वैश्विक वित्तीय बाजारों में उस समय एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया जब अमरीकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड उछलकर 4.80% के स्तर पर पहुंच गई। बॉन्ड बाजार में आई इस भारी बिकवाली और अमरीकी फेडरल रिजर्व (Fed) की ओर से ब्याज दरें बढ़ाये जाने की गहराती आशंकाओं के कारण अमरीकी डॉलर (USD) को जबरदस्त मजबूती मिली है, जबकि इंडोनेशियाई रुपिया (IDR) दबाव में आकर लगातार टूट रहा है। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड का 2025 की शुरुआत के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचना यह दर्शाता है कि निवेशक इस समय जोखिम भरे परिसंपत्तियों से दूर भाग रहे हैं। इसके साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को भी भड़का दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
इंडोनेशिया में खाद्य महंगाई और कोर इन्फ्लेशन का बढ़ता दबाव
एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर डॉलर की मजबूती इंडोनेशियाई रुपिया पर दबाव डाल रही है, वहीं देश के घरेलू मोर्चे पर भी आर्थिक चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अगस्त महीने के दौरान इंडोनेशिया में महंगाई दर में तेज तेजी दर्ज की गई है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में उछाल आया है, जो जुलाई के तीन महीने के निचले स्तर से काफी ऊपर निकल गया है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि देश की कोर इन्फ्लेशन (मूल मुद्रास्फीति) मार्च 2023 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई और कमजोर होते रुपिया के इस दोहरे संकट ने इंडोनेशियाई केंद्रीय बैंक के सामने एक नया मौद्रिक धर्मसंकट खड़ा कर दिया है।
बॉन्ड बाजार और अमरीकी ट्रेजरी सचिव के कदमों पर विश्लेषकों की नजर
वैश्विक वित्तीय संस्था ING के विश्लेषकों ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों का पूरा ध्यान फिलहाल अमरीकी बॉन्ड बाजार के लंबे समय वाले मैच्योरिटी वक्र (long end of the curve) पर टिका हुआ है। ING के विश्लेषक फ्रांसिस्को पेसोले का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में राजकोषीय अनुशासन की कमी का खामियाजा अब बॉन्ड बाजार को भुगतना पड़ रहा है। बाजार प्रतिभागी इस बात की आशंका जता रहे हैं कि ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट बॉन्ड बाजार को सहारा देने के लिए अपने वित्तीय साधनों के बड़े पिटारे का फिर से सहारा ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में, कई संस्थागत निवेशक डॉलर के अवमूल्यन (dollar debasement) से बचने के लिए USD/CHF जैसी सुरक्षित मुद्रा जोड़ियों की ओर रुख कर सकते हैं।
वित्तीय बाजारों की भाषा: 'रिस्क-ऑन' बनाम 'रिस्क-ऑफ' का चक्र
बाजार के इस मौजूदा रुख को गहराई से समझने के लिए 'रिस्क-ऑन' (risk-on) और 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) की अवधारणा को जानना आवश्यक है। जब वित्तीय बाजारों में 'रिस्क-ऑन' का माहौल होता है, तब निवेशक भविष्य के आर्थिक परिदृश्य को लेकर आशान्वित रहते हैं और अधिक रिटर्न पाने के लिए जोखिम भरे एसेट्स में पूंजी लगाते हैं। ऐसे दौर में शेयर बाजार तेजी से ऊपर जाते हैं, सोने (Gold) को छोड़कर अन्य सभी कमोडिटीज़ के दाम बढ़ते हैं, और कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं। साथ ही क्रिप्टो एसेट्स में भी बड़ी तेजी देखने को मिलती है।
इसके विपरीत, जब बाजार में 'रिस्क-ऑफ' की स्थिति बनती है, जैसा कि इस समय देखा जा रहा है, तब निवेशक घबराकर सुरक्षित ठिकानों (safe-havens) की ओर भागते हैं। इस अवधि में निवेशक कम जोखिम वाले और निश्चित रिटर्न देने वाले वित्तीय साधनों को तरजीह देते हैं। रिस्क-ऑफ के माहौल में सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ जाती है, सोने में चमक लौट आती है, और अमरीकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) तथा स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं काफी मजबूत हो जाती हैं।
विभिन्न वैश्विक मुद्राओं पर रिस्क पैटर्न का असर
विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की बनावट के आधार पर उनका मुद्रा बाजार रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ के चक्र से प्रभावित होता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी छोटी मुद्राएं रिस्क-ऑन माहौल में मजबूत होती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं कच्चे माल और कमोडिटी के निर्यात पर अत्यधिक निर्भर हैं, और आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद से कमोडिटी मांग बढ़ती है।
