पारंपरिक हुनर और कड़े परिश्रम के दम पर महिलाएं अब आर्थिक स्वावलंबन की नई मिसाल कायम कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के कपसेठी गांव की निवासी ज्ञान देवी ने अपने पुश्तैनी कौशल को आजीविका का सशक्त जरिया बना दिया है। कालीन बुनाई की कला को संवारकर उन्होंने न केवल अपनी आमदनी का मजबूत रास्ता निकाला है, बल्कि कालीन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरकर अपनी अनूठी कारीगरी का परिचय भी दिया है। इस हुनर के जरिए वे हर दिन 500 से 600 रुपये अर्जित कर रही हैं और क्षेत्र की अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं।
पिता की विरासत से सीखी बुनाई की बारीकियां
ज्ञान देवी का संबंध एक ऐसे परिवार से रहा है जहां बचपन से ही कालीन उद्योग की चहल-पहल देखी जाती थी। उनके घर में कालीन का बड़ा कारोबार था, जिसमें उनके पिता के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी बुनाई के काम में जुटे रहते थे। बचपन के इसी माहौल ने ज्ञान देवी के भीतर भी ताने-बाने को समझने और बुनाई सीखने की गहरी ललक पैदा की। पिता ने उन्हें इस पारंपरिक शिल्प के तमाम हुनर, बारीकियां और डिजाइन तैयार करने की कला सिखाई। शादी के बाद भी उन्होंने अपने इस हुनर को थमने नहीं दिया और वैवाहिक जिम्मेदारियों के बीच भी बुनाई का काम निरंतर जारी रखा।
गुजरात में प्रधानमंत्री से मुलाकात और नई प्रेरणा
ज्ञान देवी को गुजरात में एक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रत्यक्ष रूप से मिलने का मौका मिला था। इस मुलाकात और मिले प्रोत्साहन ने उनके भीतर कुछ विशिष्ट कर दिखाने का आत्मविश्वास जगाया। उसी प्रेरणा का परिणाम रहा कि उन्होंने धागों के सहारे कालीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हूबहू चित्र उकेर डाला। इस अनूठी कलाकृति ने उनकी कारीगरी को अलग पहचान दिलाई और उनके काम को नई ऊर्जा प्रदान की।
घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल
घर-गृहस्थी के रोजमर्रा के कामकाज को संभालते हुए ज्ञान देवी नियमित रूप से कालीन की बुनाई करती हैं। इस काम से वे प्रतिदिन 500 से 600 रुपये की कमाई कर लेती हैं, जिसके चलते उनकी मासिक आमदनी 15 से 16 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। सरकार की ओर से महिलाओं के सशक्तीकरण और उन्हें अलग-अलग व्यवसायों से जोड़कर लाभान्वित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ज्ञान देवी को भी प्रशासनिक स्तर पर प्रोत्साहन मिला है, लेकिन उनका साफ मानना है कि स्वावलंबी बनने की असली ताकत अपने खुद के प्रयासों में छिपी है, न कि केवल सरकारी मदद के भरोसे बैठे रहने में।





















