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पंजाब में सिख युवक पर अत्याचार के मामले में सुखबीर सिंह बादल का हमला, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से दखल की मांगपंजाब
4 सित॰ 2026, 3:18 pm (63 दिन पहले)· 5

पंजाब में सिख युवक पर अत्याचार के मामले में सुखबीर सिंह बादल का हमला, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से दखल की मांग

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब में एक सिख युवक को प्रताड़ित किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से तुरंत दखल देने की अपील की है।

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब की सियासत में भूचाल ला देने वाले आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में ड्रग्स के नासूर के खिलाफ आवाज उठाने की सजा एक सिख युवक को भुगतनी पड़ी है। उनका कहना है कि इस पंजाबी सिख लड़के को केवल इसलिए बेरहमी से प्रताड़ित और अपमानित किया गया क्योंकि उसने खुलकर सच्चाई बयां करने की हिम्मत जुटाई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने इस घटना को बेहद भयावह बताया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की पुरजोर अपील की। उन्होंने जिक्र किया कि इसी युवक ने इससे पहले सुनाम के शेरो गांव में एक छत पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उसे सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।

युवक के साथ क्रूरता की हदें पार करने का आरोप

सुखबीर सिंह बादल ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि पीड़ित युवक के साथ अमानवीय हिंसा की गई, जिसके तहत उसके कपड़े तक उतार दिए गए और उसे बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उसे बिजली के झटके दिए गए और उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करते हुए उसकी पगड़ी तथा दाढ़ी के साथ गंभीर बदसलूकी की गई। क्रूरता का दायरा यहीं नहीं रुका, बल्कि आरोप है कि युवक की जांघों को तेजधार ब्लेड से काट दिया गया और उसके खुले घावों पर नमक छिड़का गया। इसके अलावा, उसे एक घंटे से अधिक समय तक गीले जूतों से लगातार पीटा गया और बाद में उसे नग्न अवस्था में सरेआम घुमाया गया। आरोप यह भी लगाया गया कि इस दौरान भीड़ के सामने उसकी मां और बहनों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, जिससे इलाके में भारी रोष व्याप्त है।

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मानवाधिकार आयोग से दखल और न्याय की गुहार

इस पूरी कथित घटना को पूरी तरह अस्वीकार्य करार देते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि वह इस घिनौनी हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से यह मांग करते हैं कि वह बिना किसी देरी के मामले का संज्ञान ले। उन्होंने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि पंजाब की आवाज को इस तरह के हथकंडों से कभी भी चुप नहीं कराया जा सकता और न ही भविष्य में ऐसा होने दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने देश के राष्ट्रीय मीडिया से भी आग्रह किया कि वे इस मामले को आम आदमी पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे आतंक के रूप में प्रमुखता से उजागर करें ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके।

विपक्षी दलों के निशाने पर भगवंत मान सरकार

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब की राजनीति में पहले से ही भारी उथल-पुथल मची हुई है। विपक्षी दलों का यह गंभीर आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनकी पत्नी डॉक्टर गुरप्रीत कौर और आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बिचौलियों के माध्यम से जबरन वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट संचालित कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल सहित तमाम विपक्षी संगठनों का दावा है कि बलात्कार के मामलों को दबाने और खत्म करने के नाम पर पांच करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की गई थी। इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पूरे मामले पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब कर ली है, जबकि आम आदमी पार्टी इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताती रही है।

सवाल-जवाब

सुखबीर सिंह बादल ने किस घटना को लेकर आवाज उठाई है?
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक सिख युवक को प्रताड़ित और अपमानित किए जाने के मामले में आवाज उठाई है।
किस संस्था से दखल देने की अपील की गई है?
सुखबीर सिंह बादल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।
युवक ने विरोध प्रदर्शन कहां किया था?
पीड़ित युवक ने इससे पहले सुनाम के शेरो गांव में एक छत पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया था।
युवक के साथ किस तरह की प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है?
आरोप है कि युवक के कपड़े उतारकर उसे पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए, दाढ़ी-पगड़ी के साथ बदसलूकी की गई और जांघों को ब्लेड से काटा गया।
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP पर क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनकी पत्नी और AAP नेतृत्व बिचौलियों के जरिए जबरन वसूली का सिंडिकेट चला रहे हैं और रेप के मामलों को खत्म करने के लिए रिश्वत मांगी गई थी।
इस मामले में किस आयोग ने जांच रिपोर्ट मांगी है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में जांच रिपोर्ट मांगी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·63 दिन पहले

यह मामला कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार हनन का एक अति गंभीर प्रकरण है। जिस प्रकार हिरासत या प्रताड़ना के दौरान अमानवीय हिंसा और धार्मिक प्रतीकों के अपमान के आरोप लगाए गए हैं, वह आपराधिक न्याय प्रणाली के समक्ष बड़ी चुनौती पेश करते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की इस मामले में संलिप्तता और तथ्यान्वेषी रिपोर्ट तलब किए जाने से यह स्पष्ट है कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। यदि इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जाँच सुनिश्चित नहीं की गई, तो राज्य में राजनीतिक तनाव और सार्वजनिक अशांति का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है, जिससे आंतरिक सुरक्षा प्रभावित होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·63 दिन पहले

यह प्रकरण पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में गंभीर टकराव का नया केंद्र बन गया है, जहाँ ड्रग्स के खिलाफ मुखरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़े करते हैं। जैसे-जैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की इस मामले में सक्रियता बढ़ी है, आने वाले दिनों में यह मुद्दा कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सत्ताधारी दल के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित होगा और विपक्षी दल इसे चुनावी हवा देने से पीछे नहीं हटेंगे।

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