अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के आंकड़ों को लेकर वित्तीय हलकों में चल रही चर्चाओं के बीच व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई सूचकांक में संभावित संशोधन सामने आया है। इस संशोधन को लेकर बीएनवाई मेलन के अमेरिकाज मैक्रो रणनीतिकार जॉन वेलिस ने स्पष्ट किया है कि आगामी पीसीई संशोधन एक तकनीकी समायोजन मात्र है, जो व्यापक अमेरिकी मुद्रास्फीति की कहानी को बुनियादी तौर पर बदलने वाला नहीं है। पिछले कुछ समय से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई और पीसीई के बीच जो अंतर दिखाई दे रहा था, उसकी सबसे बड़ी वजह प्रबंधन के तहत संपत्तियों में उछाल के साथ पोर्टफोलियो प्रबंधन शुल्क का बढ़ना था। इस कारण पीसीई के हालिया आंकड़े वास्तविकता की तुलना में अधिक बढ़े हुए दिखाई दे रहे थे।
सांख्यिकीय विकृति और कार्यप्रणाली में बदलाव
आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो यानी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस अब अपनी गणना पद्धति में सुधार करने जा रहा है। एजेंसी जल्द ही श्रम आधारित कार्यप्रणाली यानी लेबर बेस्ड मेथोडोलॉजी को अपनाने की तैयारी में है। इससे फेडरल रिजर्व के पसंदीदा मुद्रास्फीति गेज की विश्वसनीयता में सुधार देखने को मिलेगा। जॉन वेलिस के अनुसार हाल के दिनों में पीसीई और सीपीआई के बीच का फासला किसी वास्तविक उपभोक्ता मुद्रास्फीति के दबाव से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो प्रबंधन शुल्क से पैदा हुई विकृति के चलते बढ़ा था। जब संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़ा, तो प्रबंधन शुल्क भी उसी अनुपात में बढ़ गया, जिससे पीसीई के आंकड़ों पर अनावश्यक दबाव नजर आने लगा था।
डेटा की सफाई को वास्तविक मंदी न समझें
गणना पद्धति में इस बदलाव के बाद यदि आने वाले समय में कोर पीसीई के आंकड़े नरम या कम दिखाई देते हैं, तो निवेशकों को इसे वास्तविक मंदी या घटती मुद्रास्फीति की निर्णायक सफलता नहीं मानना चाहिए। जॉन वेलिस ने कहा कि पीसीई संशोधन केवल डेटा को साफ करेगा, मुद्रास्फीति की मूल कहानी को नहीं बदलेगा। उनका मानना है कि किसी भी नरम पीसीई प्रिंट को केवल एक सांख्यिकीय सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसका अर्थ डेटा में मौजूद गैर-जरूरी शोर का कम होना है, न कि बुनियादी मुद्रास्फीति का अचानक घट जाना। यह संशोधन केवल दोनों प्रमुख मुद्रास्फीति पैमानों के बीच के अंतर को कम करेगा और फेडरल रिजर्व के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों से जुड़े घटनाक्रमों का असर दुनिया भर के मुद्रा बाजारों पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD दो महीने के निचले स्तर पर आ गई और यह 0.6950 के आसपास कारोबार करती दिखी। ऑस्ट्रेलिया में अगस्त माह के अंतर्निहित सीपीआई आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावनाओं पर पानी फिर गया है। इसके अलावा चीन के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े पीएमआई आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दे पाए, जबकि अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव देखने को मिला था।
जापानी येन और डॉलर का रुख
दूसरी तरफ USD/JPY की जोड़ी में भी एशियाई सत्र के दौरान दबाव बना रहा और यह 157.00 के स्तर से नीचे फिसल गई। बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को समर्थन प्रदान किया है। इस मजबूत रुख ने जापान के कमजोर घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों के असर को काफी हद तक बेअसर कर दिया। साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस मुद्रा जोड़ी को नीचे धकेलने में अहम भूमिका निभाई।
सोने की कीमतों में सुस्ती और बॉन्ड यील्ड
यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत से पहले सर्राफा बाजार में सोने की चाल सीमित दायरे में बनी रही और यह 4,200 डॉलर के स्तर के नीचे ही संघर्ष करता नजर आया। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते डॉलर मंगलवार को छुए गए अपने दो महीने के उच्च स्तर से नीचे आ गया, जिसने पीली धातु को थोड़ी राहत जरूर दी। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की आशंकाओं ने सोने की तेजी पर रोक लगा रखी है। निवेशक किसी भी नई और आक्रामक दिशा में दांव लगाने से पहले आगामी अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
क्रिप्टो बाजार में आवे की स्थिति
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में आवे टोकन में मुनाफावसूली का दौर देखा गया। पिछले दिन दस प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त उछाल दर्ज करने के बाद बुधवार को आवे फिसलकर 161 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया। ब्लॉकचेन पर उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफा समेटने में लगे हैं। इस बीच आवे के संस्थापक स्टानी कुलेचोव आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत आवे टोकन बर्न तंत्र लागू करने पर विचार कर रहे हैं, जो भविष्य में इस क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य के लिए एक सकारात्मक उत्प्रेरक साबित हो सकता है।



















