अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जोखिम से बचने की धारणा और वैश्विक तनावों के गहराने से न्यूजीलैंड डॉलर में तेज कमजोरी दर्ज की गई है। सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान न्यूजीलैंड डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (NZD/USD) की विनिमय दर 0.70 प्रतिशत टूटकर 0.5582 के आसपास पहुंच गई। लगातार छह हफ्तों की साप्ताहिक गिरावट झेलने के बाद यह मुद्रा जोड़ी अब नवंबर 2025 के निचले स्तर 0.5580 के बेहद करीब संघर्ष कर रही है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय 0.5580 से 0.5470 का दायरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि साल 2020 के बाद से इसी मूल्य क्षेत्र से कई बार मजबूत तकनीकी सुधार देखने को मिले हैं।
भू-राजनीतिक संकट और सुरक्षित संपत्तियों की बढ़ती मांग
वैश्विक स्तर पर कई मोर्चों पर बढ़े भू-राजनीतिक टकराव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित समझी जाने वाली संपत्तियों में पूंजी का प्रवाह तेज हो गया है। यमन में प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने के मकसद से नए सैन्य अभियानों की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से मध्य पूर्व में तनाव काफी गहरा गया है।
दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। इस बयान ने तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं भड़का दी हैं। इसके साथ ही, यूक्रेन पर रूस के नए हमलों ने भी अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अशांति फैलती है, निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से हाथ खींचकर अमेरिकी डॉलर की शरण लेते हैं, जिसका सीधा नुकसान न्यूजीलैंड डॉलर जैसी मुद्राओं को उठाना पड़ता है।
वैश्विक बॉन्ड बाजार का संकट और कीवी मुद्रा की संवेदनशीलता
न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा, जिसे बाजार में आमतौर पर कीवी कहा जाता है, वैश्विक आर्थिक धारणा और जोखिम उठाने की क्षमता में होने वाले बदलावों के प्रति पारंपरिक रूप से काफी संवेदनशील रही है। कच्चे तेल और ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में लगातार महंगाई बने रहने और सार्वजनिक वित्तीय स्थिति के बिगड़ने की आशंकाओं को जन्म दिया है।
दुनिया भर के सॉवरेन बॉन्ड बाजारों में मची उथल-पुथल ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। हालांकि न्यूजीलैंड में ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की उम्मीदें बाजार में मौजूद हैं, लेकिन अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती के आगे ये स्थानीय कारक न्यूजीलैंड डॉलर को कोई ठोस सहारा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। वैश्विक निवेशक स्थानीय उपज के बजाय डॉलर की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अमेरिकी सेवा क्षेत्र के आंकड़ों पर टिकी बाजार की निगाहें
मुद्रा कारोबारी अब अमेरिका से जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सोमवार को अमेरिकी इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़े जारी होने वाले हैं। बाजार के आम सहमति अनुमान के अनुसार, यह सूचकांक अगस्त के 55.4 से घटकर सितंबर में 55 पर आ सकता है।
इसके अलावा, एसएंडपी ग्लोबल सर्विसेज पीएमआई के अंतिम आंकड़ों पर भी गहरी नजर रखी जा रही है। इसका प्रारंभिक अनुमान 58.7 दर्ज किया गया था, जो पिछले पांच से अधिक वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है। यदि अमेरिकी सेवा क्षेत्र की गतिविधि उम्मीद से ज्यादा मजबूत बनी रहती है, तो यह डॉलर की रैली को और तेज कर सकती है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव और बढ़ जाएगा।
तकनीकी विश्लेषण: प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तर
दैनिक मूल्य चार्ट पर NZD/USD 0.5583 के आसपास दबाव में कारोबार कर रहा है। तकनीकी संरचना को देखें तो यह जोड़ी अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 0.5806 और 200-दिवसीय SMA 0.5846 से काफी नीचे बनी हुई है, जो अल्पावधि में इसके मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। वर्तमान में यह जोड़ी 0.5580 के एक मामूली क्षैतिज समर्थन स्तर को चुनौती दे रही है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) वर्तमान में लगभग 24 के स्तर पर चल रहा है, जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार आरएसआई 21 के करीब है और 52-हफ्तों का दायरा 0.5584 से 0.6093 बना हुआ है। हालांकि ओवरसोल्ड परिस्थितियां गिरावट की रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा जरूर कर सकती हैं, लेकिन यह व्यापक मंदी के रुख को तुरंत पलटने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही हैं।
ऊपर की ओर, रिकवरी की स्थिति में पहला प्रतिरोध 0.5626 पर देखा जा रहा है। इसके बाद कड़े अवरोध 0.5649 और 0.5686 पर स्थित हैं। यदि खरीदारी मजबूत होती है, तो अगला महत्वपूर्ण अवरोध 0.5735 होगा, जिसके बाद 100-दिवसीय SMA 0.5806 और 200-दिवसीय SMA 0.5846 के मजबूत तकनीकी स्तर सामने आएंगे। इसके विपरीत, यदि 0.5580 का समर्थन स्तर टूटता है, तो अगला मंदी का लक्ष्य 0.5540 होगा, जहां खरीदार ओवरसोल्ड गिरावट के बाद मुद्रा जोड़ी को संभालने की कोशिश कर सकते हैं।
अन्य वैश्विक बाजारों और संपत्तियों की स्थिति
अमेरिकी डॉलर के बढ़ते प्रभाव का असर केवल न्यूजीलैंड डॉलर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के अन्य प्रमुख परिसंपत्ति वर्गों में भी इसकी स्पष्ट हलचल देखी जा रही है।
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): सोमवार को देर से एशियाई कारोबार में नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह फिसलकर 0.6900 की ओर आ गया। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कमजोर किया है। बाजार की नजरें तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के रुख पर टिकी हैं।
- जापानी येन (USD/JPY): एशियाई सत्र में डॉलर के मुकाबले येन अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए 158.00 के स्तर पर वापस आ गया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को मजबूती दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम से डॉलर की तेजी सीमित रह सकती है।
- सोना: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने ने सोमवार को कुछ नुकसान की भरपाई की, लेकिन यह अपने पुराने दायरे में ही फंसा रहा। पीली धातु के लिए बढ़त के प्रयास $4,200 के नीचे सीमित रहे, जबकि दो महीने का निचला स्तर $4,110 इससे ज्यादा दूर नहीं है। डॉलर इंडेक्स में कुछ नरमी ने कीमती धातुओं को मामूली राहत दी है, लेकिन ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड डॉलर में बड़ी गिरावट को रोके हुए है।
- क्रिप्टोकरेंसी: डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन सीमित दायरे में कंसोलिडेट करते हुए $86,000 के ऊपर बना हुआ है। इसके उलट एल्टकॉइन बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला, जहां एथेरियम बढ़कर $2,700 के पार निकल गया और रिपल $1.52 के ऊपर स्थिर रहा।
- यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की दुविधा: यूरोप में महंगाई अपने आधिकारिक लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही है। सामान्य परिस्थितियों में ईसीबी इसका जवाब ब्याज दरें बढ़ाकर देता, लेकिन मौजूदा हालात बेहद जटिल हैं। बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक रूप से मौद्रिक सख्ती कर चुका है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के सामने एक कठिन असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
















