अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं की खरीदारी तेज होने से चांदी की कीमतें 61.00 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े के करीब पहुंच गई हैं। अमेरिकी श्रम बाजार के ताजा आंकड़ों में भारी कमजोरी दिखने के बाद केंद्रीय बैंक की अगली बैठक में नीतिगत दरें बढ़ने की आशंका काफी घट गई है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य टकराव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ झुकने को मजबूर किया है, जिसका सीधा फायदा बुलियन परिसंपत्तियों को मिल रहा है।
अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट से पलटा दरों का गणित
श्रम बाजार से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों की प्राथमिकताओं को बड़े पैमाने पर बदला है। सितंबर के दौरान गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) में महज 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो वॉल स्ट्रीट के 90,000 नियुक्तियों के अनुमान की तुलना में बेहद निराशाजनक साबित हुआ। इससे ठीक पहले अगस्त के संशोधित आंकड़ों में 133,000 पद दर्ज किए गए थे, जिसके मुकाबले सितंबर का यह आंकड़ा भारी गिरावट को दर्शाता है।
इसी अवधि में बेरोजगारी की दर मामूली बढ़त के साथ 4.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि श्रम शक्ति भागीदारी दर थोड़ा संभलकर 61.8 प्रतिशत पर पहुंची। इस सुस्त प्रदर्शन के चलते बाजार प्रतिभागियों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की नीतिगत समीक्षा में दरों को यथावत रखेगा। मौजूदा समय में दरें स्थिर रहने की संभावना 77.9 प्रतिशत आंकी जा रही है। बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति होने के कारण ब्याज दरें स्थिर रहने या घटने की उम्मीद चांदी के लिए हमेशा अनुकूल माहौल तैयार करती है।
पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और बाब अल-मंदेब संकट
भू-राजनीतिक मोर्चे पर बिगड़ते हालात ने कीमती धातुओं में तेजी को और सहारा दिया है। यमन में सऊदी समर्थित बलों ने हुती लड़ाकों से क्षेत्र वापस छीनने के उद्देश्य से बड़ा सैन्य अभियान छेड़ा है। तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान समर्थक समूह ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया।
लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से बेहद संवेदनशील रणनीतिक गलियारा है। क्षेत्रीय कच्चे तेल के निर्यात के लिए यह रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर निकलने का प्रमुख विकल्प माना जाता है। इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट पर व्यवधान पैदा होने की आशंका से वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग में तेजी आई है।
मूल्य संचय और मुद्रास्फीति से बचाव का पारंपरिक साधन
निवेश जगत में चांदी का इतिहास हमेशा से संपत्ति संरक्षण और विनिमय के माध्यम के रूप में मजबूत रहा है। यद्यपि लोकप्रिय धारणा में सोने को अधिक तवज्जो दी जाती है, लेकिन कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और उच्च महंगाई के दौर में सुरक्षा पाने के लिए चांदी को चुनते हैं।
बाजार में भागीदार भौतिक रूप से सिक्के या सिल्लियां खरीदकर इसमें उतर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक वित्तीय प्रणाली में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) जैसे उपकरण भी मौजूद हैं, जो वैश्विक एक्सचेंजों पर इसकी घटती-बढ़ती कीमतों के आधार पर निवेशकों को कारोबार करने का अवसर देते हैं।
मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले प्रमुख वित्तीय कारक
चांदी की चाल कई आर्थिक पहलुओं पर निर्भर करती है। गंभीर आर्थिक मंदी की आशंका अथवा वैश्विक अस्थिरता के दौरान इसकी सेफ-हेवन छवि चमकती है, भले ही इस मामले में सोने का प्रभाव अधिक माना जाता हो। चूंकि यह धातु स्वयं कोई लाभांश या ब्याज नहीं देती, इसलिए कम ब्याज दरों के माहौल में इसकी आकर्षण क्षमता स्वतः बढ़ जाती है।
अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) का उतार-चढ़ाव भी इसकी चाल तय करता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसका मूल्य डॉलर में आंका जाता है। मजबूत डॉलर आमतौर पर कीमतों को दबाकर रखता है, जबकि डॉलर के कमजोर पड़ने पर तेजी की जमीन तैयार होती है। इसके अलावा नई खदानों से होने वाली आपूर्ति, वैश्विक पुनर्चक्रण दरें और खुदरा निवेश मांग भी इसके बाजार को लगातार दिशा देते हैं।
औद्योगिक उपयोगिता और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका
चांदी केवल निवेश परिसंपत्ति नहीं है, बल्कि आधुनिक विनिर्माण में इसकी भारी मांग रहती है। तांबे और सोने की तुलना में भी अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग होता है। औद्योगिक खपत में उछाल कीमतों को ऊपर खींचता है, जबकि मंदी के संकेत इसे नीचे लाते हैं।
इस मामले में अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक सेहत अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिका और चीन के विशाल कारखाने विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में धातु का उपभोग करते हैं। वहीं भारत के संदर्भ में आभूषण निर्माण और घरेलू सांस्कृतिक मांग अंतरराष्ट्रीय मूल्य निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाती है।
सोने के साथ तालमेल और गोल्ड-सिल्वर अनुपात
ऐतिहासिक रूप से चांदी की चाल सोने के पदचिह्नों पर चलती रही है। सुरक्षित निवेश का समान दर्जा होने से जब सोना चढ़ता है, तो अमूमन यह धातु भी पीछे-पीछे चलती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्य को समझने के लिए विशेषज्ञ गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का सहारा लेते हैं।
यह अनुपात दर्शाता है कि सोने के एक औंस का मूल्य चुकाने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। यदि यह अनुपात सामान्य से बहुत ऊंचा हो जाए, तो इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि चांदी अभी सस्ती है अथवा सोना जरूरत से ज्यादा महंगा हो चुका है। इसके विपरीत अनुपात में गिरावट सोने के अपेक्षाकृत सस्ता होने का संकेत देती है।
मुद्रा बाजारों और अन्य जिंसों का ताजा परिदृश्य
वैश्विक वित्तीय मंच पर अन्य परिसंपत्तियों में भी तेज हलचल दर्ज की गई है। एशियाई कारोबारी समय में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव दिखा और एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6900 के स्तर की ओर फिसला। पश्चिम एशिया तथा रूस-यूक्रेन के तनाव के बीच डॉलर की मजबूती इस जोड़ी पर भारी पड़ी है, जहां निगाहें तेल की कीमतों, ट्रेजरी यील्ड और आरबीए के संकेतों पर टिकी हैं।
दूसरी तरफ यूएसडी/जेपीवाई ने अपनी शुरुआती गिरावट मिटाते हुए 158.00 का आंकड़ा पुनः छू लिया। दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर होने के बावजूद डॉलर को मिले भू-राजनीतिक समर्थन से जोड़ी संभली, हालांकि बीओजे की सख्त नीतियों और सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने इसकी बढ़त को सीमित रखा है।
सोने की बात करें तो यह 4,150 डॉलर के करीब अपने सुधार को बनाए हुए है, हालांकि 17 महीने के उच्च स्तर पर मंडराते डॉलर और गिरती यील्ड के बीच इसका अल्पकालिक तकनीकी रुझान दबाव में दिखता है। ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड लगातार दूसरे दिन फिसलकर एशियाई सत्र में 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास देखा गया। जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद निर्यात पाबंदियों से बचने के वादे से तेल नरम पड़ा है। वहीं यूरो/यूएसडी लुढ़ककर 1.1312 पर आ गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे फिसल चुका है।

















