विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति ने राजधानी नई दिल्ली से बाहर निकलकर पहली बार जमीनी स्तर पर परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में सोमवार को मेघालय के शिलांग में धार्मिक संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य हितधारकों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर उनकी राय जानी गई।
पूर्वोत्तर राज्यों से 40 संगठनों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में मेघालय के अलावा असम, नगालैंड और मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों के लगभग 40 संगठनों ने भाग लिया और अपने सुझाव समिति को सौंपे। समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने इस बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली से बाहर विचार-विमर्श के लिए शिलांग को पहला स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले स्थानीय संगठनों की चिंताओं को सीधे सुनने का विशेष आग्रह किया था।
लिखित जवाब के लिए 15 दिनों का वक्त
समीक्षा बैठक के दौरान समिति ने कई संगठनों से उनके सुझावों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। इन सभी संबंधित संस्थाओं को अपने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिनों की मोहलत दी गई है। संसदीय समिति अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले देश के अन्य हिस्सों में भी जाएगी। योजना के मुताबिक, समिति आने वाले दिनों में कोच्चि और चेन्नई में भी इसी तरह के परामर्श सत्र आयोजित करने जा रही है।
सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा में संतुलन
समिति अध्यक्ष के अनुसार, प्रस्तावित कानूनी बदलावों का मकसद उन संगठनों के लिए कामकाज आसान बनाना है जो वास्तविक रूप से समाज कल्याण से जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए हैं। इसके साथ ही, कानून में ऐसे सुरक्षात्मक उपाय भी जोड़े जा रहे हैं ताकि देश के राष्ट्रीय हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त रोक लगाई जा सके। डॉ. संजय जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली संस्थाओं समेत छोटे संगठनों की परेशानियों को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी हितधारकों से मिले ज्ञापनों और सुझावों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
























