अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक रणनीतियों और भू-राजनीतिक गतिविधियों के चलते व्यापक फेरबदल देखने को मिल रहा है। पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए बाजार को पूरी तरह चौंका दिया। कारोबारी वर्ग पहले से ही दर वृद्धि का अनुमान लगाकर अपनी स्थिति बना चुका था, लेकिन केंद्रीय बैंक के इस अप्रत्याशित रुख के बाद अब सभी की निगाहें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी नीतिगत निर्णय पर टिक गई हैं।
न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और महंगाई का दबाव
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड ने अपनी हालिया नीतिगत बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि दिसंबर तिमाही में वार्षिक महंगाई दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस मुद्रास्फीति वृद्धि का मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में आया उछाल है। इसके बावजूद, केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें नहीं बढ़ाईं क्योंकि घरेलू स्तर पर मांग अभी भी काफी कमजोर बनी हुई है। देश के आंतरिक आर्थिक तंत्र में मांग की कमी के चलते नीति नियंताओं ने सख्ती बरतने के बजाय सतर्क रुख अपनाना अधिक सुरक्षित समझा।
न्यूजीलैंड की आर्थिक चाल हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया से काफी अलग रही है। न्यूजीलैंड 2024 के अंत में ही मंदी के दौर से बाहर निकला था और उसके बाद पिछले साल उसका प्रदर्शन असंतुलित रहा। हालांकि 2026 की पहली तिमाही में कुछ मजबूत आर्थिक सुधार और सकारात्मक संकेत उभरे थे, लेकिन ईरान युद्ध के कारण उपजी वैश्विक चुनौतियों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ईंधन की लागत और भू-राजनीतिक तनाव ने न्यूजीलैंड के आर्थिक परिदृश्य को जटिल बना दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन में उठापटक
मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में एशियाई सत्र की शुरुआती गिरावट के बाद सोमवार को सुधार दर्ज किया गया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर उपजी नई आशा ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। इस कूटनीतिक प्रगति ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया, जिससे जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सीधा सहारा मिला। इसके बावजूद, हाजिर कीमतें पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे बनी हुई हैं, क्योंकि कारोबारी रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अहम फैसले से पहले कोई बड़ा नया दांव लगाने से बच रहे हैं।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में नए सप्ताह की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद यह जोड़ी गिरकर 157.00 के निचले दायरे में आ गई थी, लेकिन सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान इसमें जोरदार वापसी हुई और हाजिर भाव 158.00 के करीब पहुंच गया। जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद येन की कमजोरी पर कोई खास लगाम नहीं लग सकी और डॉलर बढ़त बनाए रखने में सफल रहा।
सोने की चाल और कच्चे तेल का असर
अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोमवार को सोने में सकारात्मक रुझान देखा गया। इससे पहले शुक्रवार को बहुमूल्य पीली धातु फिसलकर 3,870 डॉलर के नए वार्षिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी और पूरे अक्टूबर महीने में इसमें 6.87 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई थी। वाशिंगटन और तेहरान के बीच राजनयिक प्रयासों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने सोने की कीमतों को कुछ राहत प्रदान की है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में आई यह हालिया रिकवरी बहुत मजबूत नहीं है, क्योंकि बुनियादी आर्थिक परिस्थितियां टिकाऊ सुधार को लेकर लगातार संदेह पैदा कर रही हैं।
क्रिप्टो बाजार में डॉजकॉइन की कमजोरी
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में डॉजकॉइन सोमवार को 0.075 डॉलर के आसपास संघर्ष करता नजर आया। सितंबर के अंत से लेकर अब तक यह लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज कर चुका है। सेंटिमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े टोकन धारकों की गतिविधियों में गहरा विभाजन दिख रहा है। बड़े व्हेल निवेशक अपनी होल्डिंग्स घटा रहे हैं, जबकि छोटी व्हेल श्रेणियों वाले वॉलेट्स टोकन जमा करने में जुटे हैं। इसके साथ ही, ऑन-चेन संकेतकों की कमजोरी और बिगड़ते तकनीकी परिदृश्य से यह संकेत मिलता है कि डॉजकॉइन आने वाले दिनों में और अधिक नुकसान के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है।
अमेरिकी विकास दर और नैस्डैक का प्रदर्शन
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई है। इसके बावजूद, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट देखी गई और नैस्डैक ने अक्टूबर महीने का समापन मार्च 2025 के बाद के अपने सबसे खराब मासिक प्रदर्शन के साथ किया। वित्तीय बाजारों में अब सिर्फ विकास को गति देने के नाम पर किए जा रहे पूंजीगत व्यय को पुरस्कृत करने का दौर समाप्त हो रहा है। निवेशक अब कंपनियों के भारी खर्च को इस कसौटी पर कस रहे हैं कि क्या यह पूंजीगत निवेश वास्तविक नकदी प्रवाह उत्पन्न करने और पूंजी लागत से अधिक रिटर्न देने में सक्षम है या नहीं।


















