अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में अमेरिकी डॉलर अपने हालिया दो महीने के शिखर 101.64 के करीब मजबूती बनाए हुए है, हालांकि बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान छह प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर का सूचकांक हल्का नरम पड़कर 101.28 के आसपास दर्ज किया गया। पिछले कारोबारी स्तरों के मुकाबले इसमें लगभग 0.11% की मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन व्यापक रुझान अब भी मजबूती का संकेत दे रहा है। दैनिक तकनीकी परिदृश्य में यह सूचकांक अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 100.40 से ऊपर बना हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि हाल ही में 100 के स्तर से नीचे की गिरावट के बाद शुरू हुई रिकवरी अभी भी गति पकड़ रही है। निवेशक और मुद्रा कारोबारी अब अपनी निगाहें आगामी वृहद आर्थिक आंकड़ों पर टिकाए हुए हैं, जिनमें निजी क्षेत्र की नौकरियों और व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मूल्य सूचकांक का विवरण शामिल है।
नीतिगत दरों पर फेड अधिकारियों के बयान और बाज़ार की प्रतिक्रिया
अमेरिकी डॉलर पर हल्का दबाव तब देखने को मिला जब फेडरल रिजर्व के न्यूयॉर्क गवर्नर जॉन विलियम्स ने ब्याज दरों में जल्दबाज़ी के किसी भी कदम को लेकर सतर्क रुख व्यक्त किया। जॉन विलियम्स ने मंगलवार को अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सितंबर की दर वृद्धि के बाद फिलहाल किसी तात्कालिक कदम की जल्दी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी आर्थिक आंकड़े फेड को मौद्रिक नीति की अगली दिशा तय करने में मदद करेंगे। इस टिप्पणी के बाद वित्तीय बाज़ार में अक्टूबर की नीतिगत बैठक के दौरान आक्रामक दर वृद्धि की उम्मीदों में तेज़ी से कमी आई। सीएमई फेडवॉच टूल के ताज़ा अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना घटकर 44.8% रह गई, जो सोमवार को 70.9% के उच्च स्तर पर देखी जा रही थी। हालांकि, विलियम्स ने यह भी जोड़ा कि यदि मुद्रास्फीति लगातार बनी रहती है तो इस वर्ष एक और दर वृद्धि की संभावना के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाज़ार के हीट मैप और प्रदर्शन तालिकाओं पर नज़र डालें तो अमेरिकी मुद्रा को कई अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के सामने उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। बुधवार के कारोबारी सत्र में डॉलर को सबसे अधिक कमज़ोरी ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले झेलनी पड़ी। इसी तरह एशियाई सत्र के दौरान जापानी येन के मुकाबले डॉलर का भाव 157.00 से नीचे बना रहा, जहां बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्त नीति और बाज़ार हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, भले ही जापान के घरेलू फैक्टरी उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़े उम्मीद से कमज़ोर रहे हों। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (एयूडी/यूएसडी) अपने दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के पास दर्ज की गई, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में अगस्त के मुख्य मुद्रास्फीति आंकड़े अपेक्षा से कम रहने के कारण रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे दरें बढ़ाने की उम्मीदें ठंडी पड़ गईं और चीन के पीएमआई आंकड़ों से भी कोई नया सहारा नहीं मिला।
कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स पर मुद्रा रुख का प्रभाव
डॉलर के इस सीमित दायरे वाले कारोबार का असर अन्य परिसंपत्ति वर्गों पर भी देखा गया। यूरोपीय सत्र में आगे बढ़ते हुए सोना 4,200 डॉलर के स्तर के नीचे दायरे में कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को मंगलवार के दो महीने के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे खींचा, जिसने सोने जैसी गैर-उपज परिसंपत्तियों के लिए एक सहायक का काम किया, लेकिन फेडरल रिजर्व की लंबी अवधि तक ऊंची दरों की आशंकाओं ने इस बढ़त को सीमित रखा। उधर क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में आवे का भाव बुधवार को 161 डॉलर के नीचे फिसल गया, जबकि इससे पिछले दिन इसमें 10% से अधिक की ज़बरदस्त उछाल दर्ज की गई थी। ऑन-चेन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि निवेशकों ने मुनाफ़ा वसूली शुरू कर दी है, हालांकि आवे के संस्थापक स्टानी कुलेचोव आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत टोकन-बर्न तंत्र लाने पर विचार कर रहे हैं जो आने वाले समय में इसके लिए उत्प्रेरक साबित हो सकता है।
