के स्तर के पास एक अंतरिम उच्च स्तर दर्ज किया था, जिसके बाद कीमतों में हल्की मुनाफावसूली या संक्षिप्त पुलबैक देखा गया है। विश्लेषकों के अनुसार, मुद्रा जोड़ी का तकनीकी ढांचा यह संकेत देता है कि यह पुलबैक दीर्घकालिक अपट्रेंड का अंत नहीं है, बल्कि यदि निचली सीमा पर मजबूती बनी रहती है तो स्वीडिश क्रोना में और अधिक गिरावट दर्ज की जा सकती है।
बाजार के मौजूदा तकनीकी परिदृश्य में 9.83 और 9.79 का क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दायरा पिछले कंसोलिडेशन चरण की ऊपरी सीमा रहा है, जो अब एक मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम कर सकता है। सोसिएते जेनेराल के अनुसार, "USD/SEK सितंबर में एक बड़े बेस से बाहर निकला, जिसके परिणामस्वरूप इसके रिबाउंड में विस्तार हुआ।" यदि खरीदार 9.83 और 9.79 के इस सपोर्ट दायरे की सफलतापूर्वक रक्षा करते हैं, तो अपट्रेंड दोबारा शुरू होने की पूरी संभावना है। इसके विपरीत, यदि मौजूदा पुलबैक के बाद मुद्रा जोड़ी 10.10 के हालिया अंतरिम शिखर को पार करने में सफल होती है, तो ऊपर की ओर अगला लक्ष्य 10.23 और फिर 10.47 के स्तर पर खुल जाएगा।
लाइव तकनीकी संकेतक और डॉलर का दबाव
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, USD/SEK फिलहाल 10.03 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 10.04 था, जिसमें -0.03% का मामूली बदलाव देखा गया है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस मुद्रा जोड़ी का दायरा 8.77 से 10.10 के बीच रहा है, यानी मौजूदा भाव अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर के बेहद करीब बना हुआ है। ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00x पर स्थिर है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 78 पर दर्ज किया गया है, जो ओवरबॉट स्थिति दर्शाता है। इसके अलावा मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 0.11 पर है, जो सिग्नल लाइन 0.10 से ऊपर रहकर 0.01 का बुलिश हिस्टोग्राम बना रहा है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA20) 9.89 पर, EMA50 9.75 पर और EMA200 9.49 पर स्थित है। वहीं साधारण मूविंग एवरेज (SMA50) 9.67 और SMA200 9.40 पर है। चूंकि EMA50 का स्तर EMA200 से काफी ऊपर बना हुआ है, इसलिए तकनीकी चार्ट पर एक क्लासिक गोल्डन क्रॉस सक्रिय है जो दीर्घकालिक तेजी का समर्थन करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 9.62 से 10.13 के बीच फैला है और मध्य रेखा 9.88 पर है, जबकि वर्तमान भाव बैंड के भीतर ट्रेड कर रहा है। औसत दिशात्मक सूचकांक (ADX) 47 पर है, जो एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की पुष्टि करता है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.08 दैनिक अस्थिरता दर्शाता है, जबकि पिवट पॉइंट 10.02, पहला रेजिस्टेंस 10.06, दूसरा रेजिस्टेंस 10.08, पहला सपोर्ट 10.00 और दूसरा सपोर्ट 9.96 पर स्थित है।
ग्लोबल करेंसी मार्केट में व्यापक उथल-पुथल
स्वीडिश क्रोना की इस चाल के पीछे वैश्विक स्तर पर डॉलर की व्यापक मजबूती एक मुख्य वजह बनी हुई है। बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान कई प्रमुख मुद्राओं पर दबाव साफ देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करती रही और हालिया रिकवरी को भुनाने में असफल रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने डॉलर में निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिसने ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक (RBA) की सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को दबाव में रखा। निवेशक अब आगामी FOMC मिनट्स पर नजरें टिकाए हुए हैं।
इसी तरह जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में लगभग डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर 158.50 के करीब डटा रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से नरम रुख के बयानों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते डॉलर की मांग बढ़ी है, हालांकि खरीदार FOMC मिनट्स से पहले 200-दिवसीय SMA की बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। कमोडिटी बाजार में सोने पर भी मंदी का दबाव बना रहा, जहां पीली धातु पिछले कारोबारी सत्र में छुए गए $4,100 के दो महीने के निचले स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। डॉलर इंडेक्स में मंगलवार की गिरावट के बाद आई ताजा रिकवरी ने सर्राफा बाजार को प्रभावित किया है।
क्रिप्टो, रुपया और केंद्रीय बैंकों की चुनौतियां
मुद्रा बाजार के अलावा डिजिटल एसेट स्पेस में डॉगकॉइन (DOGE) $0.090 के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें इस सप्ताह अब तक 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। शॉर्ट पोजिशन एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और डेरिवेटिव डेटा में सतर्कता दिखने से डॉगकॉइन पर दबाव बना हुआ है। वहीं भारतीय मुद्रा बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से कमजोर हुआ। RBI ने अपनी नीतिगत बैठक में रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली ब्याज दर वृद्धि थी। इसके बावजूद USD/INR बढ़कर 96.72 के स्तर तक पहुंच गया, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है।
उधर यूरोप में भी केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत गतिरोध की स्थिति बन रही है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही है, जिसके लिए सामान्य परिस्थितियों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी एक सीधा समाधान होती। हालांकि मौजूदा समय में बॉन्ड बाजार खुद ब खुद वित्तीय सख्ती का हिस्सा पूरा कर रहा है, जिससे ECB के सामने नीतिगत संतुलन साधने की एक जटिल दुविधा पैदा हो गई है। कुल मिलाकर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों और डॉलर की मजबूती के बीच स्वीडिश क्रोना के तकनीकी चार्ट पर 9.83/9.79 का दायरा ही तय करेगा कि क्रोना की यह कमजोरी 10.47 के नए निचले स्तरों तक विस्तार लेती है या नहीं।
























