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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में ठहराव से भारतीय रुपये को मिली राहतबाज़ार
19 सित॰ 2026, 1:02 pm (18 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में ठहराव से भारतीय रुपये को मिली राहत

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 4.94% तक फिसलने से शुक्रवार को भारतीय रुपये में शानदार रिकवरी देखने को मिली।

CLSMA20 SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण19 सितंबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

CL अभी $100 पर है, जबकि EMA20 $94.81, EMA50 $89.11 और EMA200 $79.29 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA20 ($94.81) तक गिरावट पर खरीदार बचाव करते हैं।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 64 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की तेजी थमने के बाद शुक्रवार को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जोरदार वापसी दर्ज की है। इस कारोबारी हफ्ते के दौरान भारी दबाव का सामना कर रही घरेलू मुद्रा को वैश्विक आपूर्ति से जुड़े सकारात्मक संकेतों और विदेशी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से बड़ा सहारा मिला है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहता है, इसलिए तेल की कीमतों में मामूली सुधार भी घरेलू अर्थव्यवस्था और मुद्रा के लिए बड़ी राहत लेकर आता है।

कच्चे तेल की आपूर्ति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य

सऊदी अरब द्वारा ऊर्जा उत्पादों के परिवहन के लिए वैकल्पिक मार्गों पर विचार किए जाने की वजह से पेट्रोलियम बाजार में कीमतों पर दबाव कम हुआ है। डोयचे बैंक के अनुसार, जब यह सामने आया कि सऊदी अरब कुछ ही दिनों के भीतर अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की लगभग आधी क्षमता बहाल करने और करीब छह हफ्तों में इसे पूरी तरह से चालू करने की योजना बना रहा है, तब बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं काफी हद तक शांत हो गईं।

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इससे पहले रियाद और मदीना के पास स्थित पाइपलाइन प्रतिष्ठानों पर यमन से जुड़े हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरा संकट पैदा हो गया था। इस अप्रत्याशित हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया था, लेकिन अब मरम्मत और वैकल्पिक आपूर्ति के कदमों ने बाजार में संतुलन बनाने का काम किया है। ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, क्रूड ऑयल वायदा (CL=F) 100.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले बंद भाव 101.91 डॉलर से 1.58% की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है, जबकि तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 64 पर और 20-दिवसीय ईएमए 94.81 डॉलर पर बना हुआ है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक मुद्राओं का रुख

अमेरिकी सरकार समर्थित प्रतिभूतियों पर यील्ड पिछले कुछ हफ्तों की तेज बढ़त के बाद थोड़ी शांत हुई है। तेल की कीमतों में सुधार से महंगाई की आशंकाओं में कमी आई है, जिससे 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड मंगलवार को 19 साल के उच्चतम स्तर 5.04% को छूने के बाद चालू सप्ताह के निचले स्तर 4.94% के करीब कारोबार कर रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और आगामी नीतिगत दरों के पुनर्मूल्यांकन से बॉन्ड यील्ड के सीमित दायरे में रहने की संभावना है। अमेरिकी यील्ड में नरमी आने से उभरते बाजारों और भारत जैसे देशों की जोखिम-संवेदनशील संपत्तियों के प्रति विदेशी निवेशकों का आकर्षण बढ़ता है।

वैश्विक बाजार के अन्य मुद्रा जोड़ों की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान लगातार दूसरे दिन मजबूती दर्ज की गई और यह 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक के सख्त रुख वाले बयानों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया है, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर की गिरावट को सीमित रखा। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दर को 1.25% तक बढ़ाने और सख्त मौद्रिक नीति बयान जारी करने के बावजूद, दो असहमति मतों के कारण जापानी येन भारी बिकवाली दबाव में दिखा, जिससे अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 157.00 से ऊपर उछल गया। जापानी येन एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेशों के लिए सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत रहा है, लेकिन अब यह समीकरण बदलता दिख रहा है।

USD/INR का तकनीकी विश्लेषण

दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर बनाम भारतीय रुपया (USD/INR) 95.7755 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह मुद्रा जोड़ी 95.4582 पर स्थित 20-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से ऊपर बनी हुई है, जिससे इसका सकारात्मक और मजबूत रुझान बरकरार है। 94.00 के मध्य स्तरों से शुरू हुई रिकवरी को यह स्तर गति प्रदान कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि बाजार में अंतर्निहित मांग पूरी तरह सक्रिय है और किसी भी गिरावट पर लिवाली देखने को मिल सकती है।

तकनीकी स्तरों के लिहाज से 20-पीरियड ईएमए 95.46 के करीब पहला प्रमुख समर्थन स्तर है, जो अल्पकालिक अपट्रेंड का आधार बना हुआ है। ऊपर की ओर, 17 सितंबर का उच्चतम स्तर 96.10 तत्काल प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है। यदि यह जोड़ी 96.10 के स्तर को निर्णायक रूप से पार कर लेती है, तो 97.00 के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।

भारतीय रुपये की चाल तय करने वाले प्रमुख मैक्रोइकोनॉमिक कारक

भारतीय रुपया बाहरी वैश्विक कारकों के प्रति सबसे संवेदनशील मुद्राओं में से एक माना जाता है। भारत अपनी तेल खपत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव रुपये की सेहत पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती और विदेशी संस्थागत व प्रत्यक्ष निवेश का प्रवाह भी इसके मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विनिमय दर को स्थिर रखने और व्यापार को सुगम बनाने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों को समायोजित करके मुद्रास्फीति को 4% के अपने लक्ष्य के करीब रखने का प्रयास करता है। सामान्य तौर पर ऊंची ब्याज दरें रुपये को मजबूत करती हैं, क्योंकि यह कैरी ट्रेड को बढ़ावा देती हैं जहां अंतरराष्ट्रीय निवेशक कम ब्याज दरों वाले देशों से उधार लेकर अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दर वाले देशों में निवेश करते हैं। इसके विपरीत, यदि घरेलू मुद्रास्फीति प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक होती है, तो यह मुद्रा के अवमूल्यन का कारण बन सकती है क्योंकि इससे निर्यात महंगा हो जाता है और आयात भुगतान के लिए अधिक रुपये बेचने पड़ते हैं। देश की जीडीपी विकास दर, व्यापार संतुलन और वैश्विक स्तर पर रिस्क-ऑन माहौल भारतीय रुपये की मजबूती के प्रमुख आधार स्तंभ हैं।

सवाल-जवाब

भारतीय रुपये में शुक्रवार को अचानक सुधार क्यों देखने को मिला?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 4.94% तक फिसलने से रुपये को मजबूत समर्थन मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का मुख्य कारण क्या रहा?
सऊदी अरब द्वारा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को बहाल करने और शिपमेंट के वैकल्पिक रास्ते तलाशने से आपूर्ति की चिंताएं कम हुईं।
USD/INR के लिए चार्ट पर कौन से प्रमुख तकनीकी स्तर देखे जा रहे हैं?
20-पीरियड ईएमए 95.46 पर तत्काल समर्थन प्रदान कर रहा है, जबकि 96.10 का स्तर पहला बड़ा प्रतिरोध है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भारतीय रुपये को कैसे फायदा होता है?
कम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से विदेशी निवेशकों का रुझान भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की जोखिम-संवेदनशील संपत्तियों की ओर बढ़ता है।
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की विनिमय दर को कैसे नियंत्रित करता है?
आरबीआई विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए सीधे विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है और ब्याज दरों को समायोजित करता है।
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