मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में स्थित कैरांग गांव में निर्माणाधीन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) परियोजना पर काम रोक दिया गया है। जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) के केंद्रीय कार्यकारी समिति के पदाधिकारियों ने कार्यस्थल का औचक मुआयना करने के बाद यह कदम उठाया। संगठन का कहना है कि परियोजना का ठेका संभालने वाली कंपनी ने राज्य के नियमों को ताक पर रखकर बिना जरूरी अनुमति और कागजी कार्रवाई के राज्य से बाहर के सैकड़ों गैर-जनजातीय मजदूरों को काम में लगा रखा था।
औचक निरीक्षण के बाद कार्यस्थल पर कार्रवाई
जयंतिया नेशनल काउंसिल की केंद्रीय कार्यकारी समिति के महासचिव वांशवा सुटिंग के नेतृत्व में एक टीम निर्माण स्थल पर पहुंची थी। निरीक्षण के दौरान काउंसिल ने पाया कि परियोजना का जिम्मा बद्री राय कंपनी के पास है। सुटिंग ने जानकारी दी कि कंपनी ने निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए मेघालय से बाहर के गैर-जनजातीय कामगारों को बड़ी तादाद में बुलवाया था। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर मौजूद ऐसे बाहरी मजदूरों की तादाद कई सौ से कम नहीं थी, लेकिन उनके पास राज्य में वैध तरीके से मजदूरी करने के लिए तय दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
राज्य के नियमों और पंजीकरण दस्तावेजों का उल्लंघन
संगठन के अनुसार, बाहरी गैर-जनजातीय श्रमिकों के रोजगार को लेकर मेघालय सरकार और स्थानीय स्वायत्त परिषदों ने स्पष्ट कानूनी प्रावधान तय किए हैं। वांशवा सुटिंग ने रेखांकित किया कि राज्य में बाहर से आने वाले किसी भी गैर-जनजातीय श्रमिक के पास MRSSA 2020 के तहत जारी पंजीकरण कार्ड होना अनिवार्य है। इसके अलावा, ऐसे श्रमिकों को पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय में विधिवत पंजीकृत होना चाहिए और जयंतिया हिल्स जिला स्वायत्त परिषद ट्रेडिंग बाय नॉन-ट्राइबल्स रूल्स 2015 के अंतर्गत उनके पास वैध एम्प्लॉयी सर्विस लाइसेंस उपलब्ध होना जरूरी है। इन अनिवार्य कागजातों के अभाव के कारण संगठन ने कथित रूप से बिना दस्तावेजों वाले बाहरी श्रमिकों से कराया जा रहा काम रुकवा दिया, हालांकि स्थानीय मजदूरों को काम जारी रखने की अनुमति दी गई।
परियोजना के महत्व और स्थानीय रोजगार पर जोर
जयंतिया नेशनल काउंसिल ने यह स्पष्ट किया है कि वे एकलव्य आवासीय विद्यालय परियोजना के विरोधी नहीं हैं। काउंसिल ने इस बात को स्वीकार किया कि यह संस्थान जनजातीय समाज और पूरे इलाके के समग्र विकास के लिए बेहद मुफीद साबित होगा। इस शैक्षणिक परिसर में हॉस्टल की सुविधा, खेल मैदान और उपकरण, कौशल विकास कार्यक्रम और विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण अवसर जोड़े जाने हैं, जिससे जनजातीय युवाओं को सीधी मदद मिलेगी। इसके साथ ही, भविष्य में स्कूल के संचालन के दौरान अलग-अलग विभागों में स्थानीय युवाओं के लिए नियमित रोजगार की संभावनाएं भी पैदा होंगी।
स्थानीय कार्यबल की अनदेखी पर जताई चिंता
संस्थान के लाभ गिनाते हुए काउंसिल ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि इतने बड़े निर्माण स्थल पर स्थानीय लोगों को दरकिनार कर दिया गया था। सुटिंग ने कहा कि सबसे निराशाजनक बात यह रही कि मौके पर केवल गैर-जनजातीय मजदूर ही काम करते पाए गए। काउंसिल ने मेघालय के भीतर विभिन्न विकास परियोजनाओं को पूरा कर रही तमाम कंपनियों को आगाह किया कि जब राज्य में काम करने योग्य स्थानीय कार्यबल सुलभ है, तो कंपनियों को बाहर से श्रमिकों को लाने की प्रवृत्ति छोड़नी चाहिए। यह पूरा स्कूल प्रोजेक्ट जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन आता है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।



















