देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 22,569 करोड़ रुपये के विशाल सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दौरान पुराने भागीदारों ने अपनी मिल्कियत छोड़ने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए शेयर बेचने की पेशकश के बावजूद इन शेयरधारकों ने अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के अंदर ही बनाए रखने का फैसला किया है। इस पूरी बिक्री प्रक्रिया में मुख्य रूप से बड़े संस्थागत निवेशक शामिल रहे, जिनके पास इस निर्गम की शुरुआत से पूर्व नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 36.82 प्रतिशत संयुक्त हिस्सेदारी मौजूद थी। उन्होंने खुले बाजार में निकासी के लिए एक्सचेंज की कुल हिस्सेदारी में से मात्र 5.11 प्रतिशत के बराबर इक्विटी का त्याग किया है।
विदेशी और घरेलू संस्थागत शेयरधारकों की संतुलित भागीदारी
इस सार्वजनिक पेशकश के तहत जो 20 संस्थागत इकाइयां अपने शेयर बेचने के लिए आगे आईं, उनमें 9 विदेशी संस्थागत निवेशक शामिल रहे। इस आईपीओ के आने से पहले इन विदेशी फंडों के पास नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की कुल 15.96 प्रतिशत शेयरधारिता थी। वहीं दूसरी तरफ घरेलू स्तर की 11 संस्थागत संस्थाओं ने भी इस निर्गम में हिस्सा लिया। इन घरेलू फर्मों के समूह में 10 सरकारी उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी शामिल रही, जिनके पास ओएफएस से पहले इस एक्सचेंज की 20.86 प्रतिशत इक्विटी थी। इन दोनों ही वर्गों के निवेशकों ने अपनी कुल जमा पूंजी में से केवल बहुत मामूली हिस्से की बिक्री की है।
प्रमुख शेयरधारकों ने बेचे औसतन सात प्रतिशत शेयर
विभिन्न बड़े वित्तीय संस्थानों के ब्योरे पर नजर डालें तो अरांडा इन्वेस्टमेंट्स के पास इस पेशकश से पहले 4.54 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज थी। इसी तरह स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत और क्राइसकैपिटल के पास 3.73 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। इन चारों दिग्गज कंपनियों ने अपनी-अपनी कुल होल्डिंग में से औसतन करीब 7 प्रतिशत शेयरों की ही बिक्री की है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वे एक्सचेंज के भविष्य को लेकर लंबे समय के लिए आश्वस्त हैं।
क्राउन कैपिटल की रणनीति और आंशिक पूंजी निकासी का मौका
विदेशी निवेशकों के पाले से क्राउन कैपिटल ने अपेक्षाकृत थोड़ा बड़ा हिस्सा बेचते हुए अपनी पूर्व हिस्सेदारी में से लगभग 11 प्रतिशत शेयर ओएफएस में पेश किए। इस तरह की चुनिंदा बिकवाली से यह स्पष्ट होता है कि पुराने निवेशकों ने इस विशाल निर्गम का उपयोग अपनी पूंजी का एक छोटा हिस्सा भुनाने के लिए किया, जबकि कंपनी के मुख्य मालिकाना ढांचे में उनकी गहरी भागीदारी पूर्ववत बनी हुई है।
देश का दूसरा सबसे बड़ा निर्गम और बोली का अंतिम चरण
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की यह सार्वजनिक पेशकश अपने दूसरे दिन यानी शुक्रवार को ही निवेशकों की ओर से पूरी तरह स्वीकार कर ली गई थी और इसके सभी आरक्षित कोटे भर चुके थे। आज इस ऐतिहासिक पेशकश का आखिरी कारोबारी दिन निर्धारित है। भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन चुका है। इसने साल 2022 के दौरान आए भारतीय जीवन बीमा निगम के 21,000 करोड़ रुपये के निर्गम को पीछे छोड़ दिया है, जबकि पहले स्थान पर साल 2024 में आया हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का विशाल निर्गम काबिज है।


















