वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अचानक एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से इतर जाकर एक अनशेड्यूल्ड घोषणा की। बुधवार को 12:32 GMT पर जारी इस बयान में ट्रेजरी ने स्पष्ट किया कि वह 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड क्षेत्रों में अपनी लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन्स के आकार को कम से कम दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम $2 बिलियन की सीमा को बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन किया जाएगा। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। वित्तीय बाज़ारों ने सरकार के इस कदम का खुलकर स्वागत किया है, जिससे लंबी अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई है और निवेशक जोखिम वाले एसेट्स की तरफ आकर्षित हुए हैं।
बॉन्ड यील्ड में गिरावट और ट्रेजरी की नई रणनीति
आईएनजी के विश्लेषक पैड्रिक गार्वे के अनुसार, ट्रेजरी की यह अचानक आई घोषणा इस बात का संकेत है कि अमेरिकी वित्त विभाग बॉन्ड बाज़ार के लंबे छोर पर हाल ही में हुई भारी बिकवाली को लेकर काफी चिंतित था। हालांकि बॉन्ड बाज़ार में अधिक टिकाऊ और लंबी अवधि की रिकवरी के लिए राजकोषीय समेकन जैसे संरचनात्मक समाधान की आवश्यकता है, लेकिन ट्रेजरी द्वारा लंबे छोर की यील्ड पर सतर्कता बरतने की खबर का बाज़ार में तुरंत सकारात्मक असर पड़ा है। लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड में 10bp की गिरावट दर्ज की गई, जिसने शेयर बाज़ारों को सहारा दिया और अमेरिकी डॉलर को कमज़ोर किया। इस स्थिति को बाज़ार में 'बेसेन्ट पुट' के रूप में देखा जा रहा है, जिससे इस गर्मी के मौसम में रिस्क एसेट्स पर मंडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया है। इसके चलते कैरी ट्रेड रणनीतियों के आगे भी लोकप्रिय बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
डॉलर इंडेक्स में टूट और विदेशी मुद्रा बाज़ार का हाल
ट्रेजरी के इस कदम के बीच जुलाई FOMC बैठक के मिनट्स भी जारी किए गए, जो उम्मीद से कम आक्रामक या हॉकिश रहे। इसके जारी होने के बाद छोटी अवधि की अमेरिकी यील्ड में 5bp की गिरावट देखी गई। इस संपूर्ण परिदृश्य ने अमेरिकी डॉलर को एक सपाट और नीचे की ओर रुझान वाले पैटर्न में ला खड़ा किया है, जो 'रिस्क-ऑन, डॉलर-ऑफ' निवेश माहौल के अनुकूल है। इस तरह के बाजारी माहौल में उभरते बाज़ारों की मुद्राएं यानी EMFX आमतौर पर बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। डॉलर इंडेक्स DXY कल अप्रत्याशित रूप से अपने 99.40 से 100.00 के ट्रेडिंग रेंज से नीचे टूट गया और अब इसके खिसककर 98.65 के स्तर तक आने की संभावना है। यदि सक्रिय ट्रेजरी नीति के दम पर रिस्क एसेट्स में और तेज़ी आती है, तो अगला पड़ाव 98.00 का स्तर हो सकता है।
मुद्रा बाज़ार में डॉलर की कमजोरी का लाभ हाई-बीटा करेंसी जैसे नॉर्वेजियन क्रोन, न्यूजीलैंड डॉलर और स्वीडिश क्रोना को सबसे ज़्यादा मिला है। प्रमुख मुद्राओं में GBP/USD यूरोपीय सत्र में गुरुवार को 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा, जिसने 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से आई हालिया गिरावट को रोके रखा है। ट्रेडर्स अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व की खबरों पर नज़र बनाए हुए हैं। वहीं EUR/USD गुरुवार को यूरोपीय ट्रेडिंग में मई के उत्तरार्ध के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद 1.1700 के ठीक नीचे बुलिश कंसोलिडेशन चरण में प्रवेश कर गया। यूरो में नए दांव लगाने से पहले निवेशक 1.1700 के पार की गति का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ईरान से जुड़े जोखिमों के बीच यूएस जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़े आने बाकी हैं।
सोने की कीमतें और क्रिप्टोकरेंसी में रिकवरी का रुख
कीमती धातुओं के बाज़ार में सोना एशियाई सत्र के दौरान मामूली इंट्राडे नुकसान के साथ $4,500 के स्तर से नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, यह गुरुवार तड़के दर्ज किए गए जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के काफी करीब बना हुआ है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, FOMC मिनट्स के बाद पिछले दिन तीन महीने के निचले स्तर पर फिसले अमेरिकी डॉलर में हल्का ठहराव आया है। इसी कारण गोल्ड बुल्स ने आंशिक प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे सोने पर दबाव बना, लेकिन गिरती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने इसमें बड़ी गिरावट को रोक दिया।
उधर क्रिप्टो बाज़ार में भी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक की खबर से सुधार का रुझान दिखा। रिपल, सोलाना और कार्डानो जैसे शीर्ष ऑल्टकॉइन्स गुरुवार को अपनी हालिया बढ़त को बनाए रखने में सफल रहे। पिछले दिन 10% का उछाल दर्ज करने के बाद रिपल XRP लगभग $1.0951 के आसपास कारोबार कर रहा है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार XRP और SOL में और बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है, जबकि ADA के अपनी हालिया बढ़त को खोने का जोखिम बना हुआ है।



















