अमेरिकी शेयर बाजार ने बीते सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में शानदार तेजी दिखाते हुए मजबूत साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। प्रमुख सूचकांक डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 दोनों ही लगभग 1 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी हासिल करने में सफल रहे, जबकि तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक कंपोजिट में भी 0.5 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखने को मिला। शेयर बाजार में इस सकारात्मक रुख की सबसे बड़ी वजह आगामी कॉर्पोरेट आय सत्र को लेकर निवेशकों का भरोसा है, जिसमें आगामी सप्ताह वॉल स्ट्रीट के दिग्गज बैंकों के वित्तीय परिणाम आने वाले हैं। हालांकि, इसके समानांतर 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में जारी उछाल, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक आने वाले दिनों में बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
शुक्रवार के सत्र में प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों का प्रदर्शन
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 9 अक्टूबर को अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांक डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज यानी डीजेआईए 423.31 अंक या 0.83 प्रतिशत की छलांग लगाकर 51,654.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 सूचकांक में 0.6 प्रतिशत यानी 46.18 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और यह 7,811.54 के स्तर पर समाप्त हुआ। प्रौद्योगिकी कंपनियों के सूचकांक नैस्डैक कंपोजिट ने 0.64 प्रतिशत या 172.83 अंकों की बढ़त बनाई और 27,366.17 के स्तर पर कारोबार पूरा किया। यदि पूरे सप्ताह के समग्र प्रदर्शन की गणना करें तो डाउ जोन्स में 456 अंक या 0.90 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि एसएंडपी 500 ने 81 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ सूचकांकों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसी दौरान पूरे सप्ताह में नैस्डैक ने 140.24 अंक या 0.52 प्रतिशत का फायदा दर्ज किया।
दिग्गज बैंकों से ट्रेडिंग आय में भारी उछाल की उम्मीद
कॉर्पोरेट जगत के नतीजों के लिहाज से अगला हफ्ता वॉल स्ट्रीट के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वित्तीय बाजार से जुड़े अनुमानों के मुताबिक वॉल स्ट्रीट के सबसे बड़े बैंकिंग संस्थान तिमाही वित्तीय नतीजों के दौरान लगभग 19 अरब डॉलर का स्टॉक-ट्रेडिंग राजस्व दर्ज कर सकते हैं। इस सकारात्मक अनुमान से बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखी गई। प्रमुख निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के शेयर 1.4 प्रतिशत चढ़े, जिससे मंगलवार को 5.1 अरब डॉलर का स्टॉक-ट्रेडिंग राजस्व दर्ज करने की उम्मीद जताई जा रही है। मॉर्गन स्टेनली के शेयर भी 1.4 प्रतिशत ऊपर बंद हुए, जिसका अनुमानित तिमाही राजस्व 4.9 अरब डॉलर आंका गया है। इसके अतिरिक्त जेपी मॉर्गन से 4.5 अरब डॉलर और बैंक ऑफ अमेरिका से 2.6 अरब डॉलर का स्टॉक-ट्रेडिंग राजस्व जुटाने का अनुमान जताया गया है।
प्रौद्योगिकी और एआई कंपनियों के शेयरों में मजबूती
बैंकों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र से जुड़ी अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों में भी तेजी का रुख बना रहा। ओपनएआई के वर्ष 2026 के अंत तक वार्षिक राजस्व में 70 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने के अनुमानों ने इस क्षेत्र की धारणा को मजबूत समर्थन दिया। दिग्गज टेक फर्मों में माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में 2.4 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न के शेयर 3.3 प्रतिशत की छलांग लगाने में सफल रहे। समूचे वर्ष के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने इक्विटी बाजारों के प्रतिफल को सहारा दिया है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण
बाजार की मजबूत चाल के बावजूद नीतिगत ब्याज दरों और व्यापक आर्थिक आंकड़ों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वीटी मार्केट्स के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक (एपीएसी) जस्टिन खू के अनुसार सितंबर महीने की एफओएमसी बैठक के विवरण से यह संकेत मिलता है कि अधिकारियों का रुख सख्त बना हुआ है। समिति के 18 में से 16 अधिकारियों का मानना है कि मुद्रास्फीति को फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से लगातार ऊपर रहने से रोकने के लिए वर्ष 2026 में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी आवश्यक हो सकती है।
