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शिलांग में एफसीआरए संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने 40 संगठनों से ली रायमेघालय
2 नव॰ 2026, 6:02 pm (1 घंटे पहले)· 1

शिलांग में एफसीआरए संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने 40 संगठनों से ली राय

विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक 2026 की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति ने राष्ट्रीय राजधानी से बाहर पहली बैठक शिलांग में की, जहां पूर्वोत्तर के करीब 40 संगठनों ने अपनी बात रखी।

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति ने राजधानी नई दिल्ली से बाहर निकलकर पहली बार जमीनी स्तर पर परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में सोमवार को मेघालय के शिलांग में धार्मिक संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अन्य हितधारकों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर उनकी राय जानी गई।

पूर्वोत्तर राज्यों से 40 संगठनों की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में मेघालय के अलावा असम, नगालैंड और मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों के लगभग 40 संगठनों ने भाग लिया और अपने सुझाव समिति को सौंपे। समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने इस बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली से बाहर विचार-विमर्श के लिए शिलांग को पहला स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले स्थानीय संगठनों की चिंताओं को सीधे सुनने का विशेष आग्रह किया था।

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लिखित जवाब के लिए 15 दिनों का वक्त

समीक्षा बैठक के दौरान समिति ने कई संगठनों से उनके सुझावों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। इन सभी संबंधित संस्थाओं को अपने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिनों की मोहलत दी गई है। संसदीय समिति अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले देश के अन्य हिस्सों में भी जाएगी। योजना के मुताबिक, समिति आने वाले दिनों में कोच्चि और चेन्नई में भी इसी तरह के परामर्श सत्र आयोजित करने जा रही है।

सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा में संतुलन

समिति अध्यक्ष के अनुसार, प्रस्तावित कानूनी बदलावों का मकसद उन संगठनों के लिए कामकाज आसान बनाना है जो वास्तविक रूप से समाज कल्याण से जुड़ी गतिविधियों में लगे हुए हैं। इसके साथ ही, कानून में ऐसे सुरक्षात्मक उपाय भी जोड़े जा रहे हैं ताकि देश के राष्ट्रीय हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त रोक लगाई जा सके। डॉ. संजय जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली संस्थाओं समेत छोटे संगठनों की परेशानियों को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले सभी हितधारकों से मिले ज्ञापनों और सुझावों का विस्तृत अध्ययन करेगी।

सवाल-जवाब

संसदीय समिति ने शिलांग में किस विषय पर बैठक की?
समिति ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर धार्मिक और सामाजिक संगठनों की राय जानने के लिए बैठक की।
शिलांग में आयोजित बैठक में किन राज्यों के संगठनों ने हिस्सा लिया?
इस बैठक में मेघालय के साथ-साथ असम, नगालैंड और मणिपुर के लगभग 40 संगठनों ने भाग लिया।
बैठक के लिए शिलांग शहर को क्यों चुना गया?
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा के विशेष अनुरोध पर समिति ने नई दिल्ली से बाहर पहली बैठक शिलांग में आयोजित की।
संगठनों को स्पष्टीकरण देने के लिए कितना समय दिया गया है?
समिति ने जिन संगठनों से अतिरिक्त विवरण मांगे हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना लिखित पक्ष रखने को कहा गया है।
शिलांग के बाद समिति किन शहरों में परामर्श बैठकें करेगी?
संसदीय समिति अपनी सिफारिशें अंतिम रूप देने से पहले कोच्चि और चेन्नई में भी ऐसी ही परामर्श बैठकें करेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·27 मिनट पहले

पूर्वोत्तर के संगठनों की बात सीधे सुनना अच्छा कदम है, उम्मीद है एनजीओ की मुश्किलें कम होंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·48 मिनट पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर एनजीओ का काम कसना ठीक है, पर इससे छोटे और असली संगठनों को भी परेशानी हो सकती है।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·48 मिनट पहले

अर्जुन जी, जैसे पंचांग में ग्रहों की गति और मनुष्य के कर्मों में संतुलन जरूरी है, वैसे ही कानून में भी सुरक्षा और जनहित का मेल बिठाना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पूर्वोत्तर के संगठनों को अपनी बात रखने का मौका मिला है, देखना होगा कि समिति सुझावों पर क्या कदम उठाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

करण भाई, बात तो सही है। अब देखना यह है कि 15 दिन में ये संगठन क्या लिखकर देते हैं और समिति उस पर कितना गौर करती है।

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