अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में इस समय जबर्दस्त हलचल देखने को मिल रही है, जहां कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ रिफाइनिंग मार्जिन में आए भारी उछाल ने दुनिया भर के वित्तीय तंत्र पर दबाव बढ़ा दिया है। तीसरी तिमाही के दौरान ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से उछलकर सीधे 104 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस तेजी के पीछे भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की जटिलताएं मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जिससे वैश्विक कमोडिटी बाजारों में एक नया मोड़ आ गया है।
कच्चे तेल की कीमत में यह वृद्धि केवल बैरल तक सीमित नहीं है, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों के प्रसंस्करण लागत में भी अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। 3-2-1 क्रैक स्प्रेड, जो क्रूड को पेट्रोल और डीजल जैसे तैयार ईंधनों में बदलने के रिफाइनिंग मार्जिन को मापता है, 17 डॉलर से बढ़कर 62 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इन दोनों कारकों के मिलने से ऊर्जा बाजार पर वास्तविक प्रभावी दबाव 90 डॉलर से सीधे बढ़कर 166 डॉलर के स्तर पर जा पहुंचा है, जो ऊर्जा आपूर्ति में भारी तंगी को दर्शाता है।
बॉन्ड यील्ड और तेल कीमतों का दुर्लभ ऐतिहासिक तालमेल
ऊर्जा के बढ़ते दाम अब केवल ईंधन तक सीमित नहीं हैं बल्कि अमेरिकी कर्ज बाजार को भी सीधे प्रभावित कर रहे हैं। वर्तमान समय में कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बीच 1990 के बाद का सबसे गहरा और मजबूत तालमेल देखा जा रहा है। शीत युद्ध के अंतिम दौर जैसी यह ऐतिहासिक समानता यह स्पष्ट करती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर वित्तीय बाजारों के केंद्र में आ गए हैं, जहां तेल की कीमतों में तेजी सीधे ब्याज दरों और सरकारी बॉन्ड यील्ड को ऊपर खींच रही है।
मुद्रा बाजार पर भी इन मैक्रो परिस्थितियों का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार के दिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा और AUD/USD लुढ़ककर लगभग दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब आ गया। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिसने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावनाओं को ठंडा कर दिया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर की बढ़त पर अस्थायी ठहराव आने के बावजूद चीन के कमजोर पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई सहारा नहीं दिया।
जापानी येन को मिला सहारा और सोने का ठहराव
दूसरी तरफ एशियाई सत्र में USD/JPY जोड़ी 157.00 के स्तर से नीचे नुकसान दर्ज करती रही। घरेलू स्तर पर फैक्ट्री उत्पादन और खुदरा बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों के बावजूद बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को मजबूती प्रदान की। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिकी डॉलर में आई व्यापक नरमी ने भी इस मुद्रा जोड़ी को नीचे की ओर धकेलने में अहम भूमिका निभाई।
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले संकुचित दायरे में कारोबार करते दिखे और यह पीली धातु 4,200 डॉलर के स्तर के नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को मंगलवार के दो महीने के उच्च स्तर से नीचे खींचा, जिसने सोने को कुछ राहत और गति देने का काम किया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त ब्याज दर नीतियों की निरंतर आशंकाओं ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगा रखा है। निवेशक किसी भी नई और बड़ी दिशा तय करने से पहले अमेरिका के आगामी महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
क्रिप्टो बाजार में आवे टोकन का उतार-चढ़ाव
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी निवेशकों का सतर्क रुख साफ नजर आया। आवे (Aave) बुधवार को 161 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले इसमें 10 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त उछाल दर्ज की गई थी। ब्लॉकचेन पर उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिलता है कि हालिया तेजी के बाद ट्रेडर्स और निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की, जिसके चलते इस टोकन में बिकवाली का दबाव बना।
इस अल्पकालिक गिरावट के बीच आवे के संस्थापक स्टानि कुलेचोव आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत एक नए टोकन-बर्न तंत्र को लागू करने पर विचार कर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस बर्न व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाता है, तो आपूर्ति सीमित होने से भविष्य में AAVE टोकन के लिए यह एक सकारात्मक और बड़ा उत्प्रेरक साबित हो सकता है। फिलहाल वैश्विक बाजार ऊर्जा की महंगाई, केंद्रीय बैंकों के रुख और भू-राजनीतिक तनावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।



















