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मेघालय में प्रवासी श्रमिकों के फर्जी दस्तावेजों पर सख्ती, पकड़े जाने पर जेल और जुर्माने की चेतावनीमेघालय
1 अक्तू॰ 2026, 2:18 pm (1 घंटे पहले)· 0

मेघालय में प्रवासी श्रमिकों के फर्जी दस्तावेजों पर सख्ती, पकड़े जाने पर जेल और जुर्माने की चेतावनी

मेघालय श्रम विभाग ने चेक गेटों पर नकली पंजीकरण प्रमाणपत्र दिखाने वालों को भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। श्रमिकों का पंजीकरण न कराने वाले नियोक्ताओं पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

मेघालय में काम करने आने वाले बाहरी कामगारों के लिए अनिवार्य कागजी कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के श्रम आयुक्त बंटेइलांग खारशंडी ने साफ किया है कि चेक गेटों पर फर्जी पंजीकरण प्रमाण पत्र या नकली पावती रसीदें पेश करने वालों के खिलाफ आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। अवैध रूप से कागजात की नकल तैयार करना और उनका उपयोग करना भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

पंजीकरण के कानूनी नियम और नियोक्ताओं की जवाबदेही

मेघालय आइडेंटिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन ऑफ माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट एंड रूल्स 2020 के कानूनी प्रावधानों के तहत राज्य में कदम रखने वाले प्रत्येक प्रवासी मजदूर के लिए पंजीकरण कराना और अपना अलग पंजीकरण कार्ड हासिल करना अनिवार्य है। श्रम आयुक्त ने ठेकेदारों, कंपनियों और स्थानीय नियोक्ताओं को चेताया है कि वे अपनी परियोजनाओं में कार्यरत हर बाहरी श्रमिक का कानूनी पंजीकरण सुनिश्चित करें। इस कानूनी दायित्व से बचने वाले नियोक्ताओं पर चरणबद्ध तरीके से आर्थिक और न्यायिक कार्रवाई तय की गई है।

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लापरवाही बरतने वाले नियोक्ताओं पर पहली बार नियम तोड़ने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार वही गलती दोहराने पर जुर्माने की रकम बढ़कर 25,000 रुपये हो जाएगी। इसके बाद भी यदि कोई नियोक्ता तीसरी बार या उससे अधिक बार नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, अधिकतम तीन महीने का साधारण कारावास या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और शुल्क

प्रवासी कामगारों के लिए पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इच्छुक आवेदकों को संबंधित पंजीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा, जिसके लिए 50 रुपये का सरकारी शुल्क तय किया गया है। श्रमिक और नियोक्ता इस सुविधा का लाभ श्रम आयुक्त के आधिकारिक पोर्टल, इन्वेस्ट मेघालय पोर्टल अथवा मेघालय स्टेट स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसपीएसडीसी) की वेबसाइट के जरिए ले सकते हैं। इसके अलावा जमीनी स्तर पर सुविधा देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर और जिला श्रम कार्यालयों के माध्यम से भी आवेदन जमा किए जा सकते हैं।

सत्यापन प्रक्रिया और कार्ड की वैधता

संशोधन नियम 2026 के ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार पंजीकरण के लिए पहचान प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आवेदक वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, बीपीएल कार्ड या सरकार द्वारा जारी कोई अन्य वैध पहचान पत्र संलग्न कर सकते हैं। हालांकि इस सूची में आधार कार्ड को शामिल नहीं किया गया है। पहचान पत्र के साथ-साथ पुलिस सत्यापन रिपोर्ट लगाना भी अनिवार्य होगा।

दस्तावेजों की जांच में तेजी लाने के लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) का उपयोग अनंतिम सत्यापन के लिए किया जाएगा। प्रशासन इस पूरी सत्यापन प्रक्रिया को 30 दिनों की समय सीमा के भीतर पूरा करेगा। जारी किया गया पंजीकरण कार्ड 179 दिनों की अवधि के लिए वैध रहेगा। कामगार इस कार्ड की समय सीमा खत्म होने से 30 दिन पहले इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

मेघालय में फर्जी श्रमिक पंजीकरण दस्तावेज दिखाने पर क्या सजा हो सकती है?
फर्जी दस्तावेज या नकली पावती पर्ची दिखाना भारतीय न्याय संहिता की धारा 336 के तहत कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।
प्रवासी कामगारों का पंजीकरण न कराने वाले नियोक्ताओं पर कितना जुर्माना लगेगा?
पहली बार 10,000 रुपये और दूसरी बार 25,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके बाद अपराध दोहराने पर 1 लाख रुपये जुर्माना या तीन महीने की कैद हो सकती है।
पंजीकरण के लिए कौन से दस्तावेज मान्य हैं और किसे बाहर रखा गया है?
वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या बीपीएल कार्ड मान्य हैं और साथ में पुलिस रिपोर्ट जरूरी है। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड मान्य नहीं है।
प्रवासी श्रमिक कार्ड की वैधता कितने दिनों की होती है?
यह कार्ड 179 दिनों के लिए वैध रहता है और इसकी समाप्ति से 30 दिन पहले नवीनीकरण कराया जा सकता है।
श्रमिक पंजीकरण के लिए सरकारी आवेदन शुल्क कितना है?
ऑनलाइन आवेदन के लिए 50 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
दस्तावेजों के सत्यापन में कितना समय लगता है?
सीसीटीएनएस के जरिए अनंतिम जांच की जाती है और पूरी सत्यापन प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 मिनट पहले

फर्जी कागजात दिखाकर बचने वालों पर बीएनएस की धारा के तहत सीधा शिकंजा कसना जरूरी था। जब तक नियोوक्ताओं पर भारी जुर्माना और जेल का डर नहीं होगा, तब तक नियमों की ऐसी अनदेखी बंद नहीं होने वाली।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 मिनट पहले

करण, बात तो सही है पर एक लाख का जुर्माना और जेल शायद कुछ ज़्यादा हो गया। इससे तो छोटे ठेकेदार परेशान हो जाएंगे।

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