वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय अनिश्चितता का माहौल है क्योंकि दुनिया भर के निवेशक अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े के आने से पहले विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापार काफी सीमित दायरे में सिमट गया है। प्रमुख मुद्राओं जैसे ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही है। इसके साथ ही कीमती धातुओं में भी ट्रेडर्स रक्षात्मक रुख अपनाए हुए हैं और दरों में भावी बदलावों को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख का आकलन कर रहे हैं।
ब्रिटिश पाउंड का दायरा हुआ सीमित
ब्रिटिश पाउंड (GBP) का अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले कारोबार काफी संकीर्ण दायरे में बना हुआ है। हालिया सत्रों में पाउंड ने 1.3531 और 1.3567 के बीच उतार-चढ़ाव दर्ज किया और अंत में 1.3547 के स्तर पर लगभग 0.05 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। अल्पावधि यानी 24 घंटे के दृष्टिकोण से पाउंड के 1.3520 और 1.3570 के बीच ही कारोबार करने की संभावना है क्योंकि कीमतों में कोई नया मजबूत संकेत देखने को नहीं मिला है।
मध्यम अवधि यानी 1 से 3 हफ्तों के परिदृश्य पर नजर डालें तो 04 सितंबर को जब पाउंड 1.3530 के स्तर पर था, तब इसके 1.3480 से 1.3600 के बीच रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि पिछले कुछ दिनों में पाउंड में थोड़ी मजबूती जरूर देखी गई है, लेकिन ऊपर की तरफ जाने की गति में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है। इस स्थिति में पाउंड के लिए तटस्थ रुख बनाए रखा गया है, और अब ऐसा लगता है कि 1.3495 से 1.3590 का नया संकीर्ण दायरा आने वाले दिनों में कीमतों की आवाजाही को रोकने के लिए पर्याप्त होगा।
जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मिला-जुला रुख
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) और अमेरिकी डॉलर का युग्म 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकित होता हुआ देखा गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दिया है, जिससे यह 14 मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व (Fed) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया है। इन विपरीत कारकों की वजह से इस मुद्रा युग्म की ऊपरी बढ़त पर अंकुश लगा हुआ है।
दूसरी ओर, USD/JPY युग्म एशियाई सत्र में 153.50 के स्तर से ऊपर स्थिर होने में कामयाब रहा। इसके बावजूद यह इस सप्ताह के शुरुआत में बने अपने सात महीने के निचले स्तर के करीब ही बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दरों में वृद्धि के कड़े रुख ने जापानी येन (JPY) को मजबूती प्रदान की है। वहीं, सितंबर में अमेरिकी फेड द्वारा दरों में कटौती या बदलाव की बदलती संभावनाओं और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का दबाव थोड़ा कम हुआ है, जिससे इस जोड़ी को निचले स्तरों पर सहारा मिला है।
समीक्षाधीन स्तरों पर अटकी सोने की कीमतें
कीमती धातु सोना intraday कारोबार के दौरान 4,400 डॉलर के निचले स्तर से नीचे गिरने के बाद वापस संभलने में सफल रहा। इस सुधार के साथ सोना पिछले दिन के एक सप्ताह के निचले स्तर से थोड़ा ऊपर आ गया है। हालांकि, यह अभी भी 4,450 डॉलर के महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर से नीचे ही कारोबार कर रहा है। निवेशकों और बुलियन ट्रेडर्स में आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों को लेकर हिचकिचाहट साफ देखी जा सकती है।
बाजार की नजरें आज जारी होने वाले अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) पर टिकी हैं। इसके बाद शुक्रवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े सामने आएंगे। ये दोनों आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि सोना 4,450 डॉलर का स्तर पार कर पाता है या नहीं।
अमेरिकी रोजगार आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख
हाल ही में जारी अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व की भावी नीति को लेकर जारी बहस को खत्म करने के बजाय नीति निर्माताओं को अपने विकल्प खुले रखने की छूट दे दी है। श्रम बाजार में कई महीनों तक सुस्ती के संकेत मिलने के बाद, अगस्त के महीने में उम्मीद से बेहतर वापसी दर्ज की गई। इस अप्रत्याशित सुधार ने केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों के मामले में कोई भी जल्दबाजी वाला कदम उठाने के बजाय स्थिति देखकर फैसला लेने की सुविधा प्रदान की है।



















