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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव नतीजों और मध्य पूर्व तनाव के बीच 95 डॉलर पर थमा कच्चा तेलबाज़ार
4 नव॰ 2026, 2:25 pm (3 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव नतीजों और मध्य पूर्व तनाव के बीच 95 डॉलर पर थमा कच्चा तेल

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत और वाशिंगटन के रणनीतिक कदमों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर में कमजोरी और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से तेल के साथ-साथ सोने और वैश्विक मुद्राओं में तेज हलचल देखने को मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला, जहाँ अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड मामूली गिरावट के साथ यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान करीब 95.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर टिका रहा। पिछले कारोबारी सत्र में हल्की बढ़त दर्ज करने के बाद ऊर्जा बाजारों में यह सुस्ती अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की राजनीतिक उठापटक और मध्य पूर्व में जारी रणनीतिक खींचतान के बीच दर्ज की गई है। निवेशक और ऊर्जा कारोबारी अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान से जुड़े फैसलों और वाशिंगटन में सत्ता संतुलन में आए बड़े बदलाव को बेहद सतर्कता से परख रहे हैं।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका देते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव नतीजों के लिए जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों और फैसलों ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाकी बचे समय में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण रहेगा। संसद में सत्ता समीकरणों के इस बदलाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ जिंस बाजार में भी नीतियों की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी बयानों का असर

ऊर्जा बाजार पर मध्य पूर्व के सैन्य घटनाक्रमों का सीधा असर पड़ रहा है, जहाँ ईरान से जुड़े संकट में अमेरिकी नीति को लेकर परस्पर विरोधी संदेश सामने आ रहे हैं। एक तरफ सैन्य कार्रवाई जारी रहने की बातें हैं, तो दूसरी तरफ तनाव को और न बढ़ाने वाले आधिकारिक बयानों ने तेल कारोबारियों के लिए किसी एक स्पष्ट दिशा में दांव लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। अक्टूबर महीने में दर्ज की गई तेज तेजी के बाद बाजार में हालिया मुनाफावसूली और सट्टेबाजी के सौदों में कमी को जानकार पूरी तरह स्वाभाविक मान रहे हैं।

कूटनीतिक मोर्चे पर भी उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्ष मध्यस्थों द्वारा मतभेदों को पाटने के लिए पेश किए गए नए प्रस्तावों का फिलहाल मूल्यांकन कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत की इस प्रक्रिया के बीच ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संकेत दिया है कि वाशिंगटन का मौजूदा रुख अब भी असंतोषजनक बना हुआ है। सैन्य तनाव और कूटनीतिक वार्ताओं की इस अनिर्णायक स्थिति ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं जीवित रखी हैं।

संसद के बदले समीकरण और अमेरिकी डॉलर की चाल

संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी जीत के बाद नैस्डैक फ्यूचर्स और अमेरिकी डॉलर में शुरुआती स्तर पर कमजोरी दर्ज की गई। वाशिंगटन में विधायी गतिरोध की संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर इंडेक्स को सितंबर के अंत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर तक धकेल दिया। डॉलर की इस कमजोरी ने अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में ग्रीनबैक पर काफी दबाव बढ़ा दिया है।

हालांकि, बाजार के रुख में उस वक्त बेहद तेज बदलाव देखने को मिला जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताने वाले बयान सामने आए। इस राजनीतिक संकेत के बाद शेयर फ्यूचर्स और अमेरिकी डॉलर ने अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई करना शुरू कर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक संकेतों के बदलते ही अमेरिकी संपत्तियों के भाव जिस तेजी से बदलते हैं, यह घटनाक्रम उसी का एक स्पष्ट उदाहरण है।

विदेशी मुद्रा और सराफा बाजार में तेज हलचल

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की राजनीतिक अनिश्चितता और डॉलर पर बने दबाव का व्यापक असर वैश्विक मुद्रा बाजारों और सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों पर भी पड़ा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गया, क्योंकि डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया था। संसद में गतिरोध के डर से निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों का रुख किया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी मुद्रा और कमजोर हुई।

इसी प्रकार, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी एशियाई सत्र में 0.6965 के स्तर के करीब स्थिर रहा। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के कम आक्रामक रुख ने इसकी बढ़त को सीमित रखा, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कमजोर पड़ने से डॉलर को अतिरिक्त झटके लगे।

सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और पीली धातु यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी ऊपर बनी रही। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत के कारण वाशिंगटन में नीतिगत फैसलों के अटकने की आशंका ने निवेशकों को सोने की तरफ आकर्षित किया। डॉलर की व्यापक कमजोरी और बॉन्ड यील्ड पर बने दबाव ने सोने को अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के पास मजबूत आधार दिया है।

डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और उसके बुनियादी कारक

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाले कच्चे तेल के प्रमुख प्रकारों में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ WTI तीन प्रमुख बेंचमार्क में गिना जाता है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण इसे बाजार की भाषा में 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड कहा जाता है। कम सल्फर और हल्के घनत्व की वजह से इसे उच्च गुणवत्ता का तेल माना जाता है, जिसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है।

WTI तेल का उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है। ओक्लाहोमा स्थित कुशिंग डिपो को दुनिया में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और समाचारों में जब भी तेल के भावों का संदर्भ दिया जाता है, तो WTI को बेंचमार्क मानकर इसकी दरों को नियमित रूप से उद्धृत किया जाता है।

आपूर्ति, मांग और कीमतों को प्रभावित करने वाले घटक

दुनिया की किसी भी अन्य वस्तु की तरह WTI कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत रहने पर तेल की खपत और मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत वैश्विक सुस्ती मांग को घटाकर कीमतों को नीचे लाती है। युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और देशों पर लगाए गए प्रतिबंध कच्चे तेल की आपूर्ति को बाधित कर कीमतों में उछाल ला सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य का भी सीधा असर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए तेल खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता और सुलभ हो जाता है, जिससे मांग और कीमतों को सहारा मिलता है। इसके उलट मजबूत डॉलर अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए तेल को महंगा बना देता है।

इन्वेंटरी रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका

अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी API और अमेरिकी ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी EIA द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंटरी रिपोर्ट WTI तेल की कीमतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भंडारों में आने वाले बदलाव मांग और आपूर्ति के वास्तविक आंकड़ों को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दिखती है, तो यह खपत बढ़ने का संकेत होता है जिससे कीमतों में तेजी आती है, जबकि भंडार में बढ़ोतरी आपूर्ति अधिक होने का संकेत देकर कीमतों पर दबाव बनाती है।

API की रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित होती है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अपनी रिपोर्ट ठीक अगले दिन यानी बुधवार को लाती है। लगभग 75 प्रतिशत मामलों में दोनों एजेंसियों के परिणाम एक प्रतिशत के दायरे में एक समान होते हैं। हालांकि आधिकारिक सरकारी संस्था होने के कारण EIA के आंकड़ों को बाजार में अधिक भरोसेमंद माना जाता है।

इसके अलावा पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन यानी ओपेक, जो 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, अपनी साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटे में कटौती करता है, तो बाजार में आपूर्ति घटती है और तेल महंगा होता है। वहीं उत्पादन बढ़ाने पर कीमतें गिरती हैं। ओपेक+ इस समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें रूस सहित 10 गैर-ओपेक उत्पादक देश भी शामिल हैं, और उनके सामूहिक निर्णय दुनिया भर में ईंधन की लागत को गहराई से प्रभावित करते हैं।

सवाल-जवाब

डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत इस समय किस स्तर पर कारोबार कर रही है?
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड मामूली गिरावट के साथ करीब 95.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में किस पार्टी को बहुमत मिला है?
डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है।
मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को लेकर कतर ने क्या जानकारी दी है?
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार दोनों पक्ष मतभेदों को पाटने के लिए मध्यस्थों द्वारा दिए गए नए प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका के रुख पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर बताया कि वाशिंगटन की ओर से दिया गया जवाब अब भी असंतोषजनक है।
डब्ल्यूटीआई क्रूड को लाइट और स्वीट क्यों कहा जाता है?
कम घनत्व और सल्फर की बेहद कम मात्रा के कारण डब्ल्यूटीआई को लाइट और स्वीट कहा जाता है, जिससे इसे रिफाइन करना आसान होता है।
अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद सोने की क्या स्थिति रही?
डॉलर में कमजोरी और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण सोना मजबूत होकर 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है।
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