स्वीडन में 13 सितंबर को संपन्न हुए आम चुनाव के बाद राजनीतिक परिदृश्य बेहद कड़ा और अनिश्चित बना हुआ है, जहां विपक्षी मध्य-वामपंथी गठबंधन और सत्ताधारी दक्षिणपंथी गुट के बीच प्रारंभिक मतगणना में बहुत ही मामूली अंतर देखा जा रहा है। चुनाव के नतीजों की तस्वीर इतनी उलझी हुई है कि अंतिम स्पष्टता आने में समय लग सकता है। शुरुआती गणना में विपक्षी मध्य-वाम मोर्चा मामूली बढ़त बनाए हुए है, परंतु दोनों मुख्य राजनीतिक खेमों के बीच अंतर इतना कम है कि किसी भी पक्ष की स्पष्ट जीत तय नहीं मानी जा सकती। चुनावी प्रक्रिया के तहत जो अग्रिम मतदान मतपत्र समय पर मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए थे, उनकी गिनती बुधवार, 16 सितंबर को की जानी है और यह प्रक्रिया गुरुवार, 17 सितंबर तक भी खिंच सकती है। इसके अलावा देश का कानूनी तौर पर अंतिम और प्रमाणित परिणाम प्रत्येक काउंटी स्तर पर होने वाली विस्तृत समीक्षा के बाद ही घोषित होता है, जिसमें आमतौर पर मतदान के दिन से लगभग एक सप्ताह का समय लगता है।
लंबी गठबंधन वार्ताओं का इतिहास और वर्तमान समीकरण
नतीजों के बेहद नजदीकी होने के कारण नई सरकार के गठन के लिए गठबंधन वार्ताओं का दौर कई हफ्तों तक चलने की पूरी संभावना है। स्वीडन की राजनीति में त्रिशंकु जनादेश के बाद बातचीत का लंबा खिंचना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 11 सितंबर 2022 को हुए आम चुनाव के बाद भी तत्कालीन सरकार में शामिल चार दलों को शासन योजना तैयार करने और टीदो समझौते तक पहुंचने में एक महीने से अधिक का समय लगा था, जिसके बाद 14 अक्टूबर 2022 को शासन का प्रारूप तय हुआ था। वहीं अगर 2018 के आम चुनाव की बात करें, तो उस समय राजनीतिक गतिरोध के कारण सरकार बनाने में 134 दिनों का लंबा समय लग गया था। मौजूदा परिस्थितियों में भी किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के चलते विभिन्न दलों के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम और सत्ता साझेदारी को लेकर खींचतान देखने को मिल सकती है।
राजकोषीय ढांचा और सरकारी कर्ज की स्थिति
राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद वित्तीय बाजारों में सरकारी ऋण या स्थिरता को लेकर बड़ी घबराहट की संभावना कम आंकी जा रही है। स्वीडन का सरकारी कर्ज तुलनात्मक रूप से निचले स्तर पर है और देश का सख्त राजकोषीय ढांचा किसी भी सरकार को अनियंत्रित उधारी से रोकता है। ऐसे में चाहे मध्य-वामपंथी गुट सत्ता संभाले या दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार बनाए, वित्तीय अनुशासन बिगड़ने का जोखिम सीमित माना जा रहा है। राजकोषीय नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से आगे का उधारी और ऋण लक्ष्य पूरे व्यापार चक्र के दौरान सरकारी बजट संतुलन हासिल करने का है। इससे पहले 2026 का बजट विस्तारवादी रखा गया था, जिसमें कई अस्थायी कर रियायतें दी गई थीं। ये तमाम अस्थायी कर कटौतियां 2026 और 2027 के दौरान समाप्त होने वाली हैं, जिसके बाद राजकोषीय संतुलन बहाल करने पर जोर रहेगा।
मध्य-वाम सरकार की प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य, शिक्षा और नए कर
यदि मध्य-वामपंथी मोर्चा सत्ता में वापसी करता है, तो नीतिगत प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसा प्रशासन स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे अहम सामाजिक क्षेत्रों पर सरकारी खर्च में इजाफा कर सकता है, क्योंकि ये दोनों मुद्दे आम मतदाताओं के लिए सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। इन खर्चों की भरपाई के लिए करों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाया जा सकता है। सोशल डेमोक्रेट्स ने बैंकों की शुद्ध ब्याज आय पर एक विशेष कर लगाने का प्रस्ताव रखा है। सोशल डेमोक्रेट राजनेता मिकेल डैम्बर्ग के अनुसार इस कर का मकसद बैंकों के लिए अपने ब्याज मार्जिन को कम रखने का प्रोत्साहन तैयार करना है। इसके साथ ही पार्टी नेता मैग्डेलेना एंडरसन ने स्पष्ट किया है कि प्रति माह 70,000 SEK से अधिक कमाने वाले उच्च आय वर्ग के लोगों को ऊंची आयकर दरों का सामना करना पड़ सकता है।
वैश्विक मुद्रा, कमोडिटी और डिजिटल परिसंपत्तियों का रुख
स्वीडन के राजनीतिक घटनाक्रम के समानांतर वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी बड़े बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7140 के स्तर के आसपास डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर तक फिसल गई, हालांकि इसमें लगातार गिरावट का दबाव सीमित रहा और हाजिर भाव 0.7100 के मध्य स्तर से ठीक ऊपर लगभग 0.25% की दैनिक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में सप्ताह की शुरुआत में लिवाली देखी गई, जिससे भाव चढ़कर 154.00 के करीब पहुंच गया और पिछले शुक्रवार के नुकसान की कुछ भरपाई हुई। इसके बावजूद पिछले सप्ताह के दायरे में ही कारोबार सीमित रहा और मंगलवार को बने करीब सात महीने के निचले स्तर के नजदीक बना रहा, क्योंकि ट्रेडर केंद्रीय बैंकों के अहम फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते सोना सोमवार को फिसलकर $4,300 के स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बुधवार को घोषित किए जाने वाले मौद्रिक नीति निर्णय से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने डॉलर की मांग को मजबूत किया है। पीपीआई और सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद ब्याज दर वृद्धि के दांव तेजी से बढ़े हैं, जहां नया डॉट प्लॉट डॉलर की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्याज दरों को कम रखने के दबाव के बीच वार्श की स्वतंत्रता की भी कड़ी परीक्षा हो रही है, और डॉलर की मजबूती जारी रहने के लिए केंद्रीय बैंक का आक्रामक रुख जरूरी माना जा रहा है। वहीं डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन बढ़त के साथ सोमवार को $77,884 के करीब पहुंच गया, जिसने पूरे क्रिप्टो बाजार को सहारा दिया। इस सकारात्मक रुख के साथ इथेरियम $2,521 और रिपल $1.38 के अहम समर्थन स्तरों को थामे रखने में कामयाब रहे।



















