मेघालय उच्च न्यायालय ने शिलांग स्थित एक होमस्टे में तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपी उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्राथमिकी को रद्द कर दिया है। पीड़ित पक्ष और आरोपी छात्रों के बीच आपसी सहमति से समझौता होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने होमस्टे मालिक और प्रबंधक की सहमति के आधार पर सोमवार को यह आदेश जारी किया। अदालत ने माना कि छात्रों के भविष्य, उनकी कम उम्र और करियर की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले को आगे बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
वित्तीय मुआवजा और बिना शर्त माफीनामा
कानूनी कार्यवाही समाप्त करने के समझौते के तहत, आरोपी छात्रों ने होमस्टे मालिक को पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में 2.06 लाख रुपये का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त, छात्रों ने अपने दुर्व्यवहार और संपत्ति के नुकसान के लिए बिना शर्त लिखित माफीनामा भी सौंपा है। समझौते की शर्तों को और मजबूत करते हुए, अदालत ने दो मुख्य आरोपी छात्रों को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर संपत्ति के मालिक को 25,000-25,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करें। इस तरह पीड़ित मालिक को कुल 2.56 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि और पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारी
यह विवाद 11 जुलाई को उस समय शुरू हुआ था जब शिलांग के लैटमुखराह पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश से आए छात्रों के एक समूह ने होमस्टे में रुकने के दौरान वहां की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया था। विवाद का मुख्य कारण कमरे की स्वीकृत क्षमता से अधिक मेहमानों को ठहराने की अनुमति न मिलना था। मना किए जाने पर छात्रों ने कथित तौर पर प्रबंधक को धमकियां दीं और तोड़फोड़ की। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 जुलाई को पश्चिम बंगाल से छह छात्रों को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी, जिसके बाद उन्होंने मामले को पूरी तरह समाप्त कराने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया।
छात्रों की उम्र और भविष्य को देखते हुए राहत
मामले में शामिल आरोपियों की उम्र को ध्यान में रखते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर दलीलों के अनुसार, 17 अगस्त को परिजनों और शुभचिंतकों की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच सुलह हुई थी। छह आरोपियों में से तीन नाबालिग हैं, जिनमें से एक की उम्र 15 वर्ष और दो की उम्र 17 वर्ष है। एक अन्य आरोपी हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है, जबकि बाकी दो आरोपी 20 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के हैं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। न्यायमूर्ति डेरे ने कहा कि चूंकि दोनों पक्ष आपस में मामला सुलझा चुके हैं और आरोपी छात्र अपनी पढ़ाई के महत्वपूर्ण दौर में हैं, इसलिए प्राथमिकी रद्द करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
सामुदायिक सेवा के निर्देश और अगली सुनवाई
अदालत ने दो बालिग छात्रों को मौद्रिक मुआवजे के साथ-साथ छह दिनों की सामुदायिक सेवा करने का भी आदेश दिया है। इन दोनों छात्रों को 8 सितंबर से शिलांग के लाचुमिएरे स्थित सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में तीन दिनों तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सेवा करनी होगी। यह कार्य डॉ. कमलजीत सिंह की देखरेख में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें जीवा केयर्स संस्था द्वारा चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप' में भाग लेना होगा। इस अभियान के तहत शिलांग शहर भर में फूलों के पौधों और कचरा पात्रों के रखरखाव के साथ-साथ उमख्राह नदी की सफाई का कार्य शामिल है।
बाकी चार छात्रों को उनकी कम उम्र के कारण सामुदायिक सेवा से छूट दी गई है। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि संबंधित सार्वजनिक अभियोजक के माध्यम से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए जो यह पुष्टि करे कि दोनों छात्रों ने अपनी सामुदायिक सेवा को संतोषजनक ढंग से पूरा किया है या नहीं। अदालत ने इस अनुपालन रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने के लिए मामले की अगली तिथि 15 सितंबर तय की है।



















