अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो की तेजी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। हालिया कारोबारी सत्रों में लगातार मजबूती दिखाने के बाद यूरो अब एक निश्चित दायरे में कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है। प्रमुख विश्लेषकों के अनुसार, मुद्रा जोड़ी में बना ऊपर की तरफ का रुझान कमजोर पड़ा है, जिसके कारण यह अल्पकालिक समेकन यानी रेंज-बाउंड चरण में प्रवेश कर चुकी है। इसके साथ ही वैश्विक निवेशकों का ध्यान केंद्रीय बैंकों के आगामी मौद्रिक फैसलों, कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव और फेडरल रिजर्व के रुख पर केंद्रित हो गया है।
यूरो का तकनीकी विश्लेषण और कारोबारी दायरा
यूरो (EUR/USD) के दैनिक मूल्य व्यवहार का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बीते सत्र के दौरान यह 1.1636 के निचले स्तर तक चला गया था। हालांकि, बाद में निचले स्तरों से सुधार दर्ज करते हुए यह 1.1651 के स्तर पर लगभग सपाट होकर बंद हुआ, जो कि महज +0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त को दर्शाता है। इस गिरावट के बावजूद बाजार में किसी बड़े नकारात्मक दबाव के संकेत नहीं मिले हैं। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यूरो 1.1650 के आसपास कारोबार करता हुआ देखा गया, जिसे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त मौद्रिक नीति वाले नजरिए से सहारा मिल रहा है।
तकनीकी विश्लेषकों का आकलन है कि दैनिक आधार पर यूरो 1.1630 से 1.1665 के सीमित दायरे के बीच ही घूमता रहेगा। पिछले हफ्ते के शुरुआती दिनों में यूरो को लेकर सकारात्मक रुख देखने को मिला था, जब 20 अगस्त को 1.1675 के स्तर पर कारोबार के दौरान 1.1725 तक जाने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, 1.1640 के मजबूत समर्थन स्तर के नीचे टूटने के बाद तेजी का रफ्तार कमजोर पड़ गया है। आने वाले एक से तीन हफ्तों के परिदृश्य को देखें तो अब यूरो के 1.1600 से 1.1685 के बीच स्थिर रहने का अनुमान जताया जा रहा है।
ब्रिटिश पाउंड पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों का असर
दूसरी ओर, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़कर एशियाई कारोबारी घंटों में 1.3600 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त दर्ज करने में सफल रहा। इसके बावजूद पाउंड के सामने आने वाले दिनों में चुनौतियां बनी रह सकती हैं। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट है, जिसने तत्काल मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
मुद्रास्फीति का दबाव घटने के कारण मनी मार्केट में ब्याज दरों के अनुमानों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में अगली बढ़ोतरी की जो उम्मीदें पहले 2026 के उत्तरार्ध के लिए लगाई जा रही थीं, वे अब आगे खिसककर 2027 की शुरुआत में चली गई हैं। क्रूड ऑयल में नरमी से केंद्रीय बैंक को नीतिगत ढील देने या दरों को यथावत रखने का अधिक समय मिल गया है, जिसका सीधा प्रभाव पाउंड की विनिमय दर पर देखा जा रहा है।
जैक्सन होल सम्मेलन और फेडरल रिजर्व का रुख
वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजरें अब 27 अगस्त से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित जैक्सन होल सम्मेलन पर टिकी हुई हैं। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय 'फाइनेंशियल इनोवेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर पेमेंट्स एंड पॉलिसी' रखा गया है। इस आर्थिक सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉश शुक्रवार को अपना पहला मुख्य भाषण देने जा रहे हैं।
बाजार प्रतिभागियों की अपेक्षाएं केवल इस बात तक सीमित नहीं हैं कि सितंबर की आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी या स्थिर रखी जाएंगी, बल्कि निवेशक केविन वॉश के भाषण से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भावी दिशा और मौद्रिक नीति के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के संकेत तलाश रहे हैं। फेडरल रिजर्व का यह रुख आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक मुद्रा बाजारों की चाल को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



















