अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान नरमी देखने को मिली। शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल यूरोपीय घंटों में 89.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार यह 89.62 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाड़ी देशों से समुद्री मार्ग और पाइपलाइनों के जरिए तेल आपूर्ति में आई तेजी है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और अमेरिका के तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़ते तूफान के चलते आपूर्ति में नए अवरोध पैदा होने की आशंका अभी भी पूरी तरह टली नहीं है।
खाड़ी देशों से बढ़ी आपूर्ति और सऊदी अरब का पाइपलाइन विस्तार
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव इसलिए बना क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का उठाव और परिवहन तेज हुआ है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान के अनुसार, देश की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से होने वाला दैनिक प्रवाह बढ़कर 5.8 मिलियन बैरल प्रति दिन के स्तर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही ऊर्जा व्यापार कंपनी विटोल के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि पिछले 7 से 10 दिनों की अवधि में पश्चिम एशिया से लगभग 12 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल और 2 मिलियन बैरल प्रति दिन परिष्कृत ईंधन सफलतापूर्वक रवाना किया जा चुका है।
डांस्के बैंक के विश्लेषकों ने इस स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल के निर्यात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सितंबर के दौरान इस क्षेत्र से तेल की खेप बढ़कर लगभग 19 मिलियन बैरल प्रति दिन पर पहुंच गई, जो अगस्त की तुलना में 4 मिलियन बैरल प्रति दिन अधिक है और युद्ध पूर्व स्तर के लगभग तीन-चौथाई हिस्से के बराबर है। इस सुधार में सबसे बड़ा योगदान सऊदी अरब का रहा है। निर्यात में इस बढ़ोतरी ने ब्रेंट कच्चे तेल को 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने के बाद स्थिरता प्रदान की है, यद्यपि क्षेत्रीय ऊर्जा प्रवाह को लेकर जोखिम के चलते बाजार में संवेदनशीलता बनी हुई है।
रणनीतिक भंडार जारी करने पर अंतरराष्ट्रीय मंथन
वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लाने और ईंधन की संभावित कमी से निपटने के लिए प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं रणनीतिक भंडार जारी करने की योजना पर विचार कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी आईईए के शासी बोर्ड ने यूरोपीय संघ के राजनयिकों के बीच हुई प्रारंभिक चर्चा के बाद बुधवार को एक अनौपचारिक बैठक आयोजित की, जिसमें तेल और डीजल के आपातकालीन भंडार को बाजार में उतारने के प्रस्ताव पर विचार किया गया।
यह घटनाक्रम जी7 देशों के बीच पिछले हफ्ते बनी सहमति के बाद सामने आया है, जिसमें 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति बनी थी। यह कदम उस समय उठाया गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर रणनीतिक भंडार जारी नहीं किए गए, तो अमेरिका डीजल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा सकता है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि आपातकालीन भंडारों से आपूर्ति बढ़ाने के इस प्रयास ने फिलहाल कीमतों में एकतरफा उछाल पर अंकुश लगाया है।
अमेरिका में तूफानी संकट और भू-राजनीतिक तनाव
आपूर्ति में सुधार के बावजूद बाजार विश्लेषकों ने आगाह किया है कि उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिम कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर धकेल सकते हैं। आईएनजी के कमोडिटी रणनीतिकारों के अनुसार, व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर वास्तविक खतरा मंडरा रहा है।
इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी जारी की है कि मैक्सिको की खाड़ी में सक्रिय मौसमी प्रणाली अगले 48 घंटों के भीतर 2026 के अटलांटिक सीजन के पहले चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकती है। यह तूफान सीधे तौर पर अमेरिका के अपतटीय तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन के बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए ने चालू वर्ष और आगामी वर्ष के लिए कच्चे तेल के मूल्य अनुमानों में बढ़ोतरी की है। ईआईए ने इसका कारण तेजी से घटते वैश्विक भंडार, ईरान युद्ध के बीच डीजल बाजार में तंगी और सऊदी बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों को बताया है, जिसने भौतिक ऊर्जा प्रवाह के जोखिमों को बढ़ा दिया है।
डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की बुनियादी संरचना और बेंचमार्क प्रणाली
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट एक प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है। वैश्विक पटल पर ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई शीर्ष तीन ग्रेड्स में शामिल है। कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री की वजह से इसे अक्सर लाइट और स्वीट कच्चा तेल कहा जाता है। यह गुणवत्ता में उच्च स्तर का तेल माना जाता है, जिससे गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधन तैयार करना तकनीकी रूप से काफी सुगम होता है।
डब्ल्यूटीआई की निकासी मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल क्षेत्रों से होती है और इसका प्रमुख भंडारण एवं वितरण केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग हब है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा भी कहा जाता है। कुशिंग हब की भंडारण क्षमता और पाइपलाइन नेटवर्क सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों की दिशा निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक और तकनीकी स्थिति
कच्चे तेल की कीमतें आपूर्ति और मांग के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होती है, तो औद्योगिक और परिवहन ईंधन की मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी आती है, जबकि आर्थिक मंदी के दौर में मांग कमजोर पड़ जाती है। इसके अलावा ओपेक के नीतिगत फैसले कीमतों को व्यापक रूप से प्रभावित करते हैं। 12 सदस्य देशों वाला ओपेक संगठन हर छह महीने में बैठक कर उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। उत्पादन में कटौती आपूर्ति घटाकर कीमतों को बढ़ाती है, जबकि कोटा बढ़ाने से कीमतें गिरती हैं। रूस सहित दस अन्य गैर-ओपेक देशों के साथ मिलकर यह समूह ओपेक प्लस कहलाता है।
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर का रुख और भंडार आंकड़े कीमतों पर असर डालते हैं। चूंकि कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर की मजबूती इसे गैर-अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगा बनाती है। हर मंगलवार को अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के साप्ताहिक भंडार आंकड़े जारी होते हैं। हालिया तकनीकी संकेतकों के अनुसार डब्ल्यूटीआई क्रूड 45 के आरएसआई स्तर पर एक दायरे में कारोबार कर रहा है, जहां 89.10 डॉलर और 88.57 डॉलर प्रमुख समर्थन स्तर हैं, जबकि 90.38 डॉलर और 91.13 डॉलर तात्कालिक प्रतिरोध बिंदु बने हुए हैं।
मुद्रा, बांड यील्ड और अन्य वैश्विक वित्तीय बाजारों की स्थिति
कमोडिटी और वित्तीय बाजारों के अन्य क्षेत्रों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन मिला। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा, जबकि बाजार प्रतिभागी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एफओएमसी मिनट्स का इंतजार कर रहे थे। वहीं यूएसडी बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर के निकट कारोबार कर रहा था, जिसे बैंक ऑफ जापान के नरम रुख और अमेरिकी डॉलर की मांग से बल मिला।
सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने में शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान कमजोरी का रुख बना रहा और यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर के करीब दर्ज किया गया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) में गिरावट जारी रही और यह 5 प्रतिशत से अधिक टूटकर 0.090 डॉलर के आसपास पहुंच गया, जहां डेरिवेटिव बाजार में मंदी के दांव एक महीने के उच्च स्तर पर थे। भारतीय मुद्रा बाजार में, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 5.5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.72 के चार महीने के निचले स्तर पर आ गया। उधर यूरोप में, मुद्रास्फीति के लक्ष्य से दोगुना होने के बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक नीतिगत दुविधा का सामना कर रहा है, जहां बांड बाजार पहले से ही वित्तीय सख्ती को दर्शा रहा है।


















