अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर बिकवाली का दबाव गहराता दिखाई दे रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह लुढ़ककर 1.3250 के स्तर के पास पहुंच गया है। यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही पाउंड स्टर्लिंग में सुस्ती देखी गई, जिससे मुद्रा जोड़ी पर मंदड़ियों की पकड़ और मजबूत होती नजर आ रही है। दैनिक चार्ट पर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए के नीचे बने रहने से तकनीकी परिदृश्य नकारात्मक बना हुआ है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स भी मंदी की गति का संकेत दे रहा है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सत्र में भाव 1.33 के आसपास दर्ज किया गया है, जो 1.32 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 0.17 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर अल्पकालिक मंदी का दबाव साफ दिखाई देता है। भाव 100-दिवसीय एसएमए के साथ-साथ बोलिंजर बैंड्स के 20-पीरियड वाले मध्य बैंड के नीचे टिके हुए हैं। मौजूदा समय में भाव बोलिंजर बैंड की निचली सीमा के करीब सरक रहा है, जो 1.3140 के करीब स्थित है। वहीं 14-पीरियड का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 33.20 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के ठीक ऊपर मंडरा रहा है। लाइव तकनीकी आंकड़ों में 14-दिवसीय आरएसआई 34 के स्तर पर दिख रहा है, जिससे यह साफ होता है कि गिरावट की गति अभी भी प्रभावी है, हालांकि यह थकावट के करीब भी पहुंच सकती है। इसके अलावा एमएसीडी -0.01 पर सिग्नल लाइन -0.01 के मुकाबले मंदी का रुख दिखा रहा है, जबकि एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स 32 के स्तर पर एक सक्रिय ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है।
गिरावट की स्थिति में मुद्रा जोड़ी के लिए पहला तात्कालिक समर्थन 29 सितंबर के निचले स्तर 1.3202 पर देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला सहारा बोलिंजर बैंड की निचली सीमा 1.3140 के पास मिलेगा। यदि दैनिक आधार पर भाव इस स्तर के नीचे बंद होते हैं, तो फिर 20 नवंबर 2025 के निचले स्तर 1.3038 का रास्ता खुल सकता है, जिसके बाद 1.3000 का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर परीक्षण के दायरे में आएगा। दूसरी ओर, यदि बाजार में सुधार देखने को मिलता है, तो शुरुआती प्रतिरोध 30 सितंबर के उच्च स्तर 1.3311 पर स्थित है। इसके ऊपर निकलने पर बोलिंजर बैंड का मध्य स्तर 1.3385 और 100-दिवसीय एसएमए 1.3415 के पास रुकावट बनेगा, जबकि दूर का ऊपरी प्रतिरोध बोलिंजर बैंड की ऊपरी सीमा के पास 1.3630 पर मौजूद है। लाइव डेटा के अनुसार 20-दिवसीय समर्थन करीब 1.32 और प्रतिरोध 1.36 के पास आंका गया है।
केंद्रीय बैंकों की नीतियां और ब्याज दरों का समीकरण
मुद्रा के इस उतार-चढ़ाव के पीछे केंद्रीय बैंकों की नीतियां सबसे अहम भूमिका निभा रही हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीति निर्माता एलन टेलर ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा केवल एक बार ब्याज दर बढ़ाना कितना व्यावहारिक होगा, यह कहना कठिन है, क्योंकि इससे बाजार में आगे और दरें बढ़ने की अवांछित अटकलें शुरू हो सकती हैं। वित्तीय बाजार के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर साल के अंत तक बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से लगभग 33 आधार अंकों की मौद्रिक सख्ती और 2027 के अंत तक 100 से अधिक आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि विश्लेषकों का व्यापक अनुमान काफी सीमित कदम उठाए जाने का है।
वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी काशकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि हालिया आंकड़ों के बावजूद 3 प्रतिशत के करीब मुद्रास्फीति अभी भी बहुत अधिक है। लचीली अर्थव्यवस्था, मजबूत उपभोक्ता खर्च और नौकरियों की व्यापक उपलब्धता का हवाला देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा मौद्रिक नीति उतनी सख्त नहीं है जितनी मानी जा रही है, और न्यूट्रल दर भी ऊंची हो सकती है। उनके संदेश में इस साल एक और दर वृद्धि और 2027 में एक अन्य बढ़ोतरी की संभावना को रेखांकित किया गया है। कुल मिलाकर अमेरिकी नीति निर्माताओं का यह लहजा दिखाता है कि फेडरल रिजर्व अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि मौजूदा ब्याज दरें महंगाई को उसके लक्ष्य तक लाने के लिए पर्याप्त रूप से प्रतिबंधात्मक हैं, जिससे डॉलर को व्यापक मजबूती मिल रही है।
पाउंड स्टर्लिंग का वैश्विक महत्व और मूल्य निर्धारण के आधार
