अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। हाजिर बाजार में पीली धातु सुधरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जहां कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में 4,000 डॉलर से नीचे खरीदारी देखने को मिली थी। हालांकि निचले स्तरों से हल्की बढ़त के बावजूद सर्राफा बाजार पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि निवेशकों की नजरें बुधवार को आने वाले नीतिगत फैसले और आने वाले दिनों में जारी होने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का दायरा
वित्तीय बाजारों में आम सहमति बनी हुई है कि फेडरल रिजर्व अपनी आगामी बैठक में उधार लागत को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रख सकता है। इसके बावजूद नीति निर्माताओं के हालिया बयानों ने संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है, जिसे पूरी तरह काबू में लाने के लिए ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। इस सख्त रुख के कारण गैर-उपज वाले सर्राफा एसेट्स पर निवेशकों का भरोसा पूरी तरह स्थिर नहीं हो पा रहा है।
फेडरल रिजर्व की अधिकारी हैमैक के हालिया संबोधन में मध्यम स्तर की सख्ती के संकेत मिले। उनके वक्तव्य विश्लेषण स्कोर 7.2 रहा, जो ऐतिहासिक औसत 7.6 से थोड़ा नरम है लेकिन लगातार बने हुए मूल्य दबावों पर उनकी गहरी चिंता को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि निम्न आय वर्ग के अमेरिकी नागरिक बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं और उत्पादन लागत में इजाफा साफ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही एक उभरती हुई महंगाई की मानसिकता को लेकर चिंता जताई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नीति को सख्त बनाए रखने का रुझान बरकरार है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा वित्तीय स्थितियां पर्याप्त प्रतिबंधात्मक नहीं दिख रही हैं और तटस्थ दर अनिश्चित है। यदि महंगाई की उम्मीदें और बढ़ती हैं, तो केंद्रीय बैंक को और आक्रामक कदम उठाने पड़ सकते हैं।
फेड सेंटिमेंट इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ 127.92 के स्तर पर दर्ज किया गया, जो पिछले आंकड़ों की तुलना में सख्ती में 0.25 अंकों की मामूली कमी दर्शाता है। इसके बावजूद सूचकांक 100 के तटस्थ स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है, जिसका अर्थ है कि नीति निर्माताओं का समग्र नजरिया अब भी सख्त दायरे में है। यही कारण है कि आगामी नीतिगत समीक्षा में दरों को स्थिर रखे जाने की संभावना के बीच भविष्य के सख्त कदमों की आशंका सोने की कीमतों पर भारी पड़ रही है।
इस हफ्ते के अहम व्यापक आर्थिक संकेतक
नीतिगत निर्णय के अलावा यह हफ्ता कई महत्वपूर्ण आर्थिक घोषणाओं से भरा हुआ है। निवेशक अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद के अग्रिम आंकड़ों और व्यक्तिगत उपभोग व्यय आधारित मुद्रास्फीति सूचकांक के जारी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करेंगे कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गति कितनी मजबूत है और कीमतों का दबाव किस दिशा में जा रहा है।
इसके साथ ही प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख हाइपरस्केलर कंपनियों के तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी घोषित होने वाले हैं। कॉर्पोरेट आय के ये परिणाम वॉल स्ट्रीट के जोखिम रुझान को तय करेंगे। यदि इक्विटी बाजारों में तेजी लौटती है तो सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है, जबकि बाजार में कमजोरी पीली धातु को अतिरिक्त सहारा दे सकती है। विदेशी मुद्रा बाजार में भी हलचल तेज है, जहां बैंक ऑफ जापान का नीतिगत फैसला शुक्रवार को घोषित होगा, जबकि ऑस्ट्रेलिया में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर के ऊपर स्थिर रहने की कोशिश कर रहा है।
