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चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा, 54 डॉलर के नीचे फिसलकर 11 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंचे दामबाज़ार
27 अक्तू॰ 2026, 8:55 am (23 मिनट पहले)· 0

चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा, 54 डॉलर के नीचे फिसलकर 11 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंचे दाम

वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतें 54 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसलकर लगभग 11 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं। कच्चे तेल में कमजोरी, क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ताओं और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के बीच निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

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तकनीकी विश्लेषण27 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

SI अभी $53.60 पर है, जबकि EMA20 $57.72, EMA50 $60.68 और EMA200 $67.08 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($57.72) के पास थम सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। विदेशी विनिमय बाजार में यह कीमती धातु 54 डॉलर प्रति औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुकी है और अब 11 महीने के निचले स्तरों की तरफ बढ़ती दिख रही है। ताजा कारोबारी सत्र में चांदी 53.60 डॉलर पर आ गई, जो पिछले बंद स्तर 54.11 डॉलर के मुकाबले 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निचले स्तरों पर खरीदारों की दिलचस्पी यानी बार्गेन-हंटिंग और कच्चे तेल की गिरती कीमतों के चलते कीमतों को कुछ स्थिरता मिल सकती है, लेकिन तकनीकी संकेत अब भी कमजोरी की तरफ इशारा कर रहे हैं।

भू-राजनीतिक घटनाक्रम और नरम पड़ती महंगाई की चिंताएं

मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में हालिया कूटनीतिक कदमों से ऊर्जा बाजारों में अस्थायी राहत मिली है। ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच चल रही सुरक्षा वार्ताओं के कारण निकट अवधि में महंगाई बढ़ने की आशंकाएं कुछ समय के लिए शांत हुई हैं। जब ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होती हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है। इसका सीधा असर सर्राफा बाजार पर भी पड़ता है, क्योंकि महंगाई के खिलाफ बचाव के तौर पर होने वाली खरीदारी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है।

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केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले निवेशकों में सतर्कता

वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजरें इस समय दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों पर टिकी हुई हैं। बाजार सहभागियों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और ठहराव बनाए रखेगा। इसके साथ ही यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB), बैंक ऑफ जापान (BoJ) और बैंक ऑफ कनाडा (BoC) की मौद्रिक नीति बैठकें भी कतार में हैं। दुनिया के पांच बड़े केंद्रीय बैंक इस हफ्ते अपने नीतिगत फैसलों का ऐलान करने की तैयारी में हैं। निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या वैश्विक स्तर पर ऊर्जा झटके के चलते महंगाई को काबू में रखने के लिए ऊंची ब्याज दरों का सिलसिला बना रहेगा। अमेरिकी डॉलर के लिए आगामी 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं, जहां कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई वित्तीय नीति और आगे चलकर 2027 में फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

तकनीकी स्तर और चार्ट का ढांचा

तकनीकी मोर्चे पर चांदी की दैनिक चाल को देखें तो ऊपर की ओर पहला तात्कालिक प्रतिरोध 9-दिवसीय ईएमए पर 55.74 डॉलर के स्तर पर मौजूद है। इसके बाद एक मजबूत रुकावट 50-दिवसीय ईएमए के करीब 60.74 डॉलर पर सामने आ रही है। जब तक खरीदार इन स्तरों को पार नहीं कर लेते, तब तक बाजार में मंदी का रुख हावी रहने की संभावना है। मौजूदा भाव के ठीक नीचे कोई स्पष्ट तकनीकी समर्थन स्तर तत्काल नजर नहीं आ रहा है, जिससे धातु में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।

लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, 14-दिवसीय आरएसआई 30 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र की स्थिति दर्शाता है। एमएसीडी सूचक -2.32 पर है जबकि सिग्नल लाइन -1.97 पर बनी हुई है, जिससे हिस्टोग्राम -0.35 के साथ नकारात्मक बना हुआ है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 57.72 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 60.68 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 67.08 डॉलर पर दर्ज किया गया है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 52.97 डॉलर से 62.97 डॉलर के दायरे में है, जिसका मध्य स्तर 57.97 डॉलर है। ट्रेंड की मजबूती मापने वाला एडीएक्स 35 पर ट्रेंडिंग अवस्था दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 1 और सिग्नल लाइन 2 पर है। दैनिक अस्थिरता को दर्शाने वाला एटीआर 1.23 है। निकट अवधि के लिए 20-दिवसीय समर्थन स्तर 53.56 डॉलर और प्रतिरोध 61.62 डॉलर के आसपास है। महत्वपूर्ण स्तरों में धुरी बिंदु (पिवट) 53.81 डॉलर, प्रतिरोध R1 54.07 डॉलर और R2 54.54 डॉलर पर हैं, जबकि समर्थन S1 53.34 डॉलर और S2 53.08 डॉलर पर स्थित है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी का दायरा 45.85 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है।

