अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की एकतरफा मजबूती के चलते साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो पर बिकवाली का गहरा दबाव देखा जा रहा है। गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.16 प्रतिशत कमजोर होकर लगभग 1.1310 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई जोरदार तेजी ने डॉलर को व्यापक समर्थन दिया है, जिससे प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में ग्रीनबैक लगातार बढ़त बनाए हुए है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूरो 1.1300 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलता है, तो मौजूदा गिरावट और ज्यादा तीव्र हो सकती है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड दो दशक के शिखर पर, डॉलर इंडेक्स में मजबूती
अमेरिकी डॉलर की ताजा रैली के पीछे मुख्य चालक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया जबरदस्त उछाल है। 10-वर्षीय यूएस ट्रेजरी यील्ड उछलकर 5.30 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है, जो पिछले दो दशकों में देखा गया इसका सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश और निश्चित रिटर्न की चाहत रखने वाले वैश्विक निवेशक अमेरिकी यील्ड में इस विस्तार की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। दूसरी ओर, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक बास्केट के मुकाबले डॉलर के मूल्य का आकलन करने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) अपने सालाना उच्च स्तर 101.80 के करीब मजबूती से टिका हुआ है।
दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में यह तेजी उस समय देखने को मिली है जब पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने अगस्त महीने में मूल्य दबावों में मध्यम वृद्धि के संकेत दिए थे। आमतौर पर मुद्रास्फीति में नरमी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आक्रामकता को कम करती है, लेकिन ऊर्जा बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने बॉन्ड यील्ड को लगातार ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है। डॉलर की मजबूती का आलम यह रहा कि इसने जापानी येन के मुकाबले सबसे जोरदार प्रदर्शन दर्ज किया।
जर्मन मुद्रास्फीति के मजबूत आंकड़े भी नहीं दिला सके यूरो को सहारा
यूरोपीय मोर्चे पर देखें तो यूरो को स्थानीय स्तर पर आने वाले सकारात्मक आंकड़ों से भी अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। सितंबर महीने के लिए जर्मनी के हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (HICP) के प्रारंभिक आंकड़े उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत दर्ज किए गए थे। सामान्य परिस्थितियों में अधिक महंगाई केंद्रीय बैंक को दरें ऊंची रखने पर विवश करती है, जो संबंधित मुद्रा को ताकत प्रदान करती है। हालांकि, मौजूदा व्यापक वैश्विक माहौल में इस सकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद यूरो में कोई सार्थक तेजी नहीं आ सकी और यह दबाव में ही बना रहा। अब बाजार के प्रतिभागियों की निगाहें शुक्रवार को जारी होने वाले संपूर्ण यूरोज़ोन के सितंबर HICP मुद्रास्फीति आंकड़ों पर टिकी हैं।
विश्लेषकों का आकलन है कि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई नया झटका यूरो के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। यह मुद्रा जोड़ी मई 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर तक गिर चुकी है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई थी, जो कि जनवरी के इसके 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में यह निरंतर गिरावट दरअसल तीन बड़े कारकों का सम्मिलित परिणाम है: पहला अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, दूसरा वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, और तीसरा महंगे ऊर्जा स्रोतों के प्रति यूरोप की निरंतर संवेदनशीलता।
तकनीकी परिदृश्य और प्रमुख मूल्य स्तर
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से EUR/USD जोड़ी के लिए आगे का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। ऊपर की ओर, 24 जून का निचला स्तर यानी 1.1325 तत्काल प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है। इसके बाद 20-पीरियड का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 1.1448 पर स्थित है, जो सुधारात्मक उछाल के सामने पहली गंभीर बाधा बनकर खड़ा है। मंदी के मौजूदा दबाव को कम करने के लिए किसी भी रिकवरी को इस स्तर को पार करना बेहद जरूरी होगा।
वहीं नीचे की ओर, गिरावट का दबाव तब और गहरा सकता है जब यह जोड़ी 1.1300 के स्तर को तोड़ देगी। इस स्तर के नीचे 1.1200 का स्तर अगला सबसे बड़ा तकनीकी समर्थन क्षेत्र माना जा रहा है। लाइव बाजार संकेतकों के आधार पर 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 21 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत देता है। इसके अलावा मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -0.01 पर मंदी का संकेत बनाए हुए है। 20-दिन का मूविंग एवरेज 1.15 पर, 50-दिन का मूविंग एवरेज 1.15 पर और 200-दिन का मूविंग एवरेज 1.16 पर स्थित है, जिसमें 50-दिन का औसत 200-दिन के नीचे आकर डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शा रहा है, जो लंबे समय के डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। औसत ट्रू रेंज (ATR) 0.01 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में देखा जाता है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का प्रभाव
विदेशी मुद्रा बाजार में दिशा तय करने में अमेरिका के आर्थिक आंकड़े हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस द्वारा जीडीपी रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े पर्सनल स्पेंडिंग और पर्सनल इनकम में मासिक बदलावों के साथ जारी किए जाते हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के नीति निर्माता कोर PCE प्राइस इंडेक्स के वार्षिक आंकड़ों को मुद्रास्फीति का अपना प्राथमिक पैमाना मानते हैं, क्योंकि यह खाद्य और ऊर्जा की अत्यधिक अस्थिर कीमतों को शामिल नहीं करता।
यदि कोर PCE के आंकड़े अनुमान से अधिक मजबूत आते हैं, तो यह फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के दृष्टिकोण को सख्त बनाए रखने का संकेत देता है, जिससे अमेरिकी डॉलर अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर प्रदर्शन करता है। इसके विपरीत, आंकड़ों में नरमी डॉलर पर दबाव ला सकती है। हालिया आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि के दांव को कुछ हद तक संयमित तो किया है, लेकिन बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने डॉलर के पक्ष में माहौल बनाए रखा है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं, सोने और डिजिटल संपत्तियों का हाल
डॉलर के इस प्रभुत्व का असर केवल यूरो तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक परिसंपत्तियों में भी यही रुझान दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान दो महीने के निचले स्तर के पास 0.6900 के मध्य क्षेत्र में कंसोलिडेट करता नजर आया। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीमित असर पड़ा और डॉलर की मजबूती हावी रही।
उधर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर टिका रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की दरों में वृद्धि की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका व ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने सेफ-हेवन के रूप में डॉलर को मजबूती दी।
सोने के बाजार में एशियाई सत्र के दौरान 4,139 डॉलर के क्षेत्र में खरीदारों ने कुछ दिलचस्पी दिखाई, जिससे पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से शुरू हुआ पुलबैक थमता दिखा। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी गैर-उपज वाली पीली धातु की किसी भी बड़ी बढ़त पर लगाम लगाए हुए है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र में हाइपरलिक्विड (HYPE) गुरुवार को 2 प्रतिशत टूटकर पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त को गंवाता दिखा, क्योंकि बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की निकासी के चलते संस्थागत मांग कमजोर रही और कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित बनी रही।





















