त्योहारों के मौसम में रोजमर्रा के भोजन से हटकर कुछ पारंपरिक और जायकेदार पकाने की योजना बना रहे लोगों के लिए छत्तीसगढ़ी शैली में पकाई जाने वाली जिमी कांदा की सब्जी एक शानदार विकल्प साबित होती है। इस व्यंजन की खासियत देसी मसालों का संतुलित मेल, प्याज, टमाटर, लहसुन, तीखी हरी मिर्च और खट्टे दही का अनोखा स्वाद है। जब जिमी कांदा के टुकड़ों को तेल में कुरकुरा तलकर गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी में धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। रसोई में सामान्य रूप से मौजूद मसालों से बनने वाली यह थाली पारंपरिक खानपान के शौकीनों को खूब पसंद आती है।
सफाई और कटाई के दौरान रखें खास सावधानी
जिमी कांदा पकाने की शुरुआत हमेशा उसकी गहन सफाई से होती है। जमीन के नीचे उगने के कारण इस कंद पर काफी मिट्टी और धूल चिपकी रहती है। इसे पानी से कई बार अच्छी तरह धोकर पूरी गंदगी साफ कर लें, फिर छीलकर अपनी जरूरत के अनुसार टुकड़ों में काटें। जिमी कांदा काटते समय त्वचा पर खुजली और जलन होना आम बात है। इस परेशानी से बचने के लिए हाथों में थोड़ा सरसों का तेल लगा लें या फिर रबर के दस्ताने पहनकर ही कटाई करें। पकाने से पहले की यह पूरी तैयारी आगे की रसोई प्रक्रिया को बेहद सुगम बना देती है।
टुकड़ों को सुनहरा भूरा होने तक कड़ाही में तलें
जिमी कांदा की सही बनावट और स्वाद पाने के लिए उसे सही ढंग से तलना बेहद जरूरी है। कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में तेल डालकर उसे मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म करें। तेल के गर्म होते ही कटे हुए जिमी कांदा के टुकड़े कड़ाही में डालें। इन्हें मध्यम आंच पर उलट-पुलट करते हुए तब तक पकाएं जब तक कि बाहरी परत सुनहरी भूरी न दिखने लगे। जब टुकड़े सही रंगत में आ जाएं, तो उन्हें तेल से निकालकर अलग बर्तन में रख लें। अच्छी तरह तलने से जिमी कांदा का कसैलापन कम होता है और वह ग्रेवी में घुलकर बिखरता नहीं है।
मसालों, प्याज और टमाटर से तैयार करें रिच ग्रेवी
सब्जी की ग्रेवी तैयार करने के लिए उसी कड़ाही में आवश्यकतानुसार थोड़ा तेल बचाएं और बाकी अतिरिक्त तेल निकाल लें। गर्म तेल में जीरा, तेजपत्ता और साबुत खड़े मसाले डालकर तड़का लगाएं। मसालों के चटकते ही बारीक कटी हरी मिर्च, लहसुन और प्याज डालें। इन्हें तब तक भूनें जब तक कि प्याज हल्का बादामी न हो जाए और मसालों की सोंधी खुशबू पूरे कमरे में न फैलने लगे। इसके बाद कटे हुए टमाटर कड़ाही में शामिल करें। पूरी सामग्री को धीमी से मध्यम आंच पर लगभग पांच मिनट तक चलाते हुए पकाएं, ताकि प्याज, टमाटर और मसाले आपस में मिलकर एकसार हो जाएं।
तले हुए टुकड़ों को ग्रेवी में मिलाकर पकाएं
मसाला भुन जाने और किनारों से तेल अलग दिखाई देने पर पहले से तलकर रखे गए जिमी कांदा के टुकड़े ग्रेवी में मिला दें। मसालों और कंद के टुकड़ों को अच्छी तरह चलाकर मिलाएं और लगभग पांच मिनट तक पकने दें, ताकि मसाले भीतर तक समा जाएं। इसके बाद ग्रेवी की जरूरत के अनुसार गर्म पानी डालें। अपनी पसंद के हिसाब से तरी को गाढ़ा या पतला रखा जा सकता है। धीमी आंच पर कुछ मिनट और पकाने के बाद देसी मसालों से भरपूर छत्तीसगढ़िया जिमी कांदा की सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है।
व्रत और नियमित भोजन के अनुसार सामग्री का चयन
यह पारंपरिक व्यंजन नियमित पारिवारिक भोजन और दावतों के लिए बेहद मुफीद है। यदि आप नवरात्रि या किसी अन्य पर्व का उपवास रख रहे हैं, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के मुताबिक सामग्री में बदलाव कर सकते हैं। कई लोग व्रत के दिनों में प्याज, लहसुन और सामान्य नमक का सेवन करने से बचते हैं। ऐसे में व्रत रखने वाले लोग इन सामग्रियों को छोड़कर केवल फलाहारी नियमों के मुताबिक ही इसे तैयार करें। अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से सामग्री चुनकर इस देसी डिश का आनंद उठाया जा सकता है।



















