अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को यूरो ने जापानी मुद्रा के मुकाबले खासी मजबूती दिखाई और यह उछलकर लगभग 178.13 के स्तर तक पहुंच गया। येन पर बने लगातार दबाव के बीच यह हलचल देखने को मिली है, हालांकि एशिया प्रशांत क्षेत्र की इस अहम करेंसी को एक बड़े स्तर पर समर्थन मिलने के आसार भी मजबूत बने हुए हैं। वैश्विक ट्रेडर्स और विश्लेषकों का मानना है कि येन में जरूरत से ज्यादा गिरावट को रोकने के लिए अमेरिका और जापान की ओर से साझा दखल की संभावना गहराती जा रही है, जो बाजार में येन को भारी बिकवाली से बचाने में मददगार साबित हो रही है। इसी के साथ यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी से आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों पर भी सभी की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।
मुद्रा में कमजोरी रोकने के लिए कूटनीतिक हलचल और साझा कदम
एमयूएफजी के विश्लेषकों के मुताबिक हाल के घटनाक्रमों में यह बात सामने आई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापानी नीति निर्माताओं से मुलाकात के दौरान येन की कमजोरी पर गंभीर चिंता जताई थी। विश्लेषकों का आकलन है कि इस रुख से यह उम्मीद बेहद पुख्ता हुई है कि दोनों पक्षों पर यूएसडी/जेपीवाई की नई तेजी पर लगाम कसने में मदद करने का लगातार दबाव बना हुआ है। इस राजनीतिक सतर्कता और दबाव के चलते यह माना जा रहा है कि जापानी अधिकारी अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त मजबूती का डटकर मुकाबला करने के लिए विवश हो सकते हैं।
इधर टोक्यो में भी नीतिगत स्तर पर हलचल तेज है। जापानी वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि 25 सितंबर को हुई फोन वार्ता के संदर्भ में उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के साथ आपसी सहयोग को और अधिक सशक्त बनाने पर पूरी सहमति जताई है। जापानी मुद्रा के मूल्य पर अपनी राय रखते हुए तात्सुकी कातायामा ने कहा, "मेरा मानना है कि अवमूल्यित जापानी येन समस्याग्रस्त है।" शीर्ष स्तर से आए इस बयान ने ट्रेडर्स को आगाह कर दिया है कि अगर येन में अनियंत्रित गिरावट जारी रही, तो दोनों देश विदेशी मुद्रा बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं।
जर्मनी के कमजोर खुदरा आंकड़े और महंगाई का नया इम्तिहान
यूरोपीय मोर्चे पर आर्थिक आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। जर्मनी से सामने आए अगस्त महीने के खुदरा बिक्री आंकड़ों ने बाजार को निराश किया है। उपभोक्ता खर्च के इस प्रमुख पैमाने में मासिक आधार पर 1.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इसके 2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया था। इससे पहले जुलाई महीने में उपभोक्ता खर्च 3.2 प्रतिशत घटा था, जिसे पहले दर्ज किए गए माइनस 3.4 प्रतिशत के स्तर से संशोधित करके थोड़ा बेहतर किया गया था। खुदरा मांग में यह सुस्ती दर्शाती है कि घरेलू स्तर पर उपभोक्ता अभी भी पूरी तरह खुलकर खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
इसके बाद निवेशकों का पूरा ध्यान जर्मनी के सितंबर माह के प्रारंभिक हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है, जो 12:00 जीएमटी पर जारी होने हैं। यह रिपोर्ट बुधवार 30 सितंबर 2026 को दोपहर 12:00 बजे सामने आएगी। अनुमान जताया जा रहा है कि जर्मनी में मूल्य दबाव सालाना आधार पर बढ़कर 3.1 प्रतिशत पर पहुंच सकता है, जो कि अगस्त महीने की अंतिम रीडिंग में 2.9 प्रतिशत दर्ज किया गया था। महंगाई में यह संभावित बढ़ोतरी यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अगले कदमों के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है।
डॉलर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने के बाजार की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के अन्य क्षेत्रों में भी काफी उथल-पुथल बनी हुई है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.6950 के दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। अगस्त माह के लिए ऑस्ट्रेलिया के बुनियादी सीपीआई आंकड़े उम्मीद से काफी कमजोर रहने के कारण रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में आगे वृद्धि किए जाने की आशाओं पर पानी फिर गया है। इसके अलावा चीन के विनिर्माण पीएमआई आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई करेंसी में नई जान फूंकने में नाकाम रहे, भले ही उस समय अमेरिकी डॉलर की बढ़त थमी हुई थी।
उधर यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के स्तर से नीचे नुकसान में बनी रही। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और प्रत्यक्ष सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, जिससे घरेलू स्तर पर सुस्त फैक्ट्री उत्पादन और रिटेल बिक्री के आंकड़ों का नकारात्मक असर काफी हद तक संतुलित हो गया। साथ ही अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई।
कमोडिटी बाजार में यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक सोना एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा और यह 4,200 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े से नीचे बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को मंगलवार को छुए गए दो महीने के शीर्ष स्तर से नीचे खींच लिया, जिससे सर्राफा कीमतों को सहारा मिला। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की संभावनाओं ने सोने की इस बढ़त को सीमित रखा, क्योंकि कारोबारी गैर-ब्याज वाली इस धातु पर नए दांव लगाने से पहले अमेरिका के महत्वपूर्ण वृहद आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
क्रिप्टो बाजार में आवे की चाल और मुनाफावसूली
डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र में आवे का टोकन बुधवार को फिसलकर 161 डॉलर के नीचे आ गया। इससे पिछले दिन इसमें 10 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त तेजी देखने को मिली थी। ब्लॉकचेन डेटा से संकेत मिल रहे हैं कि हालिया उछाल के बाद निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की है। दूसरी तरफ इस टोकन के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी भी चल रही है। आवे के संस्थापक स्टैनी कुलेचोव आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत टोकन बर्न तंत्र पेश करने पर विचार कर रहे हैं, जो भविष्य में इस डिजिटल टोकन के लिए एक सकारात्मक उत्प्रेरक साबित हो सकता है।



