आगामी मैक्रो डेटा: एडीपी रोजगार और कोर पीसीई आंकड़े
डॉलर इंडेक्स के 101.80 के वार्षिक उच्च स्तर को पार करने की संभावना अब पूरी तरह से उत्तरी अमेरिकी सत्र में जारी होने वाले वृहद आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है। अमेरिकी आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो अगस्त महीने के लिए पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मूल्य सूचकांक को 12:30 जीएमटी पर जारी करेगा। पीसीई मूल्य सूचकांक फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना माना जाता है, इसलिए बाज़ार प्रतिभागी इसके प्रत्येक घटक का बारीकी से अध्ययन करते हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कोर पीसीई सालाना आधार पर 3.3% पर स्थिर रह सकता है, जबकि मासिक आंकड़े पिछली रीडिंग 0.2% के मुकाबले 0.3% की तेज़ गति से बढ़ने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त सितंबर महीने के लिए अमेरिकी एडीपी रोज़गार परिवर्तन रिपोर्ट निजी क्षेत्र में 70,000 नई नौकरियों के सृजन का अनुमान जता रही है, जो अगस्त में दर्ज की गई 38,000 नौकरियों की तुलना में काफी बेहतर आंकड़ा है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर प्रमुख समर्थन-प्रतिरोध
डॉलर इंडेक्स स्पॉट वर्तमान में 101.28 के आसपास सक्रिय रूप से ट्रेड कर रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 68.70 के स्तर पर स्थित है, जो ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीद वाले क्षेत्र के ठीक नीचे है। यह संकेत देता है कि डॉलर में ऊपर की ओर गति अभी भी मजबूत है लेकिन थोड़ी खिंची हुई स्थिति में पहुंच रही है। नीचे की ओर गिरावट की स्थिति में 101.00 का स्तर पहला महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र है, जिसके बाद 20-दिवसीय ईएमए लगभग 100.40 पर प्रमुख सहारा प्रदान करता है। इसके विपरीत ऊपर की तरफ 101.80 का वार्षिक शिखर सबसे बड़ी तकनीकी बाधा बना हुआ है, जिसके टूटने पर ही डॉलर में नए सिरे से तेज़ उछाल की पुष्टि होगी।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर की साख
संयुक्त राज्य अमेरिका में समग्र मौद्रिक नीति का संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। फेड का मुख्य दोहरा अधिदेश मूल्य स्थिरता हासिल करना और अधिकतम रोज़गार को बढ़ावा देना है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उसका प्राथमिक साधन ब्याज दरों का समायोजन है। जब कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ रही होती हैं और मुद्रास्फीति फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो वह ब्याज दरों में वृद्धि करता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा परिणाम डॉलर की मजबूती के रूप में सामने आता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका में पैसा लगाना अधिक आकर्षक हो जाता है। इसके विपरीत जब मुद्रास्फीति 2% से नीचे गिरती है या बेरोज़गारी दर अत्यधिक बढ़ जाती है, तो फेड उधारी को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) साल में आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करती है, जिसमें बारह अधिकारी शामिल होते हैं और आर्थिक स्थितियों का आकलन करके नीतिगत निर्णय लेते हैं। चरम स्थितियों में फेड क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) का सहारा भी लेता है, जैसा कि 2008 के वित्तीय संकट में देखा गया था, जो सामान्यतः डॉलर को कमज़ोर करता है, जबकि इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) की प्रक्रिया आमतौर पर डॉलर के मूल्य को मज़बूती देती है।



