इसके बावजूद कुछ हालिया आर्थिक आंकड़ों ने तत्काल फैसले की संभावनाओं को नरम कर दिया है। पीसीई मुद्रास्फीति के उम्मीद से कमजोर रहने और हालिया रोजगार आंकड़ों में नरमी के कारण अक्टूबर में ब्याज दरें तुरंत बढ़ाए जाने की संभावना घटी है। रोजगार के आंकड़ों में गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 की वृद्धि दर्ज की गई और बेरोजगारी दर मामूली बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। दूसरी ओर अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.3 प्रतिशत से ऊपर निकल चुकी है, जिससे कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए उधारी लागत बढ़ गई है और वित्तीय हालात अधिक सख्त हो गए हैं। इस पृष्ठभूमि में 14 अक्टूबर को जारी होने वाली सितंबर सीपीआई मुद्रास्फीति रिपोर्ट एक निर्णायक संकेत देगी कि क्या मूल्य दबावों में कमी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
विदेशी मुद्रा बाजार और जिंसों का ताजा रुख
आगामी सीपीआई रिपोर्ट से पहले वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक सीमित दायरे में समेकन दिखाता नजर आ रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) 1.1150 के स्तर का दोबारा परीक्षण कर रही है, जबकि ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) को 1.3180 के आसपास समर्थन मिला है। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) सीमित दायरे में बने हुए हैं, जबकि यूएसडी/सीएचएफ (USD/CHF) को 0.8381 पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) की ऊपर की चाल कमजोर रही है, न्यूजीलैंड डॉलर (NZD/USD) सीमित दायरे में स्थिर है, और अमेरिकी डॉलर बनाम कनाडाई डॉलर (USD/CAD) लगातार 1.42477 के अपने स्विंग हाई का परीक्षण कर रहा है।
जिंस बाजार में अमेरिकी क्रूड ऑयल 89.002 के निचले स्तर से उबरकर ऊपर चढ़ा है, जहां 94.50 का स्तर अगला अहम पड़ाव माना जा रहा है। सोने की कीमतें 4,080 के निचले दायरे से सुधरी हैं, जबकि चांदी ने एक नया स्विंग लो बनाया है और यहां से तेजी के संकेत दे रही है। प्राकृतिक गैस 3.05 के स्तर से ऊपर मजबूती से सुधरी है और किसी नए उछाल से पहले कुछ समय ठहर सकती है। इसके विपरीत क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 82,085 के दायरे से नीचे कारोबार करता दिखा है।
उभरते बाजारों और भारतीय इक्विटी पर प्रभाव
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसैलवन राधाकृष्णन के अनुसार अमेरिकी मुद्रास्फीति और खुदरा बिक्री के आंकड़े आगामी दिनों में ट्रेजरी यील्ड तथा डॉलर की दिशा तय करने में प्राथमिक भूमिका निभाएंगे। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक मजबूत आते हैं, तो यह फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रखने की संभावना को बल देगा। इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं और विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह पर लगातार दबाव बना रह सकता है। इसके विपरीत नरम मुद्रास्फीति या उपभोक्ता मांग में कमी के संकेत यील्ड को नीचे ला सकते हैं, जिससे भारतीय इक्विटी बाजार को हालिया शॉर्ट-कवरिंग के मुकाबले अधिक टिकाऊ आधार मिल सकेगा।
कच्चे तेल के मोर्चे पर ब्रेंट क्रूड लगभग 102.50 से 105 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार करने के बाद 104.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसी समय अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.24 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई। कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें भारतीय रुपये और घरेलू मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर अतिरिक्त दबाव बनाए रख सकती हैं। वृहद आर्थिक दृष्टिकोण से सार्थक राहत पाने के लिए कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे टिकाऊ रूप से आना जरूरी माना जा रहा है। इसके अलावा ईरान और क्षेत्रीय तेल बुनियादी ढांचे से जुड़े घटनाक्रम तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार जोखिम का एक बड़ा स्रोत बने हुए हैं।



















