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कच्चे तेल के अतिरिक्त भंडार जारी करने से जापान का इनकार, डॉलर के मुकाबले 158 के स्तर पर संभला येनबाज़ार
5 अक्तू॰ 2026, 9:13 am (18 मिनट पहले)· 0

कच्चे तेल के अतिरिक्त भंडार जारी करने से जापान का इनकार, डॉलर के मुकाबले 158 के स्तर पर संभला येन

जापान के किहारा ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक तेल भंडार से अतिरिक्त कच्चा तेल जारी करने की कोई नई योजना नहीं है। इस बयान के बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूती से डॉलर-येन जोड़ी 158.00 के आसपास कारोबार कर रही है।

रणनीतिक तेल भंडार से अतिरिक्त कच्चा तेल जारी करने को लेकर जापान सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। जापान के किहारा ने बयान जारी कर साफ किया है कि आपातकालीन भंडार से और अधिक तेल जारी करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। इस आधिकारिक टिप्पणी के बाद जापानी येन (JPY) की विनिमय दर पर कोई तुरंत तेज प्रतिक्रिया नहीं देखी गई। मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर (USD) के मजबूत रुख के चलते USD/JPY जोड़ी में 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 158.00 के करीब पहुंच गई।

जापानी येन का बाजार ढांचा और इसके प्रमुख निर्धारक कारक

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन दुनिया की सबसे सक्रिय रूप से कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शुमार है। विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी मुद्रा का मूल्य मुख्य रूप से जापान की घरेलू अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसके अलावा, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की मौद्रिक नीतियां, जापान और अमेरिका के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर तथा वैश्विक वित्तीय बाजार में निवेशकों की जोखिम लेने की धारणा (रिस्क सेंटीमेंट) येन की चाल तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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बैंक ऑफ जापान के प्राथमिक दायित्वों में मुद्रा का स्थिरीकरण और नियंत्रण भी शामिल है, जिससे केंद्रीय बैंक के हर नीतिगत कदम पर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बारीक नजर रहती है। केंद्रीय बैंक ने कई मौकों पर मुद्रा बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप भी किया है। आम तौर पर बैंक ऑफ जापान ने मुद्रा के मूल्य को नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर येन में अत्यधिक मजबूती रोकने के लिए कदम उठाए हैं, हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की राजनीतिक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रत्यक्ष हस्तक्षेप अक्सर करने से बचा जाता है।

केंद्रीय बैंकों के नीतिगत अंतर और अल्ट्रा-लूज पॉलिसी की दिशा

वर्ष 2013 से लेकर 2024 के लंबे अंतराल के दौरान बैंक ऑफ जापान ने अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति (अल्ट्रा-लूज मॉनेटरी पॉलिसी) का कड़ाई से पालन किया। इस समयावधि में बैंक ऑफ जापान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बीच नीतिगत रुख में भारी अंतर (पॉलिसी डाइवर्जेंस) पैदा हो गया। अमेरिका और जापान के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर बढ़ता गया, जिसने जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को लगातार बढ़त दिलाई और येन में अपनी प्रतिस्पर्धी वैश्विक मुद्राओं की तुलना में भारी गिरावट आई।

साल 2024 में बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी लंबे समय से चली आ रही अल्ट्रा-लूज मॉनेटरी पॉलिसी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके साथ ही अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बॉन्ड यील्ड का फासला कम होने लगा है। इस नीतिगत बदलाव ने हाल के महीनों में जापानी येन को कुछ जरूरी तकनीकी सहारा और स्थिरता प्रदान की है।

सुरक्षित निवेश के रूप में येन और वैश्विक मुद्रा बाजार की हलचल

वित्तीय उथल-पुथल और भू-राजनीतिक संकट के दौर में जापानी येन को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की संपत्ति माना जाता है। वैश्विक बाजारों में तनाव या अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अपने पूंजी की सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए येन जैसी सुरक्षित मुद्राओं की ओर रुख करते हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में जोखिम वाली अन्य संपत्तियों की तुलना में येन के मजबूत होने की संभावना बढ़ जाती है।

सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र में USD/JPY ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए दोबारा 158.00 के स्तर को हासिल कर लिया, जो कि इसके एक सप्ताह पुराने ट्रेडिंग दायरे के भीतर बना हुआ है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर हुई हैं, फिर भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को मजबूती दे रही है। इसके बावजूद, बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख (हॉकिश अपेक्षाओं) और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के कारण डॉलर-येन में बहुत ज्यादा तेजी सीमित रहने की संभावना है।

कमोडिटी और अन्य प्रमुख करेंसी जोड़ों का हालिया रुझान

कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखी गई। सोमवार को एशियाई घंटों के दौरान WTI क्रूड का भाव गिरकर 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी उस समय आई जब G7 देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से बचने का संकल्प लिया और अपने आपातकालीन रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई।

अन्य बाजारों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) पर बिकवाली का नया दबाव देखा गया और सोमवार को एशियाई सत्र के अंत में यह गिरकर 0.6900 की तरफ आ गया। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर इस जोड़ी पर असर डाल रहे हैं। वहीं सोना पिछले हफ्ते के दायरे में बना हुआ है और सोमवार तड़के करीब 4,150 डॉलर प्रति औंस पर टिका रहा। दूसरी ओर, EUR/USD मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर 1.1312 पर फिसल गया है, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यह गिरावट यूरोप के ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक जोखिमों और सर्वव्यापी अमेरिकी डॉलर की मजबूती का मिलाजुला परिणाम है।

सवाल-जवाब

जापान के किहारा ने आपातकालीन तेल भंडार को लेकर क्या कहा है?
जापान के किहारा ने स्पष्ट किया है कि देश के रणनीतिक तेल भंडार से अतिरिक्त कच्चा तेल जारी करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
इस बयान के बाद डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) का क्या रुख रहा?
इस बयान के बाद जापानी येन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा और मजबूत अमेरिकी डॉलर के सहारे USD/JPY 0.1% बढ़कर 158.00 के करीब ट्रेड करने लगा।
G7 देशों ने तेल की कीमतों को लेकर क्या फैसला लिया है?
G7 देशों ने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई है और ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने का संकल्प लिया है।
कच्चे तेल (WTI) की मौजूदा कीमत क्या दर्ज की गई है?
लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव एशियाई सत्र में गिरकर 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
सोना और यूरो-डॉलर (EUR/USD) किन स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं?
सोने का भाव 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब स्थिर बना हुआ है, जबकि EUR/USD गिरकर 1.1312 के स्तर पर पहुंच गया है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
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