अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को अमेरिकी डॉलर में चौतरफा बिकवाली देखी गई, जिसका सीधा फायदा ब्रिटिश पाउंड सहित दुनिया की प्रमुख मुद्राओं को मिला। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों ने वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध के आसार बढ़ा दिए हैं। इस वजह से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स सितंबर के अंत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक गिर गया। इस बदलते परिदृश्य में ब्रिटिश पाउंड (GBP) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 1.3480 के स्तर की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
ब्रिटिश पाउंड में मजबूत तेजी और अहम तकनीकी स्तर
यूनाइटेड ओवरसीज बैंक (UOB) के विश्लेषक क्वेक सेर लियांग और ली सू एन के अनुसार, हालिया बढ़त के बाद GBP/USD में ऊपर की ओर तेज गति देखी जा रही है। इंट्राडे कारोबार के दौरान ब्रिटिश पाउंड के 1.3410 के ऊपर टिके रहने की उम्मीद है, जिसके बाद यह 1.3480 के स्तर तक चढ़ सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्तर पार होता है, तो आगे 1.3510 का स्तर एक बड़े रेजिस्टेंस के रूप में सामने आएगा।
मध्यम अवधि यानी अगले 1 से 3 हफ्तों के नजरिए पर चर्चा करते हुए विश्लेषकों ने कहा,
"जब तक 1.3385 का स्तर नहीं टूटता, तब तक हमारा यही रुख बना रहेगा कि GBP 1.3480 का परीक्षण कर सकता है।"उल्लेखनीय है कि 03 नवंबर को जब स्पॉट भाव 1.3410 पर था, तब बैंक ने पाउंड पर सकारात्मक दृष्टिकोण जाहिर किया था। पहले मजबूत सपोर्ट 1.3360 पर माना जा रहा था, जिसे अब संशोधित कर 1.3385 कर दिया गया है। 1.3480 के पार जाने पर अगला प्रमुख वॉच लेवल 1.3510 होगा।
वॉशिंगटन में गतिरोध और अमेरिकी डॉलर पर गहराता दबाव
बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स भारी दबाव में आ गया। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला यह सूचकांक लुढ़ककर सितंबर के अंतिम दिनों के बाद के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इस अचानक आई गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझान हैं। प्रतिनिधि सभा (हाउस) और सीनेट दोनों में डेमोक्रेट्स की जीत से वॉशिंगटन में सत्ता संतुलन और नीतिगत फैसलों में गतिरोध की आशंका गहरी हो गई है।
राजनीतिक अनिश्चितता के गहराने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों का रुख किया है। इस सुरक्षित पनाहगाह मांग ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट पैदा कर दी। बॉन्ड यील्ड में आई इस कमी ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया, जिससे ग्रीनबैक पर चौतरफा बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
डॉलर की कमजोरी का व्यापक असर अन्य करेंसी जोड़ियों पर भी साफ दिखाई दिया। USD/JPY बुधवार को एशियाई सत्र में तेज बिकवाली की चपेट में आ गया और 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी डॉलर के एक महीने के निचले स्तर पर जाने और बॉन्ड यील्ड के टूटने से जापानी येन में जोरदार रिकवरी देखी गई। राजनीतिक असमंजस के बीच निवेशकों द्वारा येन में सुरक्षित ठिकाना तलाशने से डॉलर लगातार कमजोर होता चला गया।
वहीं दूसरी तरफ AUD/USD दो सप्ताह के निचले स्तर के ऊपर स्थिर बना रहा और एशियाई सत्र में 0.6965 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि डॉलर की भारी कमजोरी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रही थी, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम सख्त यानी कम हॉकिश रुख ने ऑस्ट्रेलियाई करेंसी की बढ़त की रफ्तार को सीमित कर दिया। इस वजह से इसमें पाउंड जैसी एकतरफा छलांग देखने को नहीं मिली।
सोने की कीमतों में भारी उछाल, $4,000 के पार कारोबार
मुद्रा बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी बड़ा फेरबदल हुआ। डॉलर में गिरावट और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के दम पर सोने ने अपनी मजबूत इंट्राडे बढ़त बरकरार रखी और यह अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब पहुंच गया। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में सोना $4,000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक आंकड़े से काफी ऊपर सहजता से कारोबार कर रहा था।
संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के मजबूत प्रदर्शन से बने राजनीतिक हालात और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर बने दबाव ने पीली धातु को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान की है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि डॉलर की कमजोरी आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक लिक्विडिटी और मुद्रा विनिमय दरों की दिशा तय करने वाली है।
















