अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और जिंस बाजार में बड़े संस्थागत प्रतिभागियों तथा सट्टेबाजों की स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए गए हैं। अमेरिकी बाजार विनियामक आंकड़ों के आधार पर गैर-व्यावसायिक निवेशकों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर अपनी नकारात्मक स्थिति को और अधिक मजबूत किया है। इस रणनीतिक फेरबदल के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की शुद्ध स्थिति लगभग 98.6 हजार अनुबंधों तक पहुंच गई, जो अगस्त 2025 के अंतिम दौर के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। स्पॉट बाजार में विनिमय दर के अहम 0.7000 के मानक स्तर से नीचे खिसकने के बाद इस रुख को स्पष्ट पुष्टि मिली है। ऐतिहासिक आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो इसका सट्टेबाजी जोखिम 47वें पर्सेंटाइल के करीब आंका गया है, जबकि समग्र शुद्ध स्थिति केवल दूसरे पर्सेंटाइल के निचले पायदान पर टिकी है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में मूल्य और अनुबंधों का रुझान
बाजार की चाल और रणनीतिक अनुबंधों के बीच एकसमान दिशा कनाडाई डॉलर, यूरो और स्विस फ्रैंक में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। जब मूल्य में आने वाला बदलाव और सट्टेबाजों की स्थिति एक ही दिशा में अग्रसर होते हैं, तो तकनीकी दृष्टिकोण से इस कदम को अधिक ठोस आधार माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सप्ताह में इन स्तरों की निरंतरता पर सबकी नजर रहेगी। यदि कीमतों में अचानक तेज मोड़ आता है, तो वर्तमान में दिखाई देने वाली पुष्टि एक छलावा या गलत संकेत साबित हो सकती है। यूरो के मामले में शुद्ध स्थिति शून्य पर्सेंटाइल के बेहद करीब बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऐतिहासिक आधार पर निवेशकों के पास इस मुद्रा की हिस्सेदारी बेहद सीमित है।
सोने में भारी भीड़ और ब्रिटिश पाउंड का विपरीत दायरा
धातुओं और मुद्राओं के बीच जोखिम का वितरण काफी असंतुलित दिखाई दे रहा है। सोना वर्तमान समय में सटोरियों का सबसे पसंदीदा और भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बना हुआ है, जहां समग्र जोखिम 88वें पर्सेंटाइल पर पहुंच चुका है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कुल ओपन इंटरेस्ट के मुकाबले सोने में शुद्ध लॉन्ग अनुबंधों की हिस्सेदारी अत्यधिक बड़ी है। इसके बिल्कुल विपरीत छोर पर ब्रिटिश पाउंड मौजूद है, जो शून्य पर्सेंटाइल के करीब दर्ज हुआ है। यह भारी असमानता बाजार के असंतुलित जोखिम को उजागर करती है। जब किसी परिसंपत्ति में बहुत अधिक अत्यधिक खरीदारी हो जाती है, तो वहां तेजी से मुनाफावसूली या बिकवाली का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी तरफ, बेहद कम सहभागिता वाले क्षेत्रों में जैसे ही कीमतों का रुख सकारात्मक होता है, नई खरीदारी के लिए व्यापक गुंजाइश खुल जाती है।
जापानी येन और मुद्राओं का ऐतिहासिक पैमाना
शुद्ध ऐतिहासिक स्थिति के दृष्टिकोण से जापानी येन सबसे मजबूत स्थिति दर्ज कर रहा है, जहां इसकी शुद्ध पोजीशनिंग 86वें पर्सेंटाइल के करीब आंकी गई है। बाजार के विश्लेषक इन दोनों संकेतकों में अंतर करते हैं, जहां एक्सपोजर से मौजूदा भीड़भाड़ का पता चलता है, वहीं शुद्ध पर्सेंटाइल यह स्पष्ट करता है कि ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में किसी मुद्रा का आकार कितना बड़ा या छोटा है। इस व्यवस्था के अनुसार सोने में अत्यधिक जमावड़ा है, जबकि यूरो में नए सिरे से पोजीशन बनाने की सबसे अधिक संभावना मौजूद है। हालांकि, इन दोनों सीमाओं में से किसी को भी अपने आप में बाजार के उलटने का स्वतंत्र संकेत नहीं माना जा सकता।
स्पॉट कारोबार में विभिन्न जोड़ियों का वर्तमान व्यवहार
एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी के संकेत दिए और 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई रातभर की गिरावट ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को कुछ सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया को लेकर सख्त नीतिगत उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचला समर्थन दिया। दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही। जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन की मजबूती को प्रभावित किया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल की नरमी और फेडरल रिजर्व से जुड़ी नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच डॉलर पर भी सीमित दबाव देखा गया। सोने की कीमतों में शुरुआती तेजी के बाद कमजोरी आई और यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे आ गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और डॉलर की मजबूती ने पीली धातु पर दबाव बनाए रखा।


















