भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की अगस्त 2026 मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनीट्स से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि देश में ब्याज दरों में कटौती का दौर अब समाप्त हो चुका है। वित्तीय संस्थान सोसाइटी जेनेरली के वरिष्ठ विश्लेषक कुणाल कुंडू के अनुसार, एमपीसी मिनीट्स में महंगाई को लेकर अधिक सख्त रुख दिखाई दिया है, जो 5 अगस्त को जारी मुख्य नीतिगत बयान की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक है। इस स्थिति को देखते हुए सोसाइटी जेनेरली ने अनुमान जताया है कि रिज़र्व बैंक दिसंबर 2026 की बैठक में नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट (बीपीएस) की पहली बढ़ोतरी कर सकता है।
महंगाई का सख्त आकलन और ब्याज दर बढ़ोतरी का खाका
सोसाइटी जेनेरली का मानना है कि अगस्त की एमपीसी बैठक को दर कटौती की गुंजाइश बनाए रखने वाले ठहराव के बजाय एक सख्त ठहराव माना जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मिनीट्स में उल्लेख किया कि आगे दरों में और कटौती की गुंजाइश "नहीं दिखती है" और चालू वर्ष के दौरान ही ब्याज दरों में वृद्धि की स्थिति बन सकती है। संस्थान के अनुसार, दिसंबर 2026 में 25 बीपीएस की शुरुआती दर वृद्धि के बाद 2027 की पहली या दूसरी तिमाही में 25 बीपीएस की एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके बाद यह सीमित दर वृद्धि चक्र पूरा हो जाएगा।
अमेरिकी ट्रेजरी के तरलता कदम से वैश्विक बाजारों में हलचल
वैश्विक वित्तीय मोर्चे पर, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को 12:32 जीएमटी पर अपने निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करते हुए बड़ा ऐलान किया। अमेरिकी वित्त विभाग ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड के लिए अपनी तरलता सहायता बायबैक नीलामी के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नया ढांचा 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा।
मुद्रा बाजार और सोने की कीमतों पर वैश्विक प्रभाव
अमेरिकी बॉन्ड बायबैक योजना की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी हलचल देखी गई। गुरुवार को यूरोपीय सत्र के दौरान जीबीपी/यूएसडी जोड़ी 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार करती नजर आई, जो 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आई। वहीं ईयूआर/यूएसडी जोड़ी मई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद 1.1700 के नीचे सुदृढ़ीकरण के चरण में रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त बैठक मिनीट्स के कारण अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट थमी, जिसके बाद सोने की कीमतों में आंशिक मुनाफावसूली दर्ज की गई। सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से थोड़ा नीचे आ गया, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने इसमें बड़ी गिरावट को रोका।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार और प्रमुख ऑल्टकॉइन की स्थिति
अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक निर्णय से व्यापक क्रिप्टो बाजार को भी समर्थन मिला। प्रमुख ऑल्टकॉइन रिपल (एक्सआरपी), सोलाना (एसओएल) और कार्डानो (एडीए) में गुरुवार को स्थिरता देखी गई। एक्सआरपी पिछले दिन 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने के बाद 1.0951 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। तकनीकी संकेतकों के अनुसार एक्सआरपी और सोलाना में आगे और बढ़त की संभावना बनी हुई है, जबकि कार्डानो के हालिया लाभ में गिरावट का जोखिम बना हुआ है।



















