अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो पर बिकवाली का दबाव लगातार तीसरे दिन देखा जा रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर 1.1350 के अहम तकनीकी सपोर्ट स्तर को तोड़ते हुए 1.1330 के दायरे में कारोबार करती नजर आई। यह स्तर बीते दिन छुए गए मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर के करीब है। व्यापक वित्तीय परिदृश्य और बाजार के रुझान इस समय मंदी की स्थिति का संकेत दे रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के रुख से यूरो पर बढ़ा दबाव
यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड के हालिया बयानों ने साझा मुद्रा यूरो की गति को धीमा कर दिया है। क्रिस्टीन लेगार्ड के नरम रुख वाले बयानों ने अक्टूबर महीने में बैंक द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि की बाजार अपेक्षाओं पर पानी फेर दिया है। मौद्रिक नीति में सख्ती के बजाय नरमी के इस संकेत ने निवेशकों के बीच यूरो के प्रति आकर्षण कम किया है। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब मजबूती बनाए हुए है, जिसने मुद्रा बाजार में यूरो की गिरावट को और तेज कर दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का डॉलर पर प्रभाव
वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता का माहौल अमेरिकी मुद्रा के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा बन रहा है। ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिशों को उस वक्त झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा रखे गए सात दिन के संघर्ष विराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके अलावा, तनाव को कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता के प्रयासों में भी इस सप्ताह कोई खास प्रगति नहीं देखी गई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य संघर्ष में दोबारा उतरने का आदेश दे सकते हैं। इस प्रकार की भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं निवेशकों को सुरक्षित विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित कर रही हैं।
आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के बयानों पर नजर
विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की मुख्य नजर शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी मासिक रोजगार रिपोर्ट यानी नॉनफॉर्म पेरोल्स पर टिकी है। इसके साथ ही यूएस पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स और यूएस एडीपी नौकरियों के आंकड़ों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के प्रभावशाली सदस्यों के आने वाले भाषण भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की भावी दिशा को समझने के लिए अहम होंगे। इन सभी कारकों से तय होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर और यूरो की चाल किस दिशा में मुड़ेगी।
अन्य वैश्विक मुद्राओं में उतार-चढ़ाव की स्थिति
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी इस सप्ताह व्यापक फेरबदल दर्ज किया गया है। अमेरिकी डॉलर स्विस फ्रैंक के खिलाफ सबसे मजबूत स्थिति में रहा। वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर एशियाई सत्र के दौरान दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया में अगस्त माह के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े अनुमान से कमजोर रहने के कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें ठंडी पड़ गई हैं। चीन के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती देने में नाकाम रहे। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर 157.00 के स्तर से नीचे दबाव में देखा गया। बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों ने कमजोर घरेलू फैक्ट्री उत्पादन और खुदरा बिक्री आंकड़ों के बावजूद जापानी मुद्रा को सहारा दिया है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
कमोडिटी बाजार में सोना बुधवार को 4,110 डॉलर के आठ सप्ताह के निचले स्तर से उबरने के बाद स्थिरता बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले यह 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही बना हुआ है। दूसरी ओर डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल में तेजी की रफ्तार कुछ थमती दिखी है। अपने हालिया उच्च स्तरों से हल्की गिरावट के बाद बिटकॉइन को 85,000 डॉलर के स्तर पर कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, जबकि एथेरियम 2,674 डॉलर और एक्सआरपी 1.500 डॉलर के करीब बना हुआ है। तकनीकी दृष्टिकोण से यूरो के लिए अब 1.1300 का स्तर बेहद अहम हो चुका है और इस सीमा से नीचे जाने पर यूरो में और तेज गिरावट आ सकती है।



















