अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई और AUD/USD जोड़ी फिसलकर 0.6970 के आसपास कारोबार करती दिखी। हालिया आंकड़ों के मुताबिक लाइव बाजार में यह जोड़ी 0.6976 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद 0.6967 से 0.12 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है, जबकि 52 हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई (RSI) 36 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड स्थिति के करीब होने का इशारा करता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नए सिरे से आई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर को निचले स्तरों पर मजबूत समर्थन मिल रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा अपनी हालिया रिकवरी को बनाए रखने में नाकाम रही है।
फेडरल रिजर्व के सख्त तेवर और ब्याज दरों का परिदृश्य
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है। फेडरल रिजर्व के आगामी मिनट्स जारी होने से ठीक पहले निवेशकों की निगाहें अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर लगी हैं। कैनसस सिटी फेड के प्रेसिडेंट जेफ श्मिड ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में लंबी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी की मार पड़ने के बावजूद, महंगाई को काबू में लाने के लिए केंद्रीय बैंक को अपनी नीतिगत दरों में और इजाफा करने की जरूरत है। उनका यह बयान काफी सख्त माना जा रहा है, जिसमें लेबर फोर्स की मजबूती और लगातार बनी रहने वाली महंगाई पर निराशा जाहिर की गई है। जेफ श्मिड ने यह भी उल्लेख किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) अब मुद्रास्फीति को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक बन चुका है।
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की साख दांव पर लगी है और लंबी अवधि की प्रतिफल दरों में बढ़ोतरी के बावजूद अल्पावधि दरों पर काम करना अभी बाकी है। इस रुख ने संकेत दिया है कि मौद्रिक सख्ती का दौर लंबे समय तक खिंच सकता है। हालांकि बाजार आगामी अक्टूबर बैठक में फेड की ओर से ब्याज दरों को यथावत रखने की संभावना तलाश रहा है, लेकिन लगातार आ रहे सख्त नीतिगत बयानों ने डॉलर को मजबूती दी है और जोखिम भरी संपत्तियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तकनीकी स्तर और यूओबी ग्रुप का विश्लेषण
मुद्रा जोड़ी के तकनीकी ढांचे पर यूओबी ग्रुप (UOB Group) के रणनीतिकारों ने विस्तृत राय साझा की है। उनका 1 से 3 सप्ताह का दृष्टिकोण मध्य सितंबर से शुरू हुई गिरावट से प्रभावित है। उनका कहना है कि पिछले महीने के मध्य से शुरू हुई कमजोरी अभी भी बरकरार है, लेकिन अत्यधिक ओवरसोल्ड परिस्थितियों को देखते हुए आगे आने वाली किसी भी गिरावट की गति धीमी पड़ सकती है और वह अगले प्रमुख सपोर्ट स्तर 0.6866 तक पहुंचने से पहले ही रुक सकती है। रणनीतिकारों का आकलन है कि नीचे की ओर जाने वाली गति अब धीमी होने लगी है। यदि कीमत मजबूती के साथ 0.6985 के कड़े रेजिस्टेंस स्तर को पार कर जाती है, तो यह संकेत मिलेगा कि 0.6866 का स्तर पहुंच से बाहर हो चुका है और बाजार में पहले तय किए गए डाउनसाइड लक्ष्य से बदलाव आ रहा है।
चार्ट विश्लेषण के अनुसार, ऊपर की ओर शुरुआती रुकावट 0.7050 पर बॉलिंजर मिडिल बैंड और 0.7055 पर 100-दिवसीय एसएमए (SMA) के आसपास बनी हुई है। इसके पार जाने पर 0.7205 के बॉलिंजर अपर बैंड के पास अगली बाधा दिखती है। वर्तमान तकनीकी आंकड़ों में 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड 0.6892 से 0.7225 के बीच स्थित हैं, जिसका मध्य स्तर 0.7059 है। नीचे की ओर 0.6895 पर बॉलिंजर लोअर बैंड महत्वपूर्ण सपोर्ट प्रदान करता है। इस स्तर के नीचे निर्णायक गिरावट मंदी के दौर को और गहरा कर सकती है। वर्तमान पिवट स्तर 0.6979 पर स्थित है, जिसमें रेजिस्टेंस R1 0.6983 और R2 0.6991 है, जबकि सपोर्ट S1 0.6971 और S2 0.6967 पर बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रमुख आर्थिक चालक
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की विनिमय दर कई मौलिक कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें सबसे अहम हैं। बाजार का आकलन है कि आरबीए द्वारा नवंबर में दरों में दोबारा बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया अंतर-बैंक उधारी दरों को तय करके पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी लागत को प्रभावित करता है। इसका प्राथमिक लक्ष्य ब्याज दरों में बदलाव करके मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन देती हैं, जबकि कम दरें इसे कमजोर बनाती हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक क्रेडिट परिस्थितियों को प्रबंधित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग का सहारा भी ले सकता है।
चूंकि ऑस्ट्रेलिया एक संसाधन संपन्न देश है, इसलिए इसके सबसे बड़े निर्यात उत्पाद लौह अयस्क (Iron Ore) की अंतरराष्ट्रीय कीमतें मुद्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार लौह अयस्क का वार्षिक निर्यात 118 बिलियन डॉलर रहा था, जिसका प्रमुख गंतव्य चीन है। लौह अयस्क की कीमतों में तेजी से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की समग्र मांग बढ़ती है और देश के व्यापार संतुलन में मजबूती आती है। इसके विपरीत, कीमतों में मंदी व्यापार घाटे के दबाव के जरिए मुद्रा को कमजोर करती है।
चीन का आर्थिक स्वास्थ्य भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीधा असर डालता है क्योंकि वह ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीनी अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि से ऑस्ट्रेलियाई कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ती है, जो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को ऊपर उठाती है। व्यापार संतुलन, जो निर्यात से अर्जित आय और आयात पर किए गए व्यय के बीच का अंतर है, मुद्रा की दिशा तय करता है। अधिशेष व्यापार संतुलन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बल देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन इसे नीचे खींचता है। इसके साथ ही, वैश्विक वित्तीय बाजारों का रुझान यानी जोखिम लेने की भावना (रिस्क-ऑन) ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक होती है, जबकि सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव (रिस्क-ऑफ) इसे नुकसान पहुंचाता है।
वैश्विक बाजारों और अन्य मुद्राओं का हाल
बुधवार के सत्र में अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों में भी हलचल देखी गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों के बीच USD/JPY जोड़ी 158.50 के आसपास डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के करीब टिकी रही, जहां खरीदार 200-दिवसीय एसएमए के ऊपर ब्रेकआउट का इंतजार कर रहे हैं। सोने की कीमतों में भी नरमी आई, जिससे पिछले दिन 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई रिकवरी रुक गई। अमेरिकी डॉलर की नई मांग और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बिना यील्ड वाले सोने की तेजी को एक सीमित दायरे में बांध दिया है।
दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बुधवार को सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा घोषित करने जा रहा है। बाजार की आम सहमति के अनुसार, चालू कैलेंडर वर्ष में दरों को स्थिर रखने के बाद आरबीआई ब्याज दर वृद्धि चक्र की शुरुआत कर सकता है और प्रमुख रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत कर सकता है। वहीं यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने जटिल स्थिति बनी हुई है, जहां महंगाई लक्ष्य से दोगुनी चल रही है लेकिन बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय स्थितियां सख्त कर रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के समक्ष कड़ा असमंजस पैदा हो गया है।


















