अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा सरकारी बॉन्ड की बायबैक प्रक्रिया का दायरा अचानक बढ़ाए जाने के बाद डॉलर इंडेक्स (DXY) गिरकर मई के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। सरकार की ओर से लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में जारी तेजी को रोकने के लिए उठाए गए इस कदम से वित्तीय बाजारों में नया मोड़ आ गया है। ओसीबीसी के बाजार रणनीतिकारों सिम मोह सियोन्ग और क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड प्रतिफल पर एक तरह की ऊपरी सीमा तय किए जाने के कारण निकट भविष्य में डॉलर पर लगातार दबाव बना रह सकता है। निवेशक अब फेडरल रिजर्व के अगले कदमों और आगामी हफ्तों के आर्थिक आंकड़ों पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं।
ट्रेजरी का बड़ा फैसला और बॉन्ड बायबैक का नया शेड्यूल
अमेरिकी वित्त विभाग ने अपने तय कैलेंडर से अलग हटकर बाजार में तरलता बढ़ाने का बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर जारी एक घोषणा में ट्रेजरी ने स्पष्ट किया कि वह 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड्स के बायबैक का आकार कम से कम दोगुना करेगी। पहले प्रति ऑपरेशन अधिकतम $2 बिलियन मूल्य के बॉन्ड खरीदे जाने की योजना थी, जिसे अब बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह पुनर्वित्त तिमाही 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक लागू रहेगी। इस अचानक लिए गए फैसले से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिकी सरकार लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी से असहज महसूस कर रही थी और वह इसे सीमित दायरे में रखने के लिए सीधे बाजार में हस्तक्षेप कर रही है।
डॉलर में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभूतियों का समीकरण
बॉन्ड यील्ड पर प्रभावी सीमा लगने से अमेरिकी कर्ज की अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अपील बनाए रखने का सीधा असर डॉलर के कमजोर होने के रूप में सामने आ रहा है। जब सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज सीमित होता है, तो विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए मुद्रा का अवमूल्यन एक स्वाभाविक वित्तीय व्यवस्था बन जाता है। हालांकि, बाजार में ऐसे कई बुनियादी कारक अब भी मौजूद हैं जो बॉन्ड यील्ड को ऊपर की ओर धकेल रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी विशाल बुनियादी ढांचा फंडिंग जरूरतें, लगातार बढ़ता अमेरिकी राजकोषीय घाटा और जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की बढ़ती यील्ड शामिल हैं। इन तमाम दबावों के बीच डॉलर के टूटने से बाजार में मुद्रा अवमूल्यन की चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं।
सुरक्षित निवेश के विकल्प: सोना और स्विस फ्रैंक मजबूत
अमेरिकी डॉलर में आई चौतरफा कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा फायदा सोने और स्विस फ्रैंक (CHF) को मिला है। सोना गुरुवार को एशियाई और यूरोपीय कारोबारी सत्रों के दौरान $4,500 प्रति औंस के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता नजर आया। इससे पहले गुरुवार सुबह सोने की कीमतें जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थीं। हालांकि, हालिया तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की है, जिससे मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन गिरती बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतों को मजबूत सहारा मिल रहा है। ठीक इसी तरह, स्विस फ्रैंक भी बिना किसी ब्याज वाले सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तर्ज पर मजबूती हासिल कर रहा है।
फेडरल रिजर्व की नीति और जैक्सन होल बैठक पर नजरें
बॉन्ड बायबैक के बाद अब सभी की निगाहें फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर टिक गई हैं। हाल ही में जारी जुलाई की एफओएमसी (FOMC) बैठक के मिनट्स से पता चला है कि नीति निर्माता ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों में दरों को तुरंत बढ़ाना जरूरी नहीं माना गया था। जुलाई बैठक के बाद जारी हुए आर्थिक आंकड़ों ने भी नीति में तुरंत सख्ती करने की तात्कालिकता को काफी हद तक कम कर दिया है। बाजार में अब अगली बड़ी घटना का इंतजार है, जब फेड चेयरमैन वॉर्श अगले हफ्ते जैक्सन होल सम्मेलन में अपना संबोधन देंगे। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी बेरोजगार दावों के ताजा आंकड़े और मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी मुद्रा बाजार की भावी दिशा तय करेंगी।
विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति: यूरो और पाउंड का रुख
डॉलर की कमजोरी के बीच प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में मिली-जुली मजबूती देखने को मिल रही है। यूरो (EUR/USD) यूरोपीय कारोबारी सत्र में 1.1700 के स्तर के ठीक नीचे अपनी बढ़त को समेकित करता दिखा। मई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद यूरो खरीदार अब 1.1700 का आंकड़ा पार करने के बाद ही नए सौदे बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। दूसरी ओर, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। पाउंड 11 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा पीछे हटने के बाद स्थिर बना हुआ है। ट्रेजरी के बायबैक कदम का असर साफ होने के बाद फॉरेक्स ट्रेडर्स अब अमेरिका से आने वाले नए मैक्रो आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में रिकवरी: रिपल और सोलाना में उछाल
अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम का सकारात्मक असर डिजिटल एसेट मार्केट यानी क्रिप्टो बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दिया है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में तरलता बढ़ने की खबर के साथ ही प्रमुख ऑल्टकॉइन्स में अच्छी तेजी दर्ज की गई। रिपल (XRP) ने पिछले सत्र में 10% की बड़ी छलांग लगाने के बाद खुद को $1.0951 के आसपास मजबूत कर रखा है और इसका तकनीकी परिदृश्य आगे भी बढ़त का संकेत दे रहा है। सोलाना (SOL) भी मजबूती के साथ ऊपरी स्तरों पर टिका हुआ है। हालांकि, कार्डानो (ADA) में हालिया बढ़त के बाद तकनीकी स्तर पर सतर्क रहने की जरूरत जताई जा रही है। कुल मिलाकर क्रिप्टो बाजार को डॉलर की कमजोरी से नई ताकत मिली है।



















