अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गुरुवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला, जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी और कमजोर अमेरिकी डॉलर ने बुलियन को सहारा दिया। फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं द्वारा सख्त मौद्रिक रुख जारी रखने के संकेतों के बावजूद सर्राफा बाजार ने अपनी स्थिति संभाली है। सत्र के दौरान XAU/USD 4,103 डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़कने के बाद संभलकर 4,130 डॉलर पर कारोबार करता दिखा, जो करीब 0.48 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। इसके अलावा ताजा लाइव बाजार आंकड़ों में सोने की कीमत 4,158 डॉलर पर दर्ज की गई, जो पिछले बंद भाव 4,141 डॉलर के मुकाबले 0.43 प्रतिशत की तेजी है। मौजूदा दौर में वित्तीय और भू-राजनीतिक कारक एक साथ कीमती धातु की चाल तय कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव
पश्चिम एशिया के ताजा तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुए धमाकों के कारण तेल बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखी गई। अमेरिकी कच्चे तेल का मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 90.85 डॉलर पर पहुंच गया। सत्र के शुरुआती घंटों में यह बढ़त 4 प्रतिशत से भी अधिक थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद तेजी की रफ्तार कुछ धीमी हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। इसके बावजूद जारी राजनयिक बातचीत में अविश्वास साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व ट्रंप की बातों को पूरी तरह स्वीकार करने से कतरा रहा है। ईरानी नेतृत्व किसी तीसरे आकस्मिक हमले से बचने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे इस अहम समुद्री व्यापार मार्ग पर अनिश्चितता बनी हुई है। ऊर्जा की ऊंची लागत के चलते वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड कई साल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव लगातार गहरा रहा है।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें
मौद्रिक मोर्चे पर फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने सख्त बयानबाजी तो की है, लेकिन अक्टूबर महीने के नीतिगत कदमों को लेकर कोई स्पष्ट फॉरवर्ड गाइडेंस नहीं दिया। सेंट लुइस फेड के अध्यक्ष अल्बर्टो मुसालेम ने कहा कि मुद्रास्फीति अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और श्रम बाजार की मजबूती यह साफ संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक को महंगाई पर लगाम कसने के प्रयासों पर लगातार केंद्रित रहना होगा।
ब्याज दरों को लेकर वित्तीय बाजारों में मजबूत अनुमान लगाए जा रहे हैं। डेरिवेटिव और बॉन्ड बाजारों के रुझानों से पता चलता है कि निवेशक दिसंबर में फेड द्वारा 25 आधार अंकों (bps) की दर वृद्धि की 81 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। आगामी दिनों में सोने के कारोबारियों को भू-राजनीतिक मोर्चे की ताजा घटनाओं के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर पैनी नजर रखनी होगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अक्टूबर के लिए मिशिगन विश्वविद्यालय का उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर अमेरिकी परिवारों के दृष्टिकोण का स्पष्ट आकलन मिलेगा।
सोने का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर
कीमतों के चार्ट और तकनीकी संकेतकों को देखें तो बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) अभी भी मंदी के दायरे में बना हुआ है, जो कीमतों में और गिरावट के जोखिम की तरफ इशारा करता है। लाइव तकनीकी आंकड़ों में 14-दिवसीय RSI 37 पर स्थित है, जबकि MACD -69.76 पर दर्ज किया गया है जो इसके सिग्नल स्तर -56.41 की तुलना में -13.35 के नकारात्मक हिस्टोग्राम के साथ मंदी का संकेत देता है। इसके अलावा 50-दिवसीय और 200-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज में डेथ क्रॉस बना हुआ है, जिसमें EMA50 4,319 डॉलर और EMA200 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज (SMA) 4,375 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,549 डॉलर पर स्थित है, जबकि संपत्ति का 52-सप्ताह का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है।
कारोबारियों के लिए तात्कालिक समर्थन स्तर 4,100 डॉलर पर है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और यह स्तर टूटता है, तो अगला पड़ाव 4,000 डॉलर होगा। इसके नीचे 29 जुलाई का निचला स्तर 3,996 डॉलर और फिर चालू वर्ष का सबसे निचला स्तर (YTD लो) 3,941 डॉलर परीक्षण के दायरे में आ सकता है। वहीं दूसरी ओर यदि सोने की कीमत 4,200 डॉलर के स्तर को पार करती है, तो यह 100-दिवसीय और 50-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज (SMA) के संगम की ओर बढ़ सकती है, जो क्रमशः 4,263 डॉलर और 4,332 डॉलर पर स्थित हैं। इन बाधाओं को पार करने के बाद धातु के सामने 4,500 डॉलर और फिर 200-दिवसीय SMA 4,529 डॉलर का स्तर होगा। लाइव स्तरों में पिवट पॉइंट 4,152 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस 4,177 डॉलर, दूसरा रेजिस्टेंस 4,195 डॉलर, और पहला सपोर्ट 4,134 डॉलर व दूसरा सपोर्ट 4,110 डॉलर है। 14-दिवसीय औसत ट्रू रेंज (ATR) 89.80 पर है।
सुरक्षित निवेश और मूल्य संचय के रूप में सोने का महत्व
मानव इतिहास में सोने ने सदैव मूल्य संचय के सुरक्षित माध्यम और विनिमय के साधन के रूप में अग्रणी भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसके पारंपरिक उपयोग और चमक के अलावा, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में इसे संकट के समय सबसे विश्वसनीय सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। किसी भी संप्रभु सरकार या केंद्रीय संस्था द्वारा जारी न किए जाने के कारण यह मुद्रा अवमूल्यन और बेकाबू मुद्रास्फीति के खिलाफ एक मजबूत ढाल प्रदान करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक संकट और मुद्रा अस्थिरता के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार किसी देश की वित्तीय साख और शोधन क्षमता के प्रति वैश्विक भरोसा बढ़ाते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड स्तर पर अपने भंडारों में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा, जो रिकॉर्ड इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद है। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक निरंतर अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर और वैश्विक वित्तीय संपत्तियों से संबंध
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध रहता है। जब डॉलर की कीमत घटती है, तब सोना मजबूत होता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए यह अधिक आकर्षक बन जाता है। इसी तरह यह जोखिम वाली वित्तीय संपत्तियों के विपरीत दिशा में चलता है। शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी आने पर सोने की मांग में कमी आती है, जबकि इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दौर शुरू होने पर निवेशक कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं। ब्याज दरों में कमी आने पर सोने की चमक बढ़ती है क्योंकि यह ब्याज न देने वाली संपत्ति है, जबकि पूंजी की बढ़ती लागत सोने की कीमतों पर दबाव डालती है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजारों में भी मिश्रित रुझान देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) बुधवार की गिरावट को बढ़ाते हुए 0.6900 के निचले दायरे में फिसल गया और बाद में थोड़ा संभलकर शुक्रवार को एशियाई बाजार खुलने से पहले 0.6950 की ओर बढ़ने का प्रयास करता दिखा। दूसरी तरफ जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) गुरुवार के एशियाई सत्र में लाल निशान में लौटकर 158.00 के नीचे आ गया, क्योंकि बाजार में यह अटकलें तेज थीं कि जापानी अधिकारी मुद्रा को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही डॉलर 18 महीने के उच्च स्तर से मुनाफावसूली का शिकार हुआ, जिससे सोने को मजबूती बनाए रखने में अतिरिक्त मदद मिली।






