दूसरी ओर, रिस्क-ऑफ दौर में अमरीकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) सबसे ज्यादा लाभ कमाते हैं। अमरीकी डॉलर को दुनिया की वैश्विक रिजर्व मुद्रा होने और अमरीकी सरकारी कर्ज को सबसे सुरक्षित मानने का फायदा मिलता है। जापानी येन इसलिए मजबूत होता है क्योंकि जापान के सरकारी बॉन्ड का बड़ा हिस्सा वहां के घरेलू निवेशकों के पास है, जो संकट के समय भी बिकवाली नहीं करते। वहीं, स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून निवेशकों की पूंजी को बेहतरीन सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे स्विस फ्रैंक की मांग बढ़ जाती है।
प्रमुख मुद्रा जोड़ियों का हाल: GBP/USD और EUR/USD में गिरावट
वैश्विक तनाव और फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने के दांव से प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में GBP/USD की जोड़ी गिरकर 1.3500 के स्तर के करीब आ गई। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमरीकी डॉलर की मांग ब्रिटिश पाउंड की तुलना में अधिक बनी हुई है। बाजार प्रतिभागियों की नजर अब शुक्रवार को आने वाली अमरीकी अगस्त गैर-कृषि रोजगार (jobs report) रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
इसी तरह, EUR/USD पर भी मंदी का दबाव साफ नजर आ रहा है। मंगलवार को गिरावट के साथ बंद होने के बाद, यह जोड़ी बुधवार को अपने दो सप्ताह के निचले स्तर 1.1600 के नीचे कारोबार कर रही है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष गहराने और फेड द्वारा और अधिक सख्त मौद्रिक नीति अपनाने (hawkish repricing) की उम्मीदों ने यूरो को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। कारोबारी दिन में आगे आने वाले अमरीकी निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों का बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
कमोडिटी बाजार: सोना, डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और डीजल क्रैक स्प्रेड
कमोडिटी बाजार में सोने (Gold) ने चार सप्ताह के निचले स्तर से मामूली वापसी की है और यूरोपीय सत्र की ओर बढ़ते हुए यह $4,320 प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रहा है। हालांकि, डॉलर में आई हल्की नरमी से सोने को सहारा मिला है, लेकिन फेड की सख्त दरों की आशंका के कारण इसमें बड़ी तेजी सीमित नजर आ रही है। उधर, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल लगातार तीसरे दिन और पिछले छह में से पांचवें दिन मजबूत होकर 24 जुलाई के बाद के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में सबसे चौंकाने वाला रुझान डीजल बाजार से आ रहा है। जहां कच्चा तेल ऊपरी तौर पर शांत दिख रहा है, वहीं अमरीका का डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI वायदा के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर $102.00 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह उछाल वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा लागतों को लेकर गहराती चिंताओं को उजागर करता है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कमजोरी के संकेत: BTC, ETH और XRP
अगस्त के महीने में जबरदस्त बढ़त दर्ज करने के बाद, प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में अब कमजोरी के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं। बिटकॉइन (BTC), एथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) तीनों ही तकनीकी रूप से मंदी के दबाव का सामना कर रहे हैं। तकनीकी संकेतकों के अनुसार, अगस्त की रिकॉर्ड तेजी के बाद अब इन डिजिटल एसेट्स में मोमेंटम कमजोर हो रहा है।
बिटकॉइन (BTC) के चार्ट पर मंदी के शुरुआती संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं। वहीं, एथेरियम (ETH) $2,500 के स्तर के पास रिजेक्ट होने के बाद अपनी गिरावट को और बढ़ा चुका है। दूसरी ओर, रिपल (XRP) अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के नीचे समेकित (consolidate) हो रहा है, जिससे क्रिप्टो निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। पूरे वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में अनिश्चितता के कारण क्रिप्टो बाजार में अल्पावधि में बिकवाली का दौर हावी रह सकता है।



















