अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक रुख के साथ हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना है, जिससे ब्रिटिश पाउंड को मजबूती मिली। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान पाउंड डॉलर के मुकाबले 1.3200 के मध्य स्तर के करीब कारोबार करता दिखा और इसमें लगातार तीसरे दिन खरीदारों की सक्रियता दर्ज की गई। हालांकि, पिछले लगभग तीन हफ्तों के दायरे को देखें तो यह मुद्रा जोड़ी अब भी एक सीमित दायरे में फंसी हुई है, जहां निवेशक आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के बयानों का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी और डॉलर का रुख
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले यील्ड यानी प्रतिफल में आई हालिया नरमी ने डॉलर इंडेक्स की बढ़त की रफ्तार को धीमा कर दिया है। बहु-वर्षीय उच्च स्तरों से बॉन्ड यील्ड में आए इस पुलबैक ने अन्य वैश्विक मुद्राओं, विशेष रूप से स्टर्लिंग को थोड़ी राहत दी है। तकनीकी रूप से डॉलर के कमजोर पड़ने के बावजूद, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात ऐसे हैं जो अमेरिकी मुद्रा में बड़ी गिरावट को सीमित कर रहे हैं। सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर डॉलर की मांग अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के समय हमेशा बनी रहती है, और मौजूदा हालात भी कुछ इसी तरह के संकेत दे रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट और भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते गतिरोध ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रखा है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर वाशिंगटन की प्रतिक्रिया को ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने नाकाफी करार दिया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। मध्य पूर्व में तनाव के इस नए दौर ने निवेशकों को पूरी तरह जोखिम लेने से रोका हुआ है, जिससे डॉलर को निचले स्तरों पर ठोस समर्थन हासिल हो रहा है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर पाउंड की स्थिति
चार घंटे के चार्ट पर तकनीकी विश्लेषण इंगित करता है कि पाउंड और डॉलर की जोड़ी 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA की गतिशील बाधा के नीचे बनी हुई है। अगस्त के स्विंग हाई से शुरू हुई गिरावट की पृष्ठभूमि में पिछले तीन हफ्तों का यह सीमित दायरा मंदी के दौर का ठहराव माना जा रहा है। जब तक हाजिर भाव इस तकनीकी अवरोध से नीचे रहेंगे, तब तक विक्रेता हावी रहेंगे और किसी भी तेजी पर बिकवाली का दबाव देखा जा सकता है।
यह तकनीकी प्रतिरोध 1.3260 के करीब स्थित है, जिसके ठीक ऊपर ट्रेडिंग रेंज की ऊपरी सीमा 1.3300 के आसपास मौजूद है। मंदी के दबाव को कम करने और आगे की बढ़त के रास्ते खोलने के लिए 1.3300 के पार निरंतर मजबूती की दरकार होगी। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में बिकवाल 1.3180 के नीचे निर्णायक कमजोरी का इंतजार कर सकते हैं। इसके टूटने पर अगस्त के मासिक स्विंग हाई 1.3675 से शुरू हुई गिरावट का अगला चरण गहरा सकता है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक पाउंड का 14-दिवसीय RSI 41 पर बना हुआ है, जबकि 20-दिवसीय और 50-दिवसीय EMA क्रमशः 1.33 और 1.34 पर हैं।
इस हफ्ते के अहम आर्थिक आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के रुख
बाजार सहभागियों की नजरें इस सप्ताह आने वाले कुछ बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों पर टिकी हैं। ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जो ब्रिटिश अर्थव्यवस्था की वर्तमान सेहत की स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे। वहीं, अमेरिका की तरफ से महंगाई के ताजा आंकड़े सामने आएंगे, जो फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
इसके साथ ही बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली और फेडरल रिजर्व के केविन वॉर्श के संबोधन भी इसी सप्ताह निर्धारित हैं। दोनों केंद्रीय बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के वक्तव्यों से यह समझने में मदद मिलेगी कि आने वाले महीनों में मौद्रिक सख्ती या ढील का रास्ता कैसा रहेगा। अगर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने रहते हैं, तो फेडरल रिजर्व का सख्त रुख डॉलर को अतिरिक्त सहारा दे सकता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार में स्टर्लिंग की अहमियत
पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा है, जिसकी शुरुआत 886 ईस्वी में हुई थी, और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यह चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली इकाई है, जिसकी हिस्सेदारी सभी वैश्विक लेनदेन में 12 प्रतिशत है और यह औसतन 630 अरब डॉलर का दैनिक कारोबार संभालती है।
इसके प्रमुख कारोबारी जोड़ों में पाउंड और डॉलर का संयोजन शामिल है, जिसे मुद्रा कारोबार की दुनिया में 'केबल' कहा जाता है और यह कुल विदेशी मुद्रा बाजार के 11 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त पाउंड और जापानी येन का युग्म, जिसे ट्रेडर अक्सर 'ड्रैगन' कहते हैं, 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि यूरो और पाउंड का अनुपात 2 प्रतिशत के बराबर है। पाउंड स्टर्लिंग को जारी करने और उसकी स्थिरता बनाए रखने का कार्य बैंक ऑफ इंग्लैंड करता है।
मौद्रिक नीति और आर्थिक संकेतकों का असर
पाउंड के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। बैंक अपने निर्णय मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य पर आधारित करता है, जिसका मानक लगभग 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर बनाए रखना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केंद्रीय बैंक का प्रमुख साधन ब्याज दरों का समायोजन होता है।
जब मुद्रास्फीति बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में वृद्धि करके इसे नियंत्रित करने का प्रयास करता है। इससे लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। सामान्य तौर पर यह कदम पाउंड के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को अपना धन ब्रिटेन में लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई अत्यधिक गिर जाती है, तो यह आर्थिक विकास में सुस्ती का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती पर विचार करता है ताकि ऋण सस्ता हो और कंपनियां विकास कार्यों में निवेश बढ़ाएं।
इसके अलावा GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI तथा रोजगार आंकड़े भी पाउंड की दिशा तय करते हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के साथ ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनाती है, जिससे पाउंड मजबूत होता है। वहीं व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस भी अहम है, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है। यदि किसी देश के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा मुद्रा की मांग बढ़ने से उसका ट्रेड बैलेंस सकारात्मक होता है और मुद्रा को मजबूती मिलती है।
अन्य मुद्राओं और सोने का रुख
व्यापक वित्तीय बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने सोमवार को शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर के पास कारोबार किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन तो मिला, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में दरें बढ़ाने की घटती संभावनाओं ने इसकी बढ़त को सीमित कर दिया।
उधर डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.00 के आसपास एक सीमित दायरे में बनी रही। निवेशकों को आशंका है कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में तरलता काफी कम रही। बहुमूल्य धातुओं के मोर्चे पर, सोने ने सोमवार को 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार निकलकर एक हफ्ते से अधिक का उच्च स्तर छू लिया। बॉन्ड यील्ड में नरमी ने पीली धातु को सहारा दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण डॉलर को मिलने वाला समर्थन गैर-यील्ड वाली संपत्तियों की तेजी को नियंत्रित रख सकता है।





















