देशभर से हजारों की संख्या में युवा डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोचिंग हब कोटा का रुख करते हैं। यहां आकर छात्र अपनी पूरी ऊर्जा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, टेस्ट सीरीज और कठिन अध्ययन कार्यक्रम में लगाते हैं। लेकिन लैंडमार्क सिटी जैसे प्रमुख कोचिंग क्षेत्र में रोजमर्रा के सफर की मुश्किलें उनके इरादों की परीक्षा ले रही हैं। कोचिंग संस्थानों तक जाने वाले रास्तों पर फैली गंदगी, उधड़ी हुई सड़कें, गहरे गड्ढे और चारों ओर उड़ती धूल छात्रों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। छुट्टी के समय जब हजारों छात्र एक साथ बाहर निकलते हैं, तो सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। हॉस्टल और पीजी से कक्षाओं के बीच यह रोज की भागदौड़ न केवल उनका कीमती समय बर्बाद कर रही है, बल्कि उनकी सेहत और मानसिक शांति पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
टूटी सड़कों और गंदगी के बीच संघर्ष करते छात्र
लैंडमार्क सिटी में रहकर पढ़ाई कर रहे छात्र राहुल राज ने इस समस्या को सामने रखते हुए बताया कि यहां की मुख्य सड़कें कई हिस्सों में पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जब भी कोचिंग संस्थानों में छुट्टी होती है, तो वाहनों और विद्यार्थियों की भारी आवाजाही के कारण लंबा जाम लग जाता है। बरसात के मौसम में तो इन सड़कों की स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है क्योंकि गड्ढों में पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप होने लगता है। उन्होंने मांग उठाई कि प्रशासन को इस सड़क की तुरंत मरम्मत करानी चाहिए, ताकि अपनी कक्षाओं के लिए आने-जाने वाले छात्रों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
इसी इलाके में रह रहे एक अन्य छात्र हुजैफ ने बताया कि देश के अलग-अलग कोनों से कोटा आने वाले विद्यार्थियों का मकसद केवल पढ़ाई होता है और उन्हें एक स्वच्छ व शांत शैक्षिक माहौल मिलना चाहिए। सड़कों पर लगातार दौड़ते वाहनों की वजह से दिनभर इतनी धूल उड़ती है कि सांस लेना तक कठिन हो जाता है। इस धूल से छात्रों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जर्जर सड़क को तुरंत नए सिरे से बनाने के साथ ही नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को यहां रोजाना सफाई की पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिए।
हादसों का खतरा और ट्रैफिक डायवर्जन की आवश्यकता
खराब रास्तों और अव्यवस्थित यातायात की वजह से विद्यार्थियों के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। छात्र हर्षित ने बताया कि कक्षाओं के आने और जाने के समय सड़कों पर भारी वाहनों तथा छात्रों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। ऐसे में उड़ती धूल के बीच गंभीर सड़क हादसों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोचिंग की छुट्टी के दौरान ट्रैफिक रूट में फौरन बदलाव किया जाना चाहिए। चार पहिया वाहनों और कारों को दूसरे वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ा जाना चाहिए ताकि मुख्य कोचिंग मार्ग पर अत्यधिक भीड़ जमा न हो और पैदल चलने वाले छात्रों को सुरक्षित राह मिल सके।
सड़कों के बड़े गड्ढों की वजह से दोपहिया वाहन चलाना भी बेहद जोखिम भरा हो चुका है। गड्ढों और पत्थरों के कारण कई बार छात्र अपनी स्कूटी से फिसल कर गिर जाते हैं। धूल और प्रदूषण की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए छात्रों ने सुझाव दिया है कि संज्ञान बिल्डिंग के बाहर लैंडमार्क रोड पर वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जाना चाहिए, जिससे समय-समय पर पानी का छिड़काव कर धूल को बैठने में मदद मिले। इसके अतिरिक्त, सड़क किनारे दोनों तरफ घने पेड़-पौधे लगाने की भी सलाह दी गई है ताकि पर्यावरण स्वच्छ बना रहे।
कठिन रूटीन के बीच धूल की मार, प्रशासन से जल्द समाधान की गुहार
छात्र राम का कहना है कि वे रोजाना अपनी कक्षाओं में भाग लेने के लिए इसी खस्ताहाल मार्ग से गुजरते हैं। गड्ढों, धूल और भीषण जाम के कारण छात्रों का मनोबल टूटता है। उनका स्पष्ट कहना है कि वे अपने घरों से दूर केवल पढ़ाई करने आए हैं, धूल और प्रदूषण की मार झेलने नहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का दैनिक कार्यक्रम पहले से ही काफी व्यस्त और तनावपूर्ण होता है। सुबह जल्दी कोचिंग पहुंचना, दिनभर लंबी कक्षाएं लेना और शाम को टेस्ट की तैयारी में जुटने के बाद जब वे हॉस्टल या पीजी लौटते हैं, तो रास्ते की इस बदहाली से उनका काफी समय और ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
छात्रों की स्पष्ट मांग है कि संबंधित प्रशासनिक विभाग इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लें। क्षेत्र की सड़कों की मजबूती से मरम्मत की जाए, नियमित सफाई अभियान चलाया जाए और कोचिंग के व्यस्त घंटों के दौरान सुगम ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू किया जाए। यदि कोचिंग क्षेत्रों में बेहतर रोड कनेक्टिविटी और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, तभी छात्र अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।



