मुद्रा बाजार और सोने की चाल का असर

मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी हलचल देखी जा रही है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD को 0.7000 के पास निचले स्तरों पर खरीदार मिले, जिससे एक महीने के उच्च स्तर से शुरू हुई पिछले दिन की गिरावट रुक गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में दरें बढ़ाने के कयासों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, USD/JPY 157.00 के मध्य स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है, क्योंकि ऐसी अटकलें हैं कि बैंक ऑफ जापान आक्रामक दरों में बढ़ोतरी से बच सकता है।

सोने की बात करें तो एशियाई सत्र में नए बिकवाल सक्रिय हुए, जिससे पिछले दिन तीन महीने के निचले स्तर से हुई मामूली रिकवरी का कुछ हिस्सा धुल गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तीन हफ्ते के निचले स्तर से हल्के सुधार ने अमेरिकी डॉलर को अपनी बढ़त बनाए रखने में मदद की, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर असर पड़ा। हालांकि, बुधवार के एफओएमसी फैसले से पहले सोना 4,000 डॉलर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहा।

एक निवेश और औद्योगिक संपत्ति के रूप में चांदी की भूमिका

चांदी निवेशकों के बीच व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली एक कीमती धातु है। ऐतिहासिक रूप से इसका इस्तेमाल मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में होता रहा है। सोने की तुलना में कम लोकप्रिय होने के बावजूद, निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने या उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव के साधन के रूप में चांदी का रुख करते हैं। निवेशक भौतिक चांदी को सिक्कों या छड़ों के रूप में खरीद सकते हैं, या फिर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) जैसे वित्तीय साधनों के जरिए इसका व्यापार कर सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों पर नजर रखते हैं।

चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई कारकों से तय होता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी आर्थिक मंदी की आशंकाओं के समय सेफ-हेवन दर्जे के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं, हालांकि सोने की तुलना में यह प्रभाव कुछ कम होता है। चूंकि यह कोई ब्याज या रिटर्न नहीं देने वाली संपत्ति है, इसलिए कम ब्याज दरों के माहौल में इसमें बढ़त की प्रवृत्ति होती है। डॉलर आधारित मूल्य निर्धारण (XAG/USD) के कारण अमेरिकी डॉलर का व्यवहार भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मजबूत डॉलर चांदी पर लगाम लगाता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को रफ्तार देता है। इसके अलावा निवेश मांग, खनन आपूर्ति और रीसाइक्लिंग दरें भी कीमतों को प्रभावित करती हैं, खासकर तब जब चांदी खनन में सोने से कहीं अधिक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

औद्योगिक मांग भी चांदी की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चांदी की खपत काफी अधिक है, क्योंकि इसमें तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होती है। अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की गतिशीलता कीमतों में बड़ा बदलाव ला सकती है। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के बड़े औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न प्रक्रियाओं में चांदी का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में आभूषणों के लिए उपभोक्ताओं की मांग कीमतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आमतौर पर चांदी सोने की चाल का अनुसरण करती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए गोल्ड/सिल्वर रेशियो का उपयोग किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता है। एक उच्च अनुपात यह संकेत दे सकता है कि चांदी का मूल्यांकन कम है या सोना अधिक महंगा है, जबकि निम्न अनुपात इसके विपरीत स्थिति दर्शाता है।

सवाल-जवाब

चांदी की कीमतों में ताजा गिरावट का मुख्य स्तर क्या है?
चांदी की कीमतें 54.00 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसलकर 53.60 डॉलर के आसपास आ गई हैं, जो 11 महीने के निचले स्तर के करीब है।
तकनीकी रूप से चांदी के लिए अहम प्रतिरोध स्तर कौन से हैं?
ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध 9-दिवसीय ईएमए पर 55.74 डॉलर और उसके बाद मजबूत बाधा 50-दिवसीय ईएमए पर 60.74 डॉलर के करीब स्थित है।
कच्चे तेल की नरमी का चांदी पर क्या प्रभाव पड़ा है?
मध्य पूर्व में सुरक्षा वार्ताओं से कच्चे तेल में नरमी आई है, जिससे निकट अवधि में महंगाई की चिंताएं कम हुईं और बुलियन में हेजिंग की मांग घटी है।
गोल्ड/सिल्वर रेशियो का क्या महत्व है?
यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के बराबर मूल्य के लिए कितने औंस चांदी चाहिए, जिससे दोनों धातुओं का सापेक्ष मूल्यांकन तय किया जाता है।
इस सप्ताह किन केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर बाजार की नजर है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अलावा यूरोपियन सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ कनाडा सहित पांच बड़े बैंकों के नीतिगत फैसले आने वाले हैं।
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