वैश्विक व्यापारिक संबंधों में तनाव एक बार फिर गहराने लगा है। अमेरिका द्वारा लागू किए गए ओवरकैपेसिटी टैरिफ पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी कदमों पर लगातार नजर बनाए हुए है। चीन ने चेतावनी दी है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इस व्यापारिक खींचातान के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जहां निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक के भावी रुख का इंतजार कर रहे हैं।
चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव में नया मोड़
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने हालिया बयान में कहा कि बीजिंग प्रशासन अमेरिकी पक्ष द्वारा उठाए जाने वाले अनुवर्ती कदमों का व्यापक मूल्यांकन कर रहा है। प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका के व्यापारिक फैसलों और ओवरकैपेसिटी से जुड़े शुल्कों पर चीन की पैनी नजर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और व्यापारिक जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक कमोडिटी और मुद्रा बाजारों में निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है।
रिस्क-ऑन बाजार की कार्यप्रणाली और एसेट क्लास पर प्रभाव
वित्तीय बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को समझने के लिए रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ शब्दावली का व्यापक उपयोग किया जाता है। जब बाजार में रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तब निवेशक वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर आशान्वित रहते हैं। ऐसे समय में निवेशक उच्च रिटर्न हासिल करने के उद्देश्य से अधिक जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी लगाते हैं।
रिस्क-ऑन चरण के दौरान आमतौर पर शेयर बाजारों में तेजी देखी जाती है। सोने को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख कमोडिटीज और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जाती है, क्योंकि मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कारण औद्योगिक मांग बढ़ने की संभावना होती है। इसके अतिरिक्त, जिन देशों की अर्थव्यवस्थाएं कच्चे माल के निर्यात पर निर्भर हैं, उनकी मुद्राओं में मजबूती आती है। इस माहौल में क्रिप्टो बाजार में भी तेजी का रुख देखने को मिलता है।
कच्चे माल के निर्यात पर आधारित अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), और न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ उभरते बाजारों की मुद्राएं जैसे रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) रिस्क-ऑन स्थिति में मजबूत होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वैश्विक निर्माण और औद्योगिक उत्पादन बढ़ने से इन देशों के संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ती है।
रिस्क-ऑफ माहौल में सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुझान
इसके विपरीत, जब वैश्विक अनिश्चितता, व्यापारिक युद्ध या आर्थिक मंदी की चिंताएं बढ़ती हैं, तब बाजार में रिस्क-ऑफ की स्थिति उत्पन्न होती है। इस दौरान निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, भले ही उनमें मिलने वाला रिटर्न सीमित हो।
रिस्क-ऑफ चरण में मुख्य सरकारी बॉन्ड्स की कीमतों में तेजी आती है और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक बढ़ जाती है। मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY), और स्विस फ्रैंक (CHF) को सेफ-हेवन माना जाता है। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी होने का लाभ मिलता है, क्योंकि संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी कर्ज पत्र खरीदते हैं। जापानी येन को इसलिए मजबूती मिलती है क्योंकि जापान के अधिकांश बॉन्ड्स घरेलू निवेशकों के पास होते हैं जो संकट में भी बिकवाली नहीं करते। वहीं स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून और पूंजी सुरक्षा नियम स्विस फ्रैंक को निवेशकों का पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बनाते हैं।
फॉरेक्स बाजार में प्रमुख करेंसी पेयर्स का हालिया रुख
वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों के बीच प्रमुख मुद्रा जोड़ों में मिला-जुला कारोबार देखा जा रहा है। GBP/USD यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अपने साप्ताहिक निचले स्तर के करीब 1.3600 के आंकड़े से नीचे बना हुआ है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के आगामी संबोधन से पहले निवेशकों द्वारा सतर्कता बरतने के कारण इस करेंसी पेयर की गिरावट को सहारा मिला है।
दूसरी ओर, EUR/USD 1.1650 के दायरे में मजबूती से टिका हुआ है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने की उम्मीदों के कारण यूरो को समर्थन मिल रहा है, जबकि अमेरिकी मुद्रास्फीति के PCE आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। बाजार प्रतिभागी मध्य पूर्व के घटनाक्रमों और अमेरिकी जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़ों पर भी करीबी नजर रख रहे हैं।
फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के जैक्सन होल संबोधन पर नजरें
वित्तीय जगत की नजरें अब शुक्रवार को आयोजित होने वाले जैक्सन होल सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श अपना पहला औपचारिक संबोधन देने जा रहे हैं। फेड अध्यक्ष के इस भाषण से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों में किस प्रकार का बदलाव करेगा। निवेशक केवल सितंबर की नीतिगत बैठक के फैसले का ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि के मौद्रिक दृष्टिकोण का भी आंकलन करने की कोशिश कर रहे हैं।



















