अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जोखिम से बचने की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच न्यूजीलैंड डॉलर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कीवी मुद्रा नुकसान की भरपाई करने में विफल रही और 0.5600 के स्तर से नीचे खिसक गई है। मुद्रा की यह चाल इसे 0.5580 के 17 महीने के निचले स्तर के बेहद करीब ले आई है। कारोबारी सत्र की कमजोर शुरुआत के बाद अमेरिकी डॉलर में तेज सुधार देखा गया, जबकि निवेशक अमेरिकी उपभोक्ता धारणा के सुस्त आंकड़ों के बाद अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें न्यूजीलैंड के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य संघर्ष और तेल बाजार में अस्थिरता
वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में मध्य पूर्व के ताजा भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। सऊदी अरब के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए। यह हमला यमन की राजधानी सना में हूती नियंत्रण वाले हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। दोनों पक्षों के बीच लगातार तेज होते इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा पैदा कर दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर आशंकाएं गहरी हो गई हैं।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने समझौते के लिए तेहरान की अधिकांश शर्तों को स्वीकार कर लिया था, लेकिन वाशिंगटन की अंतिम प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही। इसके अतिरिक्त, ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात पर होर्मुज जलडमरूमध्य में अवैध तेल तस्करी नेटवर्क संचालित करने का सीधा आरोप लगाया है। इन घटनाक्रमों के बीच एशियाई कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिसलकर 100.65 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक पहुंची थीं, लेकिन यूरोपीय सुबह के सत्र में मजबूत मांग और आपूर्ति की चिंताओं के चलते भाव वापस 102.70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए।
न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति का प्रभाव
घरेलू मोर्चे पर रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की गवर्नर एना ब्रेमन गुरुवार को अपना संबोधन देने वाली हैं। इसके तत्काल बाद सितंबर महीने के बिजनेस परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स आंकड़े भी जारी किए जाने हैं। इन दोनों आयोजनों से न्यूजीलैंड की आर्थिक सेहत और मौद्रिक नीति की भावी दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है। वित्तीय बाजार इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति और विकास के बीच किस प्रकार का संतुलन बनाता है।
न्यूजीलैंड डॉलर, जिसे बाजार में आमतौर पर कीवी कहा जाता है, वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में शामिल है। इसका मूल्य मुख्य रूप से घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीतियों पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशिष्ट कारक भी कीवी के उतार-चढ़ाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके चलते चीनी अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का सीधा असर न्यूजीलैंड डॉलर पर पड़ता है। चीन में आर्थिक सुस्ती का अर्थ न्यूजीलैंड से होने वाले निर्यात में गिरावट होता है, जो अंततः मुद्रा को कमजोर करता है। डेयरी उत्पाद न्यूजीलैंड के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में डेयरी उत्पादों की ऊंची कीमतें देश की निर्यात आय और मुद्रा दोनों को सहारा देती हैं।
रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का लक्ष्य रखता है, जिसमें उसका प्राथमिक ध्यान 2 प्रतिशत के मध्य-बिंदु पर होता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक आधिकारिक ब्याज दरों का निर्धारण करता है। जब महंगाई दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो बैंक अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। इस कदम से बॉन्ड प्रतिफल बढ़ता है और विदेशी निवेशकों के लिए देश में निवेश करना अधिक आकर्षक हो जाता है, जिससे कीवी मजबूत होती है। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती मुद्रा को कमजोर बनाती है। न्यूजीलैंड और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों के बीच का अंतर भी इस मुद्रा जोड़ी के उतार-चढ़ाव को तय करने वाला एक बड़ा आधार है।
व्यापक मैक्रो आंकड़े और वैश्विक जोखिम भावना
न्यूजीलैंड के व्यापक आर्थिक आंकड़े देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को मापने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। मजबूत आर्थिक विकास, निम्न बेरोजगारी दर और उच्च कारोबारी विश्वास मुद्रा के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं। मजबूत आर्थिक स्थिति विदेशी पूंजी को आकर्षित करती है और महंगाई अधिक होने की स्थिति में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जमीन तैयार करती है। दूसरी ओर, कमजोर आर्थिक आंकड़े मुद्रा के मूल्यह्रास का कारण बनते हैं।
सामान्य तौर पर जब निवेशक वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर आश्वस्त होते हैं और जोखिम लेने की क्षमता अधिक होती है, तब कमोडिटी मुद्राओं के रूप में पहचाने जाने वाले न्यूजीलैंड डॉलर की मांग बढ़ती है। ऐसी स्थितियों में कच्चे माल और संबंधित परिसंपत्तियों का परिदृश्य सकारात्मक हो जाता है। इसके विपरीत, जब बाजार में उथल-पुथल, मंदी का अंदेशा या भू-राजनीतिक तनाव गहराता है, तो निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पूंजी निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिसके चलते न्यूजीलैंड डॉलर पर भारी बिकवाली का दबाव बन जाता है।
अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों का हाल
अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा जोड़ियों में भी सीमित दायरे और दबाव का रुख देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी ने सोमवार को शुरुआती गिरावट को भरपाई के जरिए संतुलित किया, लेकिन छुट्टियों के कारण पतली तरलता के बीच यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तर से आई गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने बढ़त बनाने का प्रयास किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा का दायरा सीमित रहा। इसके साथ ही, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी किए जाने की घटती संभावनाओं ने भी इस मुद्रा पर दबाव बनाए रखा।
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी नए कारोबारी सप्ताह में भी एक सीमित दायरे में बनी रही और 158.00 के स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखी। बाजार प्रतिभागी इस बात को लेकर सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी गिरते येन को सहारा देने के लिए बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर सकते हैं। कमजोर अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ने डॉलर की बढ़त को सीमित किया है, लेकिन जापान और अमेरिका में छुट्टियों के कारण कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच सुरक्षित निवेश की मांग ने डॉलर को मजबूती दी है।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में एक सप्ताह के उच्च स्तर से गिरावट आई और शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान यह 4,170 डॉलर प्रति औंस के आसपास दैनिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के सख्त रुख के संकेतों के बाद अमेरिकी डॉलर में नए खरीदार सक्रिय हुए, जिसने बिना ब्याज वाली धातु की मांग को प्रभावित किया।
क्रिप्टोकरेंसी और उभरते बाजारों की बात करें तो पाई नेटवर्क पर बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखा और यह 0.0800 डॉलर के स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रहा था। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चाओं के बावजूद सट्टेबाजी की मांग कमजोर हुई है और ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे गिर गया है, जो निवेशकों में घबराहट का संकेत देता है। वहीं, घरेलू मोर्चे पर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत शुरुआत के बाद 95.80 के करीब संभलने में कामयाब रहा। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अमेरिकी डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों ने भारतीय मुद्रा को राहत प्रदान की है।



















