अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल हो रहा है। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार फिलहाल अमेरिका की आर्थिक वृद्धि, लक्ष्य से ऊपर बनी हुई महंगाई दर और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में मौजूदा स्तरों से 75 आधार अंकों की अतिरिक्त वृद्धि की संभावनाओं पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है। कोलंबस डे के सार्वजनिक अवकाश की वजह से अमेरिकी बॉन्ड बाजार बंद रहने से कारोबारी सत्र में नकदी का प्रवाह अपेक्षाकृत सीमित देखा गया, लेकिन डॉलर की अंतर्निहित दिशा मजबूत बनी हुई है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती और प्रमुख तकनीकी स्तर
मुद्रा सूचकांक यानी डीएक्सवाई का 102 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर टिके रहना एक मजबूत तकनीकी संकेत माना जा रहा है। बाजार के मौजूदा ढांचे को देखते हुए इस हफ्ते डॉलर इंडेक्स में 102.85 तक की बढ़त की संभावना जताई जा रही है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से थोड़ा पीछे हटी, तब भी डॉलर ने तुरंत उबरने का प्रयास किया। अमेरिका और जापान में छुट्टियों की वजह से ट्रेडिंग वॉल्यूम भले ही कम रहा हो, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के तौर पर ग्रीनबैक को मजबूती प्रदान की है।
ऑस्ट्रेलियन डॉलर और जापानी येन का रुख
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी एयूडी/यूएसडी ने मामूली गिरावट के अंतर को पाटने की कोशिश की, लेकिन सीमित लिक्विडिटी के कारण यह 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर महीने में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की रिकवरी पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई का कारोबार एक सीमित दायरे में बना हुआ है। यह मुद्रा जोड़ी 158.00 के स्तर से ऊपर ट्रेड कर रही है। जापानी मुद्रा येन को सहारा देने के लिए वहां के अधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की अटकलें तेज हैं, जिसकी वजह से खरीदार सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने डॉलर की बढ़त को कुछ हद तक सीमित रखा, जिससे यह जोड़ी एक दायरे में बंधी नजर आई।
सोने की कीमतों में गिरावट और बुलियन बाजार
अमेरिकी डॉलर में आई नई तेजी का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतें अपने एक हफ्ते के उच्च स्तर से फिसल गईं और लगभग 4,170 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लेकर आक्रामक नजरिए के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग कमजोर पड़ी है। डॉलर में आई हल्की गिरावट पर दोबारा खरीदार सक्रिय हो गए, जिससे सर्राफा बाजार पर दबाव बढ़ गया।
क्रिप्टो बाजार में बिकवाली और ईटीएफ आउटफ्लो
डिजिटल एसेट बाजार में भी बिकवाली का दबाव साफ तौर पर दिखाई दिया। पिछले हफ्ते 3.1 प्रतिशत के करेक्शन के बाद बिटकॉइन सोमवार को 83,600 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। अमेरिकी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध स्पॉट ईटीएफ से पिछले हफ्ते 681.10 मिलियन डॉलर की भारी निकासी दर्ज की गई। इस निकासी ने पिछले तीन हफ्तों से लगातार जारी इनफ्लो के सिलसिले को तोड़ दिया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार से मिल रहे मिले-जुले संकेतों ने क्रिप्टो निवेशकों को भी सतर्क रहने पर मजबूर किया है।
कच्चा तेल और वैश्विक शेयर बाजारों की चाल
मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और बॉन्ड यील्ड को लेकर चिंताओं के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें सुबह के सत्र में अपेक्षाकृत स्थिर रहीं। जोखिम उठाने की धारणा में सुधार के संकेत मिलने से अमेरिकी और यूरोपीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की स्थिति में दिखाई दिए। इक्विटी बाजारों ने भू-राजनीतिक संकट को नजरअंदाज करते हुए सकारात्मक रुख अपनाने का प्रयास किया, जिससे समग्र वित्तीय बाजारों में मिला-जुला माहौल देखने को मिला।



















