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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद डॉलर में तेज हलचल, येन की बढ़त थमीबाज़ार
4 नव॰ 2026, 2:05 pm (10 मिनट पहले)· 0

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद डॉलर में तेज हलचल, येन की बढ़त थमी

संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के कब्जे की खबरों से शुरुआती दबाव झेलने के बाद अमेरिकी डॉलर संभलने लगा है, जिसके चलते जापानी येन की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के परिणामों के बाद जबरदस्त उठापटक देखने को मिल रही है। शुरुआती दौर में तेज बिकवाली के दबाव में आने के बाद अमेरिकी डॉलर ने दोबारा वापसी की है, जिससे जापानी येन की बढ़त पर ब्रेक लग गया। सत्र के निचले स्तर 157.39 तक फिसलने के बाद USD/JPY की जोड़ी एक बार फिर 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर लौट आई है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान जब यह खबर सामने आई कि डेमोक्रेट पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी हाउस और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है, तो निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर में चौतरफा बिकवाली शुरू कर दी थी। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता के कड़े संदेश के रूप में देखा गया, जिसके कारण डॉलर सूचकांक गिरकर सितंबर के अंत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया था।

मध्यावधि चुनाव के नतीजे और वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध

बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत में जारी चुनावी आंकड़ों ने राजनीतिक अनिश्चितता को काफी बढ़ा दिया था। मतगणना के शुरुआती रुझानों और नतीजों से स्पष्ट हुआ कि डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों महत्वपूर्ण सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है, विशेषकर सीनेट में जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा था। वाशिंगटन में उत्पन्न होने वाले इस विधायी गतिरोध की संभावना ने वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी। जब सरकार और विधायिका अलग-अलग दलों के हाथ में होती हैं, तो बड़े आर्थिक फैसले, कर नीतियां और सरकारी खर्च से जुड़े कानून अटकने का जोखिम रहता है। इसी अनिश्चितता के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई, जिससे यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखा और डॉलर पर अतिरिक्त दबाव बन गया।

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मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद से डॉलर को मिला सहारा

शुरुआती झटकों के बावजूद बड़े परिप्रेक्ष्य में अमेरिकी डॉलर को देश की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद से ठोस सहारा मिल रहा है, जिससे गिरावट का दायरा सीमित रहने की संभावना है। बाजार के प्रतिभागियों की निगाहें अब जारी होने वाले यूएस एडीपी एम्प्लॉयमेंट चेंज रिपोर्ट पर टिकी हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह रिपोर्ट अक्टूबर महीने में रोजगार वृद्धि की रफ्तार में मामूली नरमी दर्शाएगी। इसके साथ ही आईएसएम सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई के आंकड़े भी सामने आने वाले हैं, जिनके मजबूत व्यावसायिक गतिविधियों के स्तर के अनुरूप रहने की उम्मीद जताई गई है। आर्थिक आंकड़ों की यह मजबूती डॉलर के निचले स्तरों पर खरीदारों को आकर्षित कर रही है, जिसके चलते करेंसी में रिवर्सल के बाद तेज रिकवरी देखने को मिली।

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर

डॉलर की मजबूती के पीछे केवल घरेलू आर्थिक आंकड़े ही नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी एक बड़ा कारक बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार अनिश्चितता के घेरे में बना हुआ है, जबकि बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की कोशिशें भी जारी हैं। चुनाव से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए थे, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे भी इस प्रकार के हमलों की संभावना को खुला रखा है। युद्ध के व्यापक रूप लेने की चिंताओं ने ब्रेंट क्रूड की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के काफी ऊपर बनाए रखा है। यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और अधिक उछलेंगी, जिससे अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित निवेश वाली संपत्ति की मांग और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की व्यवस्था और राजनीतिक गणित

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव देश की संघीय चुनावी प्रणाली का अहम हिस्सा हैं, जो किसी भी राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे समय पर आयोजित किए जाते हैं। इन चुनावों के जरिए मतदाता प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्यों का चुनाव करते हैं, जबकि सीनेट के लगभग एक-तिहाई सदस्यों के लिए मतदान होता है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और अन्य राज्य स्तरीय तथा स्थानीय अधिकारियों का चुनाव भी इसी दौरान किया जाता है। चुनाव का आधिकारिक दिन नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाला मंगलवार होता है, जो 3 नवंबर 2026 तय है, हालांकि कई राज्यों में डाक और शुरुआती मतदान की प्रक्रिया पहले से ही चल रही थी। यह चुनाव इस बात का फैसला करते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में कांग्रेस के प्रत्येक सदन पर किस दल का नियंत्रण रहेगा। बहुमत पाने वाला दल ही विधायी एजेंडा तय करता है, प्रमुख समितियों के अध्यक्ष चुनता है और सीनेट में वरिष्ठ अधिकारियों व न्यायाधीशों की नियुक्ति की पुष्टि पर नियंत्रण रखता है। इन चुनावों में राष्ट्रपति का पद दांव पर नहीं होता है, क्योंकि राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्येक चार वर्ष पर होता है और अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में निर्धारित है। आमतौर पर मध्यावधि चुनाव सत्तारूढ़ राष्ट्रपति की पार्टी पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखे जाते हैं, और ऐतिहासिक रूप से इस चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी हाउस में सीटें गंवाती रही है।

मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड पर मध्यावधि नतीजों का प्रभाव

वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि मध्यावधि चुनावों के परिणामों पर अमेरिकी डॉलर की प्रतिक्रिया लंबे समय तक चलने वाले किसी नए ट्रेंड के बजाय एक सीमित और अल्पकालिक हलचल बनकर रह जाती है। बंटी हुई कांग्रेस की स्थिति को पहले से ही आधारभूत परिदृश्य माना जा रहा था और बाजार में इसकी काफी हद तक पहले से ही प्राइसिंग हो चुकी थी। चुनाव परिणामों का अधिक प्रत्यक्ष असर ट्रेजरी यील्ड पर देखा जाता है। ऐसे नतीजे जो राजकोषीय प्रोत्साहन की उम्मीदों को बढ़ाते हैं, वे आमतौर पर बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों को ऊपर उठाते हैं, जबकि सरकारी खर्च को सीमित करने वाला गतिरोध इन दोनों को नीचे खींच सकता है। इसके अलावा सरकारी फंडिंग और ऋण सीमा से जुड़े राजनीतिक टकराव भी सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर को अस्थाई सहारा दे सकते हैं। हालांकि छह से बारह महीने के व्यापक नजरिए से देखें तो आर्थिक विकास की रफ्तार और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियां किसी भी चुनावी परिणाम की तुलना में बाजारों के लिए अधिक मायने रखती हैं।

वॉल स्ट्रीट का ऐतिहासिक रुख और एसएंडपी 500 का रिकॉर्ड

शेयर बाजार के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी शेयर बाजार मध्यावधि चुनावों से पहले कमजोर और नतीजों के बाद काफी मजबूत रुख दिखाते रहे हैं। वर्ष 1950 से अब तक के इतिहास में एसएंडपी 500 सूचकांक प्रत्येक मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद हमेशा उच्च स्तर पर रहा है। यह रिकॉर्ड 19 में से 19 बार पूरी तरह खरा उतरा है, जिसमें औसतन लगभग 15% का लाभ दर्ज किया गया। विश्लेषक इस पैटर्न को चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अनिश्चितता के समाप्त होने से जोड़ते हैं। हालांकि अतीत का प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता, और रणनीतिकारों का कहना है कि 2026 में शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन इस ऐतिहासिक सिलसिले की कड़ी परीक्षा ले सकता है। बाजार अक्सर बंटी हुई सरकार का स्वागत करते हैं, क्योंकि दोनों दलों के बंटे होने से करों, खर्च और नियमों में बड़े बदलावों की गुंजाइश कम हो जाती है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति के कार्यकाल में संसद में बंटे हुए नियंत्रण के बाद के वर्षों में एसएंडपी 500 ने ऐतिहासिक रूप से बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस परिदृश्य में केवल फंडिंग की समय-सीमा, कर्ज सीमा से जुड़े झगड़े और संसदीय जांच से अल्पकालिक अस्थिरता पैदा होने का जोखिम रहता है।

अन्य मुद्राओं और सोने के भाव में हलचल

डॉलर की कमजोरी का प्रभाव अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों पर भी साफ दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलकर एशियाई सत्र में 0.6965 के करीब कारोबार करता दिखा। सुरक्षित निवेश की मांग और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने डॉलर को कमजोर किया, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी आरबीए के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी देखी गई और कमजोर डॉलर के दम पर यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर मजबूती के साथ टिका रहा। कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स की जीत से नीतिगत गतिरोध की आशंका ने निवेशकों को सोने जैसे सुरक्षित ठिकानों की तरफ मोड़ा, जिससे पीली धातु को साप्ताहिक उच्च स्तर के निकट बने रहने में मदद मिली। इसके विपरीत शुरुआती दौर में एक महीने के निचले स्तर तक फिसला डॉलर अब अपने नुकसान की भरपाई करने में जुटा है।

सवाल-जवाब

USD/JPY में गिरावट के बाद क्या स्थिति देखने को मिली?
सत्र के निचले स्तर 157.39 तक गिरने के बाद USD/JPY की जोड़ी दोबारा संभलकर 158.00 के स्तर से ऊपर कारोबार करने लगी।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से बाजार में क्या बदलाव आया?
डेमोक्रेट्स द्वारा प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण की खबरों से शुरुआती दौर में डॉलर सूचकांक सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
सोने की कीमत किस मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बनी हुई है?
डॉलर में आई कमजोरी और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर मजबूती से टिका हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर चल रही हैं और इसका क्या कारण है?
पश्चिम एशिया में अमेरिकी हमलों और युद्ध के बढ़ते जोखिम के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के काफी ऊपर बनी हुई हैं।
इतिहास में मध्यावधि चुनाव के बाद एसएंडपी 500 का प्रदर्शन कैसा रहा है?
वर्ष 1950 के बाद से एसएंडपी 500 ने हर मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद 19 में से 19 बार औसतन लगभग 15% की बढ़त दर्ज की है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD का कारोबार किस स्तर पर देखा गया?
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरकर 0.6965 के आसपास कारोबार करता दिखा।
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