चार्ट पर तकनीकी स्थिति और अहम स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी 4,011.06 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि वर्तमान में यह 4,008 डॉलर के स्तर पर है, जो पिछले बंद 4,060 डॉलर से 1.29 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। चार्ट पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 4,136.22 डॉलर पर स्थित है, जिसके नीचे बने रहने से अल्पावधि में मंदी का रुझान कायम है। जब तक कीमत इस औसत स्तर को पार नहीं कर लेती, तब तक किसी टिकाऊ सुधार की उम्मीद सीमित रहेगी।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 31 से 35 के निचले दायरे में बना हुआ है, जो भारी बिकवाली दबाव की ओर संकेत करता है, हालांकि यह अभी अत्यधिक ओवरसोल्ड क्षेत्र में पूरी तरह नहीं पहुंचा है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस सूचक -63.63 पर है जो सिग्नल लाइन -57.31 से नीचे बना हुआ है, और हिस्टोग्राम -6.33 के साथ नकारात्मक बना हुआ है। इसके अतिरिक्त 50-दिवसीय ईएमए 4,254 डॉलर पर और 200-दिवसीय ईएमए 4,430 डॉलर पर है, जहां डेथ क्रॉस की स्थिति लंबी अवधि के मंदी के रुझान को दर्शाती है।
ऊपरी स्तरों पर 4,016 डॉलर का दैनिक पिवट पहला बैरियर है, जिसके बाद तत्काल प्रतिरोध 4,042 डॉलर और 4,077 डॉलर पर मौजूद है। गिरावट की स्थिति में 30 जून का निचला स्तर 3,941.76 डॉलर प्राथमिक सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है, जबकि तकनीकी स्तरों पर पहला सपोर्ट 3,981 डॉलर और दूसरा अहम आधार 3,955 डॉलर पर देखा जा रहा है। 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर 3,901 डॉलर और उच्चतम स्तर 5,586 डॉलर के दायरे में है, जिससे पता चलता है कि मौजूदा भाव अपने वार्षिक निचले स्तरों के काफी करीब पहुंच चुका है।
मुद्रास्फीति, डॉलर और केंद्रीय बैंकों का संचय
मानव इतिहास में सोने ने मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में निर्णायक भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसके उपयोग और चमक के अलावा इसे अनिश्चितता के दौर में सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। चूंकि यह किसी विशेष सरकार या जारीकर्ता संस्था की देनदारी नहीं है, इसलिए इसे मुद्रा के अवमूल्यन और अनियंत्रित महंगाई के खिलाफ प्राथमिक बचाव का साधन माना जाता है।
वैश्विक केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार और धारक रहे हैं। वित्तीय अस्थिरता के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को संबल देने के लिए केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडारों में विविधता लाते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और शोधन क्षमता पर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा मजबूत करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद थी। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में लगातार इजाफा कर रहे हैं।
सोने का संबंध अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के साथ आमतौर पर विपरीत रहता है। जब अमेरिकी डॉलर में गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है। इसके विपरीत, जब डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो बिना ब्याज वाली धातु रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिससे इसमें बिकवाली का दबाव बनता है।
राजनीतिक घटनाक्रम और आगे का परिदृश्य
मौद्रिक नीतियों के अलावा आगामी 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड के लिए बेहद अहम मोड़ साबित हो सकते हैं। अमेरिकी संसद पर नियंत्रण की यह सियासी लड़ाई देश की राजकोषीय प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है। यदि नई नीतियां सरकारी खर्च और कर्ज को प्रभावित करती हैं, तो यह सीधे तौर पर फेडरल रिजर्व के आगे के नीतिगत पथ और ब्याज दरों के भविष्य को तय करेगा।
फिलहाल सर्राफा कारोबारी एशियाई सत्र में मिले निचले समर्थन के बाद अमेरिकी आंकड़ों और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के बयान के इंतजार में हैं। 4,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर बाजार के लिए बेहद संवेदनशील बना हुआ है, और आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक दिसंबर में दरों में एक और वृद्धि के संकेत देता है या मौद्रिक सख्ती के विराम की घोषणा करता है।

















