अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव का गहरा असर देखने को मिल रहा है, जहां यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद आगे बड़ी मंदी के आसार बेहद सीमित नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक चर्चाओं की सुर्खियों के चलते यूरोपीय गैस दरों में 8 प्रतिशत की क्षणिक गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन आपूर्ति से जुड़े बुनियादी समीकरण अब भी गंभीर दबाव का संकेत दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आधिकारिक रूप से बंद रहने के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रवाह बड़े व्यवधान का सामना कर रहा है, जिससे कतर से निकलने वाला एलएनजी प्रवाह युद्ध-पूर्व स्तर के मुकाबले महज 20 प्रतिशत पर सिमट गया है। एशियाई बाजारों में गैस की ऊंची कीमतों और यूरोप में औसत से काफी नीचे चल रहे भंडारण स्तरों ने आकस्मिक खरीद और कीमतों में दोबारा तेज उछाल का गंभीर जोखिम खड़ा कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी और कतर के एलएनजी प्रवाह पर असर
वैश्विक ऊर्जा गलियारे के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी का अंतरराष्ट्रीय वितरण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस महत्त्वपूर्ण मार्ग के बंद रहने के कारण कतर का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही वैश्विक खरीदारों तक पहुंच पा रहा है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में कतर की एलएनजी आपूर्ति युद्ध छिड़ने से पहले के सामान्य स्तर की तुलना में केवल 20 प्रतिशत रह गई है। यूरोप अपनी सर्दियों की ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर एलएनजी आयात पर निर्भर है, लेकिन फारस की खाड़ी से आने वाले जहाजों की आवाजाही ठप पड़ने से समूचे महाद्वीप में ईंधन सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
एशिया और यूरोप के बीच मूल्य अंतर और अमेरिकी कार्गो का रुख
यूरोपीय और एशियाई गैस बाजारों के बीच बढ़ते मूल्य अंतर ने ईंधन आपूर्ति की दिशा को सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। यदि दोनों क्षेत्रों के बीच दरों का यह अंतर 6 यूरो प्रति मेगावाट घंटा तक पहुंच जाता है, तो अतिरिक्त परिवहन लागत के बावजूद अमेरिकी निर्यातकों के लिए अपने एलएनजी जहाजों को यूरोप के बजाय एशिया भेजना कहीं अधिक मुनाफे का सौदा बन जाता है। इस समीकरण को स्पष्ट करते हुए कॉमर्जबैंक के नॉर्मन लीबके ने कहा कि जैसे ही अंतर 6 यूरो प्रति मेगावाट घंटा पहुंचता है, अतिरिक्त परिवहन लागत के कारण अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के लिए यूरोप के बजाय एशिया में एलएनजी भेजना अधिक आकर्षक हो जाता है। आगामी हीटिंग सीजन के नजदीक आने और गैस भंडारण के काफी निचले स्तर पर होने के कारण यूरोप को अमेरिकी आपूर्ति रोके रखने के लिए अपनी कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना होगा, जिससे दरों में ज्यादा गिरावट की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल: येन, डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर
ऊर्जा संकट और केंद्रीय बैंकों के रुख का व्यापक असर वैश्विक मुद्रा बाजारों पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक की ओर से दिए गए सख्त बयानों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर में तेजी का रुझान बरकरार रखा है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 157.50 के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को कुछ हद तक थाम रखा है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम काफी हद तक बाजार की पूर्व अपेक्षाओं के अनुरूप था, लेकिन बैंक के अपेक्षाकृत नरम रुख ने येन के खरीदारों को रक्षात्मक स्थिति में बनाए रखा है।
सोने में नरमी और वाशिंगटन में ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चमक लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में फीकी पड़ती दिखी। पीली धातु मंगलवार को फिसलकर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर आ गई। अमेरिकी डॉलर में खरीदारी की नए सिरे से वापसी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले उतार-चढ़ाव और व्यापक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली इस धातु पर मुनाफावसूली का दबाव देखा जा रहा है।
वित्तीय बाजारों की निगाहें अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी हैं। दोनों वैश्विक नेता गुरुवार को वाशिंगटन में एक बेहद महत्त्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए आमने-सामने होंगे। बाजार विश्लेषक इस बैठक को अत्यधिक संवेदनशीलता से देख रहे हैं, क्योंकि इस शिखर वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने मौजूदा व्यापारिक समझौते और संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक कारोबार अनिश्चितता के एक नए और जटिल दौर में प्रवेश करेगा।


















