अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर एक बार फिर नई ऊंचाई छूने की ओर अग्रसर है, जिसका सीधा असर स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं पर देखा जा रहा है। सोमवार के कारोबारी सत्र में यूएसडी/सीएचएफ (USD/CHF) मुद्रा जोड़ी ने पिछले दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त हासिल की। यह तेजी ऐसे समय में दर्ज की गई है जब हालिया कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं में कमी देखी जा रही थी। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर अपने सालाना उच्चतम स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है, जिसे मुख्य रूप से यूरो में आई भारी बिकवाली और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में जारी उछाल से बड़ा सहारा मिला है।
मुद्रा बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूएसडी/सीएचएफ विनिमय दर 0.8316 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। हालांकि यह स्तर पिछले सप्ताह दर्ज किए गए 0.8382 के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे है, जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज हुआ था, लेकिन बाजार में डॉलर का दबदबा स्पष्ट रूप से बना हुआ है। इस जोड़ी में आने वाली चाल यह दर्शाती है कि अल्पकालिक नीतिगत बदलावों की उम्मीदों के मुकाबले व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक दबाव और यील्ड का अंतर अधिक प्रभावी साबित हो रहा है।
महंगाई की चिंताएं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का असर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती अभी भी बनी हुई है। फेड नीति निर्माताओं ने स्पष्ट कर रखा है कि वे मुद्रास्फीति को 2% के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से पैदा होने वाले मूल्य दबाव ने केंद्रीय बैंक के इस कार्य को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे इस वर्ष के उत्तरार्ध में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बाजार में पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
इसी नीतिगत रुख के परिणामस्वरूप, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तरों के करीब बनी हुई है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.30% के आसपास स्थिर है, जो पिछले सप्ताह 5.34% के उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। 5.34% का यह स्तर वर्ष 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला यह असाधारण रिटर्न निवेशकों की पूंजी को लगातार डॉलर की तरफ आकर्षित कर रहा है, जिससे ग्रीनबैक को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिल रही है।
स्विस फ्रैंक का सुरक्षित निवेश रुख और स्विट्जरलैंड की चुनौतियां
दूसरी तरफ, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में राजकोषीय चुनौतियों तथा बढ़ते कर्ज संकट ने निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के रूप में स्विस फ्रैंक (CHF) की मांग को बनाए रखा है। स्विट्जरलैंड की मजबूत वित्तीय स्थिति, अनुशासित बजट और तुलनात्मक रूप से कम कर्ज का बोझ उसकी मुद्रा को अनिश्चित वैश्विक माहौल में सहारा प्रदान करते हैं।
हालांकि, स्विस फ्रैंक की इस मांग के सामने कुछ बड़ी बाधाएं भी मौजूद हैं। अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्विट्जरलैंड का बड़ा ब्याज दर अंतर स्विस फ्रैंक की बढ़त को सीमित करता है। इसके अतिरिक्त, स्विट्जरलैंड का केंद्रीय बैंक यानी स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) मुद्रा बाजार में अत्यधिक मजबूती को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार रहता है। यह नीतिगत रुख निवेशकों को फ्रैंक में अत्यधिक आक्रामक दांव लगाने से रोकता है और मुद्रा के लिए एक नकारात्मक कारक साबित होता है।
अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्थिति और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक मुद्रा के रूप में स्वीकार किया जाता है। वर्ष 2022 के वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, यह दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88% से अधिक हिस्सेदारी रखती है और जिसका दैनिक लेनदेन औसतन $6.6 ट्रिलियन है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा के रूप में स्थान लिया था। 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते की समाप्ति तक अमेरिकी डॉलर का मूल्य सोने से जुड़ा हुआ था, जिसके बाद गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हो गया।
डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेड के दो मुख्य अधिदेश हैं: पहला मूल्य स्थिरता प्राप्त करना और दूसरा अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेड का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को समायोजित करना है। जब मुद्रास्फीति फेड के 2% लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2% से नीचे आती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर में कमजोरी आती है।
गंभीर वित्तीय संकटों के दौरान फेडरल रिजर्व नोट छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) की प्रक्रिया भी अपना सकता है। यह एक गैर-मानक नीति उपाय है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब बैंकों के आपसी अविश्वास के कारण वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट प्रवाह रुक जाता है। वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के दौरान फेड ने बड़े पैमाने पर सरकारी बॉन्ड खरीदकर वित्तीय संस्थानों को तरलता दी थी, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) के तहत फेड बॉन्ड खरीदना बंद करता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि को पुनः निवेश नहीं करता, जो आमतौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति
डॉलर के इस व्यापक उछाल का प्रभाव अन्य प्रमुख परिसंपत्ति वर्गों और विनिमय दरों पर भी स्पष्ट दिखा
- ऑस्ट्रेलियन डॉलर (AUD/USD): मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की मजबूती के कारण ऑस्ट्रेलियन डॉलर में नई बिकवाली देखी गई और एशियाई कारोबार में यह टूटकर 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गया। बाजार का ध्यान अब तेल की कीमतों, ट्रेजरी यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) की नीतिगत उम्मीदों पर केंद्रित है।
- जापानी येन (USD/JPY): डॉलर/येन ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा दरों में संभावित बढ़ोतरी के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं येन की गिरावट को सीमित कर सकती हैं।
- सोना: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। धातु ने अपनी शुरुआती बढ़त का अधिकांश हिस्सा गंवा दिया और यह फेड की दरों को लेकर बनी अनिश्चितता तथा ऊंची अमेरिकी यील्ड के बीच फंसी नजर आई।
- क्रिप्टोकरेंसी बाजार: प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन सीमित दायरे में कारोबार करते हुए $86,000 के स्तर से ऊपर बनी हुई है। वहीं अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों में सकारात्मक रुझान देखा गया, जहां एथेरियम चढ़कर $2,700 से ऊपर पहुंच गया और रिपल $1.52 के ऊपर स्थिर रहा।
- यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) की दुविधा: यूरोप में मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी होने के बावजूद ईसीबी के लिए ब्याज दरें बढ़ाना आसान नहीं रह गया है। बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रहा है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के सामने जटिल नीतिगत असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

