पाउंड स्टर्लिंग विश्व की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 से जुड़ा है, और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के आधार पर, यह वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है, जो रोजाना औसतन 630 अरब डॉलर के लेनदेन के साथ कुल विदेशी मुद्रा व्यापार के 12 प्रतिशत हिस्से को संभालती है। इसके प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में पाउंड और अमेरिकी डॉलर शामिल है, जिसे ट्रेडरों की भाषा में 'केबल' कहा जाता है और यह विदेशी मुद्रा बाजार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा पाउंड और जापानी येन, जिसे ट्रेडर 'ड्रैगन' कहते हैं, 3 प्रतिशत और यूरो तथा पाउंड की जोड़ी 2 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है। पाउंड स्टर्लिंग को जारी करने का दायित्व बैंक ऑफ इंग्लैंड संभालता है।
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। बैंक अपने निर्णय इस आधार पर लेता है कि क्या उसने 2 प्रतिशत के स्थिर मुद्रास्फीति दर के अपने प्राथमिक मूल्य स्थिरता लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इसके लिए ब्याज दरों में फेरबदल उसका मुख्य साधन होता है। जब महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में इजाफा करता है, जिससे आम लोगों और कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। सामान्य तौर पर यह पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक निवेशक ब्रिटेन के वित्तीय बाजारों में निवेश करना अधिक आकर्षक पाते हैं। इसके विपरीत जब मुद्रास्फीति अत्यधिक नीचे आ जाती है, तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत माना जाता है, और ऐसी स्थिति में बैंक दरों में कटौती करता है ताकि सस्ता कर्ज मिलने पर कारोबार निवेश बढ़ा सकें।
आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन की भूमिका
ब्रिटेन के आर्थिक स्वास्थ्य को मापने वाले आंकड़े भी पाउंड की दिशा तय करने में गहरी भूमिका निभाते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई आंकड़े और रोजगार की स्थिति जैसे सूचक पाउंड के उतार-चढ़ाव को सीधे प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड के लिए बेहद अनुकूल होती है, क्योंकि यह न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं, तो पाउंड में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा व्यापार संतुलन भी मुद्रा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आंकड़ा होता है। यह सूचक किसी तय अवधि के दौरान किसी देश द्वारा निर्यात से कमाए गए धन और आयात पर खर्च किए गए धन के बीच के अंतर को मापता है। यदि कोई देश ऐसी वस्तुओं का उत्पादन करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग है, तो विदेशी खरीदारों की ओर से उन सामानों की खरीद के लिए की जाने वाली मांग सीधे तौर पर उस देश की मुद्रा को मजबूती देती है। इस प्रकार, सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत प्रदान करता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन उसके मूल्य को कमजोर करता है।
वैश्विक बाजारों और अन्य मुद्राओं का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार के व्यापक परिदृश्य पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा गया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी दो महीने के निचले स्तर के पास लगभग 0.6900 के मध्य क्षेत्र में कंसोलिडेट कर रही है। हालांकि अमेरिकी पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की उम्मीदों को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन कच्चे तेल के कारण बढ़ती महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचा बनाए रखा है। इस बीच ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिसका मुद्रा जोड़ी पर सीमित असर हुआ।
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी गुरुवार को 158.00 के ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर बनी रही। तेल से उपजे मुद्रास्फीति के जोखिमों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बने तनाव ने सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को समर्थन दिया है। इस व्यापक डॉलर मजबूती ने बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख की उम्मीदों और जापानी हस्तक्षेप के खतरों को बेअसर कर दिया है। कमोडिटी बाजार में सोने के भाव एशियाई सत्र में 4,139 डॉलर प्रति औंस के करीब खरीदारों को आकर्षित करते दिखे, जिससे पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से आई गिरावट पर विराम लगा। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते बिना ब्याज वाली इस पीली धातु की बढ़त सीमित रहने की संभावना है। डिजिटल एसेट बाजार में हाइपरलिक्विड यानी एचवाईपीई 2 प्रतिशत गिरकर कारोबार कर रहा था, जहां पिछले दिन 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, लेकिन बुधवार को 50 लाख डॉलर के संस्थागत आउटफ्लो ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और इसका भाव 90 डॉलर के नीचे बना रहा। वहीं यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने निचले स्तर 1.1312 पर आ गई है, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है, हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के ताजा झटके यूरो को कुछ सहारा दे सकते हैं।


















