भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र भारी विदेशी निवेश के लिहाज से बेहद अहम साबित हुआ। बुधवार, 4 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू इक्विटी बाजार में जोरदार वापसी करते हुए कैश सेगमेंट में ₹7,284.03 करोड़ की शुद्ध खरीदारी दर्ज की। दैनिक स्तर पर देखा जाए तो यह पिछले 12 महीने से भी अधिक समय में विदेशी पूंजी का सबसे बड़ा शुद्ध प्रवाह माना जा रहा है। इस आक्रामक इनफ्लो से बाजार की धारणा में नया उत्साह लौट आया और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में मजबूती के साथ बंद हुए।
12 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंची विदेशी पूंजी
विदेशी निवेशकों द्वारा की गई यह भारी खरीदारी एक लंबे अंतराल के बाद देखने को मिली है। इससे पहले विदेशी निवेशकों ने 28 अक्टूबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में करीब ₹10,340 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया था। उसके बाद से यह पहला मौका है जब दैनिक नेट खरीदारी का आंकड़ा ₹7,200 करोड़ के स्तर को पार कर गया है। जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक कैश मार्केट में पूंजी लगाते हैं, तो इसका सीधा अर्थ यह होता है कि उन्होंने डेरिवेटिव्स जैसे फ्यूचर और ऑप्शन के बजाय कंपनियों के वास्तविक शेयर सीधे अपने खाते में खरीदे हैं। यह तरीका अल्पकालिक सट्टेबाजी के बजाय वास्तविक डिलीवरी आधारित निवेश को दर्शाता है।
शेयर बाजारों के आंकड़े और सूचकांकों की तेजी
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और मेट्रोपोलिटन स्टॉक एक्सचेंज के एकीकृत आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की कुल खरीदारी गतिविधि काफी व्यापक रही। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने ₹21,607.38 करोड़ मूल्य के शेयर खरीदे। इसके मुकाबले उनकी कुल बिकवाली ₹14,323.35 करोड़ दर्ज की गई, जिससे शुद्ध इनफ्लो ₹7,284.03 करोड़ पर पहुंच गया। विदेशी निवेश की इस मजबूत लहर के दम पर बेंचमार्क सेंसेक्स 383 अंक चढ़कर 77,301.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 149 अंक की बढ़त लेकर 23,960.60 के स्तर पर पहुंच गया।
घरेलू निवेशकों का रुख और बाजार विश्लेषकों की राय
विदेशी निवेशकों के भारी उत्साह के उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बुधवार के सत्र में मुनाफावसूली का रास्ता चुना। घरेलू निवेशकों ने कैश मार्केट में ₹3,712.23 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। पूरे दिन में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹16,392.82 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि उनकी कुल बिक्री ₹20,105.05 करोड़ रही। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों का इतनी बड़ी मात्रा में कैश मार्केट की ओर लौटना भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट सेक्टर के बुनियादी ढाँचे पर उनके दोबारा मजबूत होते भरोसे को दर्शाता है।



